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जीडीपी की तरह जीईपी का मूल्यांकन जरूरी 

Mon, 12 Dec 2016 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Mon, 12 Dec 2016 01:53 AM IST
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evaluation is must for GEP
कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि। - फोटो : अमर उजाला
शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में रविवार को दो दिवसीय सेमिनार शुरू हुआ। विषय ‘उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वित्त पोषित इमरजिंग एनवायरमेंटल कं सर्न एंड पब्लिक हेल्थ’ रहा। उप्र राजकीय महाविद्यालय एकेडमिक सोसायटी का वार्षिक अधिवेशन भी हुआ। मुख्यातिथि डॉ. आरपी सिंह निदेशक उच्च शिक्षा विभाग उप्र, पद्मश्री पर्यावरणविद डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा रहे।
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डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने बताया कि जिस प्रकार देश की आर्थिक प्रगति जीडीपी सकल घरेलू उत्पाद द्वारा दर्शायी जाती है, उसी तरह देश की पारिस्थितिक स्थिति भी पेश होनी चाहिए। जीडीपी की तरह देश में जीईपी यानि सकल पारिस्थितिक उत्पाद का मूल्यांकन होना अहम हो चुका है। सीसीएसयू से आए प्रो. एपी गर्ग ने कहा कि पिछले 40 सालों में दिल्ली का तापमान तीव्रता से बढ़ा है। केएमसी अस्पताल के निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा कि पॉलिथीन का प्रयोग प्रतिबंधित होना चाहिए। कानपुर से आए एससी अग्रवाल ने कहा कि गैजेट्स की बढ़ती जरूरतों के कारण हर महीने टनों ई-कचरा हम एकत्र कर रहे हैं। सेमिनार के संयोजक कॉलेज के प्राचार्य प्रो अश्वनी कुमार गोयल रहे। आयोजन सचिव डॉ. आशीष पाठक, डॉ. आरसी सिंह रहे। इस अवसर पर खरखौदा राजकीय डिग्री कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रेखा तिवारी, डॉ. राजीव पांडे शिक्षा अधिकारी गोरखपुर, डॉ. लता कुमार, डॉ. मंजू शुक्ला, डॉ. गीता चौधरी मौजूद रहीं।
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नोटबंदी से सुधरेगा पर्यावरण
सीसीएसयू कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने नोटबंदी को पर्यावरण के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा निर्माता व उपभोक्ता दोनों अधिक की ओर भाग रहे हैं। इससे पर्यावरण को क्षति हो रही है। नोटबंदी के कारण लोग कम खर्च कर रहे हैं। कम जरूरतों में कम उत्पादन होगा और पर्यावरण बचेगा। 
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प्रदेश में बनेंगे नए मॉडल कॉलेज
सेमिनार में आए  उच्च शिक्षा विभाग उप्र के निदेशक डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि प्रदेश में 26 मॉडल कॉलेज बनने हैं। 15 शुरू हो चुके  हैं। 11 मॉडल कॉलेज अगले वर्ष जुलाई में प्रारंभ हो जाएंगे। आवासीय मॉडल कॉलेज होंगे। इसमें छात्र-छात्राएं एक साथ शिक्षा लेंगे। साथ ही सिंगल फैकल्टी की बजाय तीन फैकल्टी की दिशा में काम हो रहा है। विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों शामिल होंगे। सरकार जल्द ही शिक्षक भर्ती करेगी, इसके लिए आयोग से बात हो चुकी है। राजकीय कॉलेज भी निजी कॉलेजों से बेहतर हैं।
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