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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Exclusive: Water samples taken from Makhdumpur Ganga Ghat to check water quality

Exclusive: पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए मखदूमपुर गंगा घाट से लिए गए जल सैंपल, प्रदूषण बढ़ा रही प्लेज की खेती 

Tue, 01 Dec 2020 02:32 PM IST
Dimple Sirohi रविंद्र चौहान, अमर उजाला, हस्तिनापर
रविंद्र चौहान, अमर उजाला, हस्तिनापर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 01 Dec 2020 02:32 PM IST
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Exclusive: Water samples taken from Makhdumpur Ganga Ghat to check water quality
ganga - फोटो : अमर उजाला

गंगा में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर सोमवार को जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने क्षेत्र के मखदूमपुर गंगा घाट पर गंगाजल के सैंपल लिए। नमामि गंगे परियोजना के तहत लिए गए इन नमूनों से गंगाजल की गुणवत्ता जांची जाएगी। सख्त निर्देश के बावजूद  कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा प्लास्टिक, पूजा के फूल, पुराने कपड़े और कूड़ा आदि डालने से परहेज नहीं किया। 

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 केंद्र सरकार ने गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने पर अरबों रुपये खर्च किए हैं। बावजूद इसके गंगा प्रदूषण से मुक्त नहीं हो पाई है। कुछ दिन पहले आई एक रिपोर्ट में हरिद्वार में भी गंगा जल को पीने योग्य नहीं बताया गया है।

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इसके मद्देनजर मेरठ में जल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा ने सोमवार को मखदूमपुर गंगा घाट और उसके आसपास के अलग-अलग स्थानों से गंगा जल के सैंपल लिए। मिश्रा ने बताया कि पानी में प्रदूषण की जांच की रिपोर्ट अगले तीन-चार दिन में आ जाएगी। जांच से पता चलेगा कि पानी कौन सी श्रेणी का है और यह पीने लायक है या नहीं। जांच रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी जाएगी। 

प्रदूषण बढ़ाने में प्लेज की भी भूमिका
हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र के बड़े भूभाग से गंगा होकर गुजरती है जिसके किनारे बड़े पैमाने पर प्लेज की खेती की जाती है। प्लेज को जल्दी तैयार करने के लिए मृत जीवो के अवशेष व पोल्ट्री फार्म से मुर्गों की बीट सहित कई जहरीली रासायनिक खादों का प्रयोग होता है। इससे भी गंगा प्रदूषित होती है। 

लॉकडाउन में हुआ था बड़ा सुधार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गंगा में प्रदूषण की स्थित का पता लगाने को लॉकडाउन घोषित होने के कुछ दिन बाद गंगा के अप व डाउन स्ट्रीम में सैंपल लिए गए। सैंपल के परीक्षण से सामने आया कि अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद गंगा की सेहत में जितना सुधार नहीं हुआ था, जितना लॉकडाउन में देखने को मिला।

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