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Exclusive: बेटियों ने दी मुखाग्नि, समाज ने बांधी पगड़ी, पिता की हार्ट अटैक से 4 जनवरी को हो गई थी मौत

Tue, 17 Jan 2023 04:50 PM IST
Dimple Sirohi मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 17 Jan 2023 04:50 PM IST
सार

मेरठ की बेटी वैष्णवी ने पिता की मौत के बाद न सिर्फ मुखग्नि दी बल्कि हवन पूजन के साथ सारे काम भी पूरे कराए। इस दौरान बेटी को पगड़ी भी बांधी गई। 

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Exclusive: Daughters offer funeral pyre to father in Meerut
पिता को बेटियों ने दी मुखग्नि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेटियों को कोख में ही मार देने वाले और बेटी होने पर शोक जताने वाले उन पिता के लिए मोदीपुरम के अप्पू एंक्लेव निवासी दो बेटियां आज एक मिसाल के रूप में बनकर उभरी। पिता ने अपना धर्म निभाया तो बेटियों ने भी पिता की मौत के बाद विधि विधान से सभी कार्य संपन्न कराकर अपना धर्म निभाया। मुखाग्नि से लेकर रस्म पगड़ी के सभी कार्य बेटियों ने किए।

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पल्लवपुरम थाना क्षेत्र के अप्पू एंकलेव के 76 नंबर फ्लैट में रहने वाले 54 वर्षीय अखिलेश पाण्डेय का 4 जनवरी को हृदय गति रुकने से निधन हो गया था। अखिलेश पांडेय मेरठ की बायो लाइफ मेडिकल कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे वह अपनी पत्नी रजनी पाण्डेय के साथ रहते थे। उनके कोई पुत्र नही था। जबकि दो बेटी शूचि और वैष्णवी है जो मुंबई में रहकर नौकरी करती हैं। शूची की शादी हो चुकी है वह भी मुंबई में रहती है।
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पिता की मौत की जानकारी मिलने पर दोनों बेटियां मोदीपुरम पहुंची। छोटी बेटी वैष्णवी ने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। सोमवार को रस्म पगड़ी का कार्यक्रम हुआए जिसमें छोटी बेटी वैष्णवी ने विधि विधान से सभी कार्य संपन्न कराए। दोनों बहनों ने एक दूसरे का साथ देते हुए पुत्र धर्म निभाया।
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Exclusive: Daughters offer funeral pyre to father in Meerut
पिता को बेटियों ने दी मुखग्नि - फोटो : अमर उजाला

इस दौरान मौजूद सभी लोगों ने बेटियों के इस कदम की सराहना की और कहा आज बेटियां बेटों से कम नहीं है। उन पिताओं को इन बेटियों से सबक लेना चाहिएए जो गर्भ में ही बेटियों को मार देते हैं या बेटियों के पैदा होने पर शोक जताते हैं। लोगों ने दोनों बेटियों को आदर्श बताते हुए आगे बढने का संकल्प दिलाया। 

पिता का नाम करेंगे रोशन, मॉ को अपनी कमाई से देंगे घर 
जब यह रस्म चल रही थी बेटी वैष्णवी की आंखे भर आईं। पिता के जाने का दुख और फिर समाज में ये रीति रिवाज जिसका कभी पता न हो, पिता के जाने के दुख के बीच बेटी ने पुत्र धर्म का फर्ज निभाया। बाद में नम आंखों से कहा कि पिता ने जो समाज सेवी के रुप में काम करने की बात कही उसे वह आगे बढाएंगे और अपनी मेहनत की कमाई से अपनी मां को घर देंगे। 

मुंबई में कार्य करती है दोनों बहने
मां रजनी पांडे ने बताया कि उनकी छोटी बेटी वैष्णवी मुंबई में आईसीआईसीआई बैंक में अधिकारी है, जबकि बड़ी बहन शुचि भी मुंबई में सिघानियां ग्रुप में अधिकारी के रूप में कार्यरत है। दोनों बहनों का मानना है कि समाज बेटियों की कद्र करे तो बेटियां भी समाज का संबल बन सकती हैं। दोनों ने पिता की स्मृतियों को जीवंत रखने के लिए अखिलेश सेवा ट्रस्ट शुरू करने की बात भी कही। 

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