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विद्युत व्यथा निवारण फोरम लाचार, आदेशों पर अमल का इंतजार

Fri, 30 Nov 2018 03:53 PM IST
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 30 Nov 2018 03:53 PM IST
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Electricity Disaster Management Forum waiting for Execution of Orders
बिजली - फोटो : amar ujala
बिजली विभाग की कारगुजारियों से त्रस्त उपभोक्ताओं की पीड़ा का निवारण करने वाली विद्युत व्यथा निवारण फोरम लाचार हो चुकी है। बिजली अधिकारी न तो फोरम के आदेशों का अनुपालन कर रहे हैं और न ही फोरम का प्रचार-प्रसार ही किया जा रहा हैं। पिछले आठ महीनों के अंदर फोरम द्वारा किए गए 45 निर्णयों में से केवल दो आदेशों का ही अनुपालन किया गया है। 
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बिजली बिल ज्यादा आने, कनेक्शन नहीं मिलने, लोड़ बढ़वाने या घटवाने में अड़चन, मीटर नहीं बदले जाने समेत अन्य कई समस्याओं का निवारण नहीं होने पर उपभोक्ताओं के लिए सरकार ने विद्युत व्यथा निवारण फोरम का गठन किया है। 50 रुपये के पोस्टल आर्डर पर उपभोक्ता अपना केस फोरम में दायर कर सकता है।
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फोरम तीन महीने के अंदर केस का निस्तारण करती है और  हर 15वें दिन वादों के निर्णयों की प्रति एमडी पीवीवीएनएल के पास अनुपालन कराने के लिए भेजी जाती है। लेकिन पीवीवीएनएल अधिकारी आदेशों का अनुपालन नहीं कर पा रहे हैं। फोरम से मिले आंकड़ों पर नजर डाले तो अप्रैल 2018 से नवंबर तक फोरम ने 45 केस अनुपालन के लिए अधिकारियों के पास भेजे थे। लेकिन इनमें से केवल दो का अनुपालन किया गया।
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उपभोक्ताओं के पक्ष में आ रहे फैसले
उपभोक्ताओं को बढ़े बिल, कनेक्शन नहीं देने और मीटर नहीं बदलने जैसे केस फोरम में आ रहे हैं। इनमें अधिकतर केसों में विभागीय कमी पकड़ी जा रही है। फोरम अध्यक्ष एनके संगल ने बताया कि एक अप्रैल से लेकर नवंबर तक फोरम में 99 वाद आए थे। अभी तक 80 केस तय हुए हैं। इसमें उपभोक्ताओं के पक्ष में 64 और विभाग के पक्ष में केवल 16 फैसले आए हैं।

उपभोक्ताओं को भेज दिए लाखों रुपये के बिल
फोरम में ऐसे भी केस आ रहे हैं जिन किसानों पर बिल नहीं होने के बाद भी लाखों रुपये के बिल भेज दिए गए। फोरम ने ऐसे ही तीन केसों की सुनवाई करते हुए तीन नलकूप किसानों के बिल शून्य किए हैं। इसमें उपभोक्ता अरविंद कुमार को एक लाख तीन हजार रुपये, फकीरा को दो लाख 73 हजार रुपये और जगत सिंह को दो लाख 12 हजार रुपये का बिल भेजा गया था।

काट रहे चक्कर
फोरम से आदेश होने के बाद भी उपभोक्ता अनुपालन के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इनमें मेरठ के अतराड़ा गांव निवासी किसान ओम कुमार, गाजियाबाद निवासी मुकेश जैन, हापुड़ स्थित मैरीनो इंडस्ट्रीज, चेतन फ्लोर मिल्स, गोयल फूड इंडस्ट्रीज और कमलेश रानी समेत दर्जनों उपभोक्ता शामिल है।

नहीं हो रहा प्रचार-प्रसार
फोरम के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी पीवीवीएनएल की है जिससे उपभोक्ताओं को पता लग सके। लेकिन विभाग इसके लिए गंभीर नहीं है। - एनके संगल, फोरम अध्यक्ष 

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