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चुनाव परिणाम 2019: पश्चिमी यूपी की दो सीटों पर टिकीं देशभर की निगाहें, भाजपा-गठबंधन में है टक्कर
Wed, 22 May 2019 04:23 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 22 May 2019 04:23 PM IST
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चुनाव
- फोटो : self
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चुनाव परिणाम आने में अब केवल चंद घंटों का इंतजार है। राजनीति के हिसाब से पश्चिमी यूपी हमेशा ही महत्वपूर्ण रहा है। एक्जिट पोल जहां ज्यादातर सीटों पर भाजपा की बढ़त दिखा रहे हैं। वहीं विपक्ष को अभी मतगणना के बाद असली परिणाम आने का इंतजार है।
इस बार पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान जहां यूपी की आठ सीटें बेहद चर्चित रही हैं, वहीं दो खास सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा है। अब इन दो सीटों पर हर किसी की निगाहें टिकी हैं। हर कोई यह जानने को बेताब है कि आखिर इस सीट पर किसके सिर सजेगा जीत का ताज: -
पश्चिमी यूपी की आठ सीटों पर सबसे बड़ी चुनावी लड़ाई मुजफ्फरनगर और बागपत सीट पर है। इन पर देशभर की निगाहें लगी हैं। रालोद अध्यक्ष चौ. अजित सिंह ने मुजफ्फरनगर से पहली बार चुनाव लड़ा है। यहां उनका मुकाबला पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से हुआ। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण सीट है बागपत लोकसभा सीट जहां से जयंत चौधरी मैदान में उतरे। यहां इनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह है।
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इस बार पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान जहां यूपी की आठ सीटें बेहद चर्चित रही हैं, वहीं दो खास सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा है। अब इन दो सीटों पर हर किसी की निगाहें टिकी हैं। हर कोई यह जानने को बेताब है कि आखिर इस सीट पर किसके सिर सजेगा जीत का ताज: -
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पश्चिमी यूपी की आठ सीटों पर सबसे बड़ी चुनावी लड़ाई मुजफ्फरनगर और बागपत सीट पर है। इन पर देशभर की निगाहें लगी हैं। रालोद अध्यक्ष चौ. अजित सिंह ने मुजफ्फरनगर से पहली बार चुनाव लड़ा है। यहां उनका मुकाबला पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से हुआ। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण सीट है बागपत लोकसभा सीट जहां से जयंत चौधरी मैदान में उतरे। यहां इनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी केंद्रीय मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह है।
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अजित सिंह, संजीव बालियान
- फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट-अजित और बालियान में कांटे का मुकाबला
इस सीट पर देश की सियासी निगाहें लगी हैं। गठबंधन प्रत्याशी रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और मौजूदा सांसद डॉ. संजीव बालियान के बीच सीधी टक्कर है। यहां दोनों ही प्रत्याशी जाट हैं और कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। चुनाव में मिली हार-जीत से ही जाट राजनीति की दिशा भी तय होगी। मतदाताओं ने मतदान के बाद भी यहां खामोशी अख्तियार कर रखी है। जातीय समीकरणों पर जीत का दांव लगा है।
एससी-मुस्लिम-जाट गणित का सहारा
सपा-बसपा गठबंधन व एससी, मुस्लिम और जाट वोटरों का गणित, इसके भरोसे रालोद के अजित सिंह पहली बार मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण चौधरी अजित सिंह की दिखाई दे रहा है। बिखरे जाट वोटरों को रोकना यहां अजित सिंह के लिए बड़ी चुनौती रही है।
बीते लोकसभा चुनाव में दंगे के बाद बदले माहौल में जाटों ने भाजपा के हक में वोट किया था। चौधरी अजित सिंह ने रैलियों के दौरान कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी के झूठ और जुमलों से त्रस्त जनता गठबंधन के पक्ष में वोट करेगी। उन्हें सर्वसमाज का वोट मिलेगा। लेकिन हकीकत क्या कहती है इसका फैसला भी जल्दी ही हो जाएगा।
