रोडवेज के राजस्व पर डाका डाल रहे कर्मचारी, यात्रियों से पैसा लेकर नहीं दे रहे टिकट, मिलीभगत से भर रहे अपनी जेब
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कोरोना काल में यात्रियों की कमी से जूझ रहे रोडवेज को उसके परिचालक और चेकिंग स्टाफ भी लूटने में लगे हैं। चेकिंग स्टाफ की मिलीभगत से परिचालक डब्ल्यूटी (यात्री से पैसा लेकर टिकट नहीं देना) करके अपनी जेब भर रहे हैं। हाल ही में बागपत रूट पर पकड़ी गई एक बस में 37 यात्री डब्ल्यूूटी मिले थे।
लॉकडाउन में 68 दिन बंद रहने के बाद एक जून से रोडवेज बसों का संचालन शुरू हुुुआ था। कोरोना के चलते बसों को अपेक्षित यात्री नहीं मिल रहे हैं। सभी रूटों पर 50 फीसदी से कम लोड फैक्टर आने से विभाग को घाटा हो रहा है। इसके बावजूद बसों में जो सवारी बैठ रही है, उसमें से काफी सवारियों को टिकट नहीं देकर रोडवेज परिचालक अपनी जेब भरने में लगे हैं।
53 में से 37 सवारी को नहीं दिया था टिकट
पिछले दिनों बागपत रूट पर चलने वाली भैसाली डिपो की अनुबंधित बस संख्या यूपी 78 टी-1871 मेरठ आ रही थी। रोडवेज एमडी स्क्वाड ने इस बस को मीतली में रुकवाकर चेक किया।
पता चला कि संविदा परिचालक महेश ने 53 में से 37 यात्रियों को पैसे लेने के बाद भी टिकट नहीं दिए थे। एमडी स्क्वाड की रिपोर्ट पर आरएम ने परिचालक की संविदा समाप्त कर दी थी। साथ ही आरएम स्क्वाड पर तैनात टीआई मुन्ना और अशोक को निलंबित कर दिया था।
एमडी स्क्वाड चौकन्ना, आरएम स्क्वाड सुस्त
बसों को चेकिंग के लिए सभी क्षेत्र में आरएम स्क्वाड बना रखे हैं। इसके अलावा विभाग ने एमडी स्क्वाड भी बनाया हुआ है, जो प्रदेश में कहीं पर भी बसें चेक कर सकता है। बागपत रूट पर भ्रष्टाचार का मामला एमडी स्कवाड ने ही पकड़ा था।
व्हाट्सएप ग्रुप से हो रहा भ्रष्टाचार
रोडवेज चालकों और परिचालकों ने व्हाट्सअप ग्रुप बना रखे हैं। जब भी कोई स्क्वाड किसी बस की जांच करता है तो तुरंत उसकी जानकारी ग्रुप में दे दी जाती है। इससे ग्रुप के सदस्य सचेत हो जाते हैं।
चेकिंग स्टाफ को अलर्ट किया गया है। भविष्य में इस तरह के केस मिलने पर टीआई जिम्मेदार होंगे। - केके शर्मा, आरएम रोडवेज मेरठ रीजन