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Exclusive: मेरठ पुलिस का सिरदर्द बने थानों में खड़े वाहन, कीमत से अधिक जुर्माना, चालकों ने थानों में छोड़े

Mon, 22 Feb 2021 09:58 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 22 Feb 2021 09:58 AM IST
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Exclusive: vehicle standing in Meerut police stations became headache to police, owners are not coming to take back
पुलिस थाने में खड़ी बाइक्स - फोटो : amar ujala

मेरठ जिले के थानों में खड़े वाहन विभाग का सिरदर्द बनने लगे हैं। मुकदमों को छोड़ दें तो करीब आठ सौ वाहन ऐसे हैं, जिन्हें छुड़ाने के लिए वाहन मालिक महीनों से नहीं आए हैं। 

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कोरोना का प्रकोप शुरू होने के बाद 1 अप्रैल, 20 से 31 जनवरी, 21 तक जनपद में करीब दो लाख वाहनों का चालान किया गया है। इनमें सीज वाहनों की संख्या लगभग 1700 रही।
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थानों में पहले से ही खड़े वाहनों के बीच नए वाहन पहुंचने से थाने की आंतरिक व्यवस्था बिगाड़ दी है। कई महीने की मशक्कत के बाद 900 वाहन छुड़ा लिए गए लेकिन 800 वाहन थानों में ही हैं। 

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वैध दस्तावेज दिखाएं कम हो जाएगी जुर्माना राशि
सीज किए गए जिन वाहनों का जुर्माना अधिक है, उनके मालिक वैध दस्तावेज के साथ संपर्क करें। जितने कागज वह दिखाएंगे, उतने का चालान रद्द कर उनकी गाड़ी रिलीज कर दी जाएगी।  - जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी ट्रैफिक

जुर्माने की ज्यादा राशि बड़ी बाधा
थानों में खड़े वाहन न छुड़ाने की एक प्रमुख वजह मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के बाद जुर्माना राशि बढ़ाया जाना है। थानों में लंबे समय से खड़े वाहनों की कीमत उस पर लगे जुर्माने से काफी कम है। इसलिए वाहन स्वामी कीमत से ज्यादा जुर्माना देने से बच रहे हैं। 

अपराध और जुर्माना राशि
चालान     शुल्क
इंश्योरेंस    2,000 
प्रदूषण    10,000 
ड्राइविंग लाइसेंस     5,000 
रजिस्ट्रेशन    5,000 
नंबर प्लेट    5,000 
हेलमेट    1,000 
तीन सवारी    1,000 
ओवर स्पीड    2,000

फिटनेस न होने से थम गए व्यावसायिक वाहन 
वाहनों की फिटनेस में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई एम-परिवहन एप के जरिए पर्याप्त ऑनलाइन स्लॉट न मिलने के कारण व्यावसायिक वाहनों के पहिये थमने लगे हैं। कुछ ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि स्लॉट संख्या और इसकी अवधि कम होने के कारण वाहनों को बाहर नहीं भेज पा रहे हैं। इससे नुकसान हो रहा हैं।

आरटीओ में वाहनों ले जाए बिना ही फिटनेस कराने की शिकायत पर एप से ऑनलाइन स्लॉट की व्यवस्था की गई है।  डीएल की तर्ज पर ऑनलाइन स्लॉट लेना पड़ता है। मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा ने बताया कि फिटनेस का 10 से 15 दिन आगे का समय मिलने के चलते वाहनों को खड़ा रखना पड़ रहा है।

मेरठ ट्रांसपोर्ट यूनियन के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश शर्मा का कहना है कि उनके पांच ट्रक बिना फिटनेस के खड़े हैं। ऑनलाइन बुकिंग के बाद 10 दिन आगे का समय मिला है। शासन ने जनवरी 2019 में दो साल का फिटनेस प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था की थी। दो साल के बाद प्रत्येक साल फिटनेस करानी पड़ती है। 

 रोजाना किए जाएं 100 स्लॉट
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि रोजाना स्लॉट की संख्या 100 तक करनी होगी। अभी यह संख्या 40 तक है। स्लॉट बढ़ने पर ही बैकलॉग खत्म हो सकेगा। संभागीय निरीक्षक राहुल शर्मा का कहना है कि फिटनेस स्लॉट कम होने से फिटनेस में समय लगता है। शासन स्तर पर स्लॉट बढ़ाए जाने पर कुछ राहत मिल सकेगी।

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