इस सीट पर देश की सियासी निगाहें लगी हैं। गठबंधन प्रत्याशी रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और मौजूदा सांसद डॉ. संजीव बालियान के बीच सीधी टक्कर है। यहां दोनों ही प्रत्याशी जाट हैं और कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। चुनाव में मिली हार-जीत से ही जाट राजनीति की दिशा भी तय होगी। मतदाताओं ने मतदान के बाद भी यहां खामोशी अख्तियार कर रखी है। जातीय समीकरणों पर जीत का दांव लगा है।
एससी-मुस्लिम-जाट गणित का सहारा
सपा-बसपा गठबंधन व एससी, मुस्लिम और जाट वोटरों का गणित, इसके भरोसे रालोद के अजित सिंह पहली बार मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण चौधरी अजित सिंह की दिखाई दे रहा है। बिखरे जाट वोटरों को रोकना यहां अजित सिंह के लिए बड़ी चुनौती रही है।
बीते लोकसभा चुनाव में दंगे के बाद बदले माहौल में जाटों ने भाजपा के हक में वोट किया था। चौधरी अजित सिंह ने रैलियों के दौरान कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी के झूठ और जुमलों से त्रस्त जनता गठबंधन के पक्ष में वोट करेगी। उन्हें सर्वसमाज का वोट मिलेगा। लेकिन हकीकत क्या कहती है इसका फैसला भी जल्दी ही हो जाएगा।
मोदी के काम, योगी के सुशासन का आसरा
2014 के चुनाव में भाजपा के डॉक्टर संजीव बालियान रिकार्ड चार लाख मतों के अंतर से जीते थे। दंगे का असर और मोदी लहर जीत की बड़ी वजह बनी थी। इस बार संजीव पांच साल के विकास कार्यों और जनता से सीधे संपर्कों का हवाला देकर मैदान में आए। आरएसएस और पार्टी संगठन का बेड़ा वोटरों के बीच सक्रिय है। सवर्ण और अति पिछड़ी जातियों को भाजपा अपनी ताकत मान रही है। एससी में वाल्मीकि, खटीक, कोरी, हिंदू धोबी आदि से भी उम्मीद है।
पीएम और सीएम अपनी चुनावी सभाओं में दंगे का जिक्र कर ध्रुवीकरण को हवा देने की कवायद कर चुके हैं। बालियान ने भी रैलियों के दौरान कहा था कि पांच साल जनता की सेवा में लगाए हैं। पीएम मोदी के काम और सीएम योगी के सुशासन के लिए जनता भाजपा को ही चुनेगी।
मुजफ्फरनगर में जीत के समीकरण
जाट 1,60,000
गुर्जर 57,000
मुस्लिम 5,25,000
एससी 2,10,000
सवर्ण 3,90,000
अन्य 4,50,000
2014 लोकसभा चुनाव का हाल
इस सीट की विधानसभाएं
मुजफ्फरनगर शहर, बुढ़ाना, जानसठ, चरथावल, सरधना
2014 के चुनाव में भाजपा के डॉक्टर संजीव बालियान रिकार्ड चार लाख मतों के अंतर से जीते थे। दंगे का असर और मोदी लहर जीत की बड़ी वजह बनी थी। इस बार संजीव पांच साल के विकास कार्यों और जनता से सीधे संपर्कों का हवाला देकर मैदान में आए। आरएसएस और पार्टी संगठन का बेड़ा वोटरों के बीच सक्रिय है। सवर्ण और अति पिछड़ी जातियों को भाजपा अपनी ताकत मान रही है। एससी में वाल्मीकि, खटीक, कोरी, हिंदू धोबी आदि से भी उम्मीद है।
पीएम और सीएम अपनी चुनावी सभाओं में दंगे का जिक्र कर ध्रुवीकरण को हवा देने की कवायद कर चुके हैं। बालियान ने भी रैलियों के दौरान कहा था कि पांच साल जनता की सेवा में लगाए हैं। पीएम मोदी के काम और सीएम योगी के सुशासन के लिए जनता भाजपा को ही चुनेगी।
मुजफ्फरनगर में जीत के समीकरण
जाट 1,60,000
गुर्जर 57,000
मुस्लिम 5,25,000
एससी 2,10,000
सवर्ण 3,90,000
अन्य 4,50,000
2014 लोकसभा चुनाव का हाल
| प्रत्याशी | पार्टी | मिले वोट |
| संजीव बालियान | भाजपा | 6,53,391 |
| कादिर राना | बसपा | 2,52,241 |
| वीरेंद्र सिंह | सपा | 1,60,810 |
| पंकज अग्रवाल | कांग्रेस | 12,937 |
इस सीट की विधानसभाएं
मुजफ्फरनगर शहर, बुढ़ाना, जानसठ, चरथावल, सरधना
सत्यपाल सिंह, जयंत चौधरी
- फोटो : फाइल
बागपत लोकसभा सीट -जयंत और डॉ. सत्यपाल सिंह में कड़ा संघर्ष
इस सीट पर केंद्रीय मंत्री डाक्टर सत्यपाल सिंह और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच सीधा मुकाबला है। सियासी संग्राम के आखिरी पड़ाव तक आते-आते दोनों दलों के बीच हार-जीत का गणित उलझता नजर आ रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर भाजपा और रालोद ने मतदाताओं को लुभाने की पुरजोर कोशिश की है। देखने वाली बात यह होगी कि 23 मई को जनता किसके मन की बात करती है।
मोदी मैजिक, राष्ट्रवाद, विकास के सहारे सत्यपाल
