Eid Ul Fitar: इंसानियत का पैगाम देता है ईद-उल-फितर का पर्व, जरूरतमंदों को दें जकात और सदका
शुक्रवार को अलविदा जुमे के साथ रमजान को अलविदा कह दिया है। शनिवार को देश भर में ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। सुबह ईद की नमाज अदा कर अकीदतमंदों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी।
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ईद-उल-फितर का त्योहार पाक रमजान माह के बाद अमन और भाईचारे का पैगाम लेकर आता है। रमजान के पाक महीने में रोजे रखने के बाद अल्लाह एक दिन अपने बंदों को इनाम देता है। किसी भी त्योहार का असल मकसद इंसानियत और आपसी सौहार्द को कायम करना है। हदीस में भी साफ तौर पर यही कहा गया है कि केवल अल्लाह की इबादत काफी नहीं है, बल्कि उसके बंदों की मदद करना और सभी के साथ मिलजुल कर रहना सबसे बड़ा मजहब है। यही सच्ची इबादत भी है।
शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने बताया कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने सन 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद पहली ईद मनाई थी। यह त्योहार इस्लामी कैलेंडर के दसवें महीने के पहले मनाया जाता है।
ईद के दिन मुस्लिमों का फर्ज है कि सुबह की नमाज के बाद गरीबों को अपनी हैसियत के अनुसार फितरा व जकात (दान) दें। इस दिन पुराने गिले शिकवे भुलाकर लोग गले मिलते हैं। कई मुस्लिम बहुल इलाकों में तो इस दिन सामूहिक रूप से ईद मिलन समारोह का आयोजन किया जाता है।
जामिया दारूस सलाम के मोहतमिम मौलाना यूसुफ कासमी ने बताया कि ईद की नमाज के लिए लोगों को खास एहतियात बरतनी चाहिए। कुरान शरीफ की आयतों और हिदायतों पर अमल करके ही घर से निकले। ईदगाह की तरफ आते-जाते वक्त तकबीर पढ़ते हुए चले।
अल्लाह ताआला ऐसे बंदों के सारे गुनाह माफ कर देता है और उन पर अपनी अहम रहमत नाजिल करता है। ईद की नमाज अदा करने से पहले अल्लाह के रसूल हुजूर-ए-पाक मोहम्मद ने जो नसीहतें दी हैं, उन पर अमल करें।
उन्होंने बताया कि ईद समाज के तालमेल और मोहब्बत का मजबूत धागा है। यह त्योहार इस्लाम धर्म की परंपराओं का आइना है। एक रोजेदार के लिए इसकी अहमियत का अंदाजा अल्लाह के लिए भूखे रहकर इबादत करने से लगाया जा सकता है।
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जकात और सदकातुल फितर अदा कर जरूरतमंदों को बनाएं मजबूत
शुक्रवार को अलविदा जुमे के साथ रमजान को अलविदा कह दिया है। पाक महीने में सभी लोग जकात और सदकातुल फितर अदा करें और जरूरतमंद लोगों को भी खुशी में शरीक करें। फलावदा कस्बे के शहरकाजी मौलाना सलमान कासमी ने कहा कि अल्लाह ने रमजान का महीना इसलिए दिया है ताकि हम नेक बनें।
अल्लाह ने जहां इस महीने के रोजे को फर्ज किया और जकात का हुक्म दिया है, वहीं अल्लाह ने हम को ईद-उल-फितर जैसा त्योहार दिया है। इस दिन सदक़ा उल-फितर अदा करने का हुकुम दिया है, ताकि गरीबों के बच्चे भी खुशी के साथ हमारे बच्चों की तरह ईद मना सकें। हमें ईद की रात, जो बदले की रात है।
नमाज में अकीदतमंदों ने की गुनाह से तौबा
रमजान माह के अलविदा जुमे की नमाज में अकीदतमंदों ने अल्लाह ताआला से अपने गुनाहों की तौबा करते हुए दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी। आखिरी जुमे की नमाज के लिए क्षेत्र की मस्जिदों में लोग भारी तादाद में पहुंचे। शुक्रवार को नमाज से पहले बयान फरमाते हुए आलिमों ने बताया कि रमजान का महीने के आखिरी अशरे में शब-ए-कद्र की रात की खास अहमियत है। जिसे लेकर हम सब को बाद की दस रातों में इबादत करके हासिल की जा सकती है। रमजान माह बरकत का महीना है।
पुलिस ने क्षेत्र की ईदगाहों का निरीक्षण किया
मुंडाली थाना पुलिस ने क्षेत्र की ईदगाहों का निरीक्षण किया, जिनमें ईद की नमाज अदा की जाएगी। मुंडाली थाना पुलिस ने क्षेत्र के रछौती, आड, मुंडाली, अजराडा, जिसोरा, नंगलामल, लोटी, जिसोरा, मउखास, आदि गांवों में बनी ईदगाहों का निरीक्षण किया और क्षेत्रवासियों को निर्देश दिए कि अकीदतमंद ईदगाह या मस्जिद में ही ईद की नमाज अदा करेंगे। रास्ते में कोई भी नमाज अदा नहीं करेगा।