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गंभीर बीमारी या खुद की शादी है तभी कटवाए ड्यूटी नहीं तो जाना होगा गाजियाबाद
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गंभीर बीमारी या खुद की शादी है, तभी कटवाएं ड्यूटी, नहीं तो जाएंगे गाजियाबाद
मेरठ। अगर बिना किसी कारण के आप बेवजह चुनाव ड्यूटी से मुक्त होना चाह रहे हैं तो आपको गाजियाबाद भी चुनाव ड्यूटी करने के लिए भेजा जा सकता है। गाजियाबाद जिले में पहले चरण में ही दस फरवरी को मतदान होना है। वहां पर कर्मचारियों की कमी के चलते मेरठ से कर्मचारियों की मांग की गई है। जिसके चलते 500 से अधिक पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारी गाजियाबाद भेजे जाएंगे। इसलिए सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को ड्यूटी से मुक्त रखा जाएगा जो गंभीर बीमारी या खुद की शादी के लिए प्रार्थना पत्र दे रहे हैं।
मुख्य विकास अधिकारी और प्रभारी कार्मिक शशांक चौधरी ने कहा कि कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से बचना नहीं है। उन्हें लोकतंत्र के महापर्व में आगे आकर मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि पहले प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहे मतदान अधिकारियों को एक मौका सोमवार को ओर दिया जाएगा। इसके बाद एफआईआर की जाएगी।
पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारियों की कमी
जिले की सात विधानसभा सीटों पर चुनाव कराने के लिए कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही हैं। अभी तक शादी, बीमारी को लेकर प्रार्थना-पत्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। 500 से अधिक प्रार्थना-पत्र जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में आ गए हैं। ऐसे में पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारी काफी संख्या में कम हो रहे हैं।
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जरूर नहीं है कि पति-पत्नी में एक की कटे ड्यूटी
हाल ही में चुनाव आयोग के एक आदेश को लेकर कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि चुनाव आयोग का कहना है कि पति-पत्नी में से किसी एक की ड्यूटी लगेगी। लेकिन मुख्य विकास अधिकारी का कहना है कि ये जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि आदेश में लिखा गया कि प्रार्थना-पत्र में लिखी गई समस्या को मानते हुए ही निर्णय लिया जाए। ऐसे आवदेन भी 200 के पार पहुंच गए हैं।
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मेरठ। अगर बिना किसी कारण के आप बेवजह चुनाव ड्यूटी से मुक्त होना चाह रहे हैं तो आपको गाजियाबाद भी चुनाव ड्यूटी करने के लिए भेजा जा सकता है। गाजियाबाद जिले में पहले चरण में ही दस फरवरी को मतदान होना है। वहां पर कर्मचारियों की कमी के चलते मेरठ से कर्मचारियों की मांग की गई है। जिसके चलते 500 से अधिक पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारी गाजियाबाद भेजे जाएंगे। इसलिए सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को ड्यूटी से मुक्त रखा जाएगा जो गंभीर बीमारी या खुद की शादी के लिए प्रार्थना पत्र दे रहे हैं।
मुख्य विकास अधिकारी और प्रभारी कार्मिक शशांक चौधरी ने कहा कि कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से बचना नहीं है। उन्हें लोकतंत्र के महापर्व में आगे आकर मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि पहले प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहे मतदान अधिकारियों को एक मौका सोमवार को ओर दिया जाएगा। इसके बाद एफआईआर की जाएगी।
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पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारियों की कमी
जिले की सात विधानसभा सीटों पर चुनाव कराने के लिए कर्मचारियों की कमी आड़े आ रही हैं। अभी तक शादी, बीमारी को लेकर प्रार्थना-पत्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। 500 से अधिक प्रार्थना-पत्र जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में आ गए हैं। ऐसे में पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारी काफी संख्या में कम हो रहे हैं।
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जरूर नहीं है कि पति-पत्नी में एक की कटे ड्यूटी
हाल ही में चुनाव आयोग के एक आदेश को लेकर कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि चुनाव आयोग का कहना है कि पति-पत्नी में से किसी एक की ड्यूटी लगेगी। लेकिन मुख्य विकास अधिकारी का कहना है कि ये जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि आदेश में लिखा गया कि प्रार्थना-पत्र में लिखी गई समस्या को मानते हुए ही निर्णय लिया जाए। ऐसे आवदेन भी 200 के पार पहुंच गए हैं।