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री एवं भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह बागपत सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने पिछले पांच साल में कराए गए विकास कार्यों को मुद्दा बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से वह उम्मीद लगा रहे हैं। पुलवामा अटैक के बाद एयर स्ट्राइक से आतंकियों को दिए गए जवाब के बाद जागी राष्ट्रवाद की भावना से भी उन्हें आशा है।
पिछले लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनाव में जाट वोट बैंक का बड़ा हिस्सा भाजपा के पाले में खड़ा होकर चुनाव का रुख पलटता रहा है। देखने वाली बात यह होगी कि इस बार जाट और अनुसूचित जाति के वोट भाजपा को कितने मिल पाते हैं। भाजपा का सारा गणित इन्हीं वोटों में बंटवारे पर टिका है।
इस सीट पर केंद्रीय मंत्री डाक्टर सत्यपाल सिंह और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच सीधा मुकाबला है। सियासी संग्राम के आखिरी पड़ाव तक आते-आते दोनों दलों के बीच हार-जीत का गणित उलझता नजर आ रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का नाम लेकर भाजपा और रालोद ने मतदाताओं को लुभाने की पुरजोर कोशिश की है। देखने वाली बात यह होगी कि 23 मई को जनता किसके मन की बात करती है।
मोदी मैजिक, राष्ट्रवाद, विकास के सहारे सत्यपाल
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री एवं भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह बागपत सीट से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने पिछले पांच साल में कराए गए विकास कार्यों को मुद्दा बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि से वह उम्मीद लगा रहे हैं। पुलवामा अटैक के बाद एयर स्ट्राइक से आतंकियों को दिए गए जवाब के बाद जागी राष्ट्रवाद की भावना से भी उन्हें आशा है।
पिछले लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनाव में जाट वोट बैंक का बड़ा हिस्सा भाजपा के पाले में खड़ा होकर चुनाव का रुख पलटता रहा है। देखने वाली बात यह होगी कि इस बार जाट और अनुसूचित जाति के वोट भाजपा को कितने मिल पाते हैं। भाजपा का सारा गणित इन्हीं वोटों में बंटवारे पर टिका है।
गठबंधन के समीकरण पर सवार जयंत चौधरी
रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पहली बार बागपत संसदीय क्षेत्र से मैदान में हैं। इससे पहले उनके पिता चौधरी अजित सिंह छह बार बागपत से सांसद रह चुके हैं। चुनाव प्रचार में जयंत गठबंधन के समीकरण के साथ जनता के बीच गए। उन्हें मुस्लिम, जाट और एससी के भरपूर संख्या में वोट मिलने की उम्मीद है।
भाजपा ने भी इस सीट पर जाट और एससी वोटों में सेंधमारी की पुरजोर कोशिश की है। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पौत्र जयंत चौधरी के पास भावनात्मक लगाव को लेकर माना जा रहा है कि इस सीट पर चौंकाने वाले परिणाम आ सकते हैं।
बागपत में जीत के समीकरण
जाट 4,35,000
गुर्जर 73,000
मुस्लिम 3,00,000
एससी 2,15,000
सवर्ण 3,00,000
अन्य 3,15,000
2014 लोकसभा चुनाव का हाल
इस सीट की विधानसभाएं
बागपत, बड़ौत, सिवालखास, छपरौली, मोदीनगर
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रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पहली बार बागपत संसदीय क्षेत्र से मैदान में हैं। इससे पहले उनके पिता चौधरी अजित सिंह छह बार बागपत से सांसद रह चुके हैं। चुनाव प्रचार में जयंत गठबंधन के समीकरण के साथ जनता के बीच गए। उन्हें मुस्लिम, जाट और एससी के भरपूर संख्या में वोट मिलने की उम्मीद है।
भाजपा ने भी इस सीट पर जाट और एससी वोटों में सेंधमारी की पुरजोर कोशिश की है। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पौत्र जयंत चौधरी के पास भावनात्मक लगाव को लेकर माना जा रहा है कि इस सीट पर चौंकाने वाले परिणाम आ सकते हैं।
बागपत में जीत के समीकरण
जाट 4,35,000
गुर्जर 73,000
मुस्लिम 3,00,000
एससी 2,15,000
सवर्ण 3,00,000
अन्य 3,15,000
2014 लोकसभा चुनाव का हाल
| प्रत्याशी | पार्टी | मिले वोट |
| सत्यपाल सिंह | भाजपा | 4,23475 |
| गुलाम मोहम्मद | सपा | 213609 |
| अजित सिंह | रालोद | 199516 |
| प्रशांत चौधरी | बसपा | 141743 |
इस सीट की विधानसभाएं
बागपत, बड़ौत, सिवालखास, छपरौली, मोदीनगर
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