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लापरवाही: सरकारी स्कूलों में दफन पांच करोड़ के प्रोजेक्टर, कुछ डिब्बों में बंद, कुछ लटके दीवारों पर 

Tue, 21 Jan 2020 01:08 PM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 21 Jan 2020 01:08 PM IST
सार

  • आधुनिक तरीके से शिक्षा देने के लिए लगवाए गए थे प्रोजेक्टर।
  • अफसरों की लापरवाही से कुछ डिब्बों में बंद तो कुछ दीवारों पर लटके।
  • प्रोजेक्टर लगाने में खर्च हुए थे साढ़े पांच करोड़ रुपये।

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Education truth, Projectors worth five crore got waste in government schools in Meerut
आधुनिक तरीके से शिक्षा देने के लिए लगवाए गए थे प्रोजेक्टर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकार की ओर से किए जा प्रयासों को बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। बच्चों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बीते साल करीब पांच करोड़ रुपये से जिले 221 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रोजेक्टर लगवाए गए थे। लेकिन इनका उपयोग कहीं नहीं किया जा रहा है।

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कहीं पर ये डिब्बों में बंद पड़े हैं तो कहीं दीवारों पर लटके धूल खा रहे हैं। बच्चों को एक भी दिन इन प्रोजेक्टर के माध्यम से अक्षर ज्ञान नहीं कराया गया। वहीं शिक्षकों ने प्रोजेक्टर चलाने की ट्रेनिंग नहीं दिए जाने की बात कही। सोमवार को अमर उजाला टीम ने कई परिषदीय स्कूलों में जाकर प्रोजेक्टर की स्थिति का जायजा लिया। 

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साढ़े पांच करोड़ रुपये हुए थे खर्च 
प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने जिले में नगर व देहात के 221 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रोजेक्टर लगवाए थे। इनको लगाने की जिम्मेदारी आईटीआई और सीसीएल कंपनी को दी गई थी।

प्रोजेक्टर लगाने पर पांच करोड़ 61 लाख 34 हजार रुपये खर्च हुए थे। स्कूलों में तैनात शिक्षकों के अनुसार, मई 2019 से स्कूलों में प्रोजेक्टर लगने शुरू हुए थे। नौ माह बीत चुके हैं। अभी तक बेसिक शिक्षा के अधिकारियों ने शिक्षकों को प्रोजेक्टर चलाने की ट्रेनिंग नहीं दिलाई है।

साकार होने से पहले ही टूटा सपना 
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में एक-एक स्मार्ट क्लास बनाई जानी थी। जिसमें सुंदर फर्नीचर के साथ दीवारों पर पेंटिंग का दावा किया था। उसी में प्रोजेक्टर लगाकर बच्चों को पिक्चर दिखाकर पढ़ाया जाना था।

Education truth, Projectors worth five crore got waste in government schools in Meerut
आधुनिक तरीके से शिक्षा देने के लिए लगवाए गए थे प्रोजेक्टर - फोटो : अमर उजाला

केस-1
राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल के कमरे में प्रोजेक्टर लगा था। उसी कमरे में बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। बच्चों से प्रोजेक्टर पर अक्षर ज्ञान सीखने पर बात की गई तो बच्चों ने गर्दन हिलाकर मना कर दिया। शिक्षिका मुकेश गुप्ता ने कहा कि प्रोजेक्टर काफी समय से लगा है। लेकिन इसे चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है।

केस-2
उच्च प्राथमिक विद्यालय केसरगंज में एक शिक्षिका तीन बच्चों को पढ़ा रही थीं। जब छात्रों से प्रोजेक्टर चलने की बात पूछी तो एक ने बताया कि एक बार प्रोजेक्टर पर पिक्चर देखी थी। हालांकि प्रधानाध्यापक सरफराज अहमद ने कहा कि प्रोजेक्टर चलाने की किसी के पास ट्रेनिंग नहीं है। जर्जर बिल्डिंग की जगह शिक्षक संघ के हॉल में प्रोजेक्टर लगाया गया है। 

केस-3
प्राइमरी पाठशाला पूर्वा महावीर में प्रोजेक्टर लगाया गया है। यहां तीन शिक्षिकाएं कमरे के बाहर धूप में बच्चों को बैठाकर पढ़ा रही थीं। जब अमर उजाला टीम ने बच्चों से प्रोजेक्टर पर पढ़ाई करने पर बात की तो सभी एक दूसरे का चेहरा देखने लगीं। उन्होंने बताया कि दीवार पर लगी मशीन कभी नहीं चली।

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आधुनिक तरीके से शिक्षा देने के लिए लगवाए गए थे प्रोजेक्टर - फोटो : अमर उजाला

समय से लगवाए प्रोजेक्टर
सरकार द्वारा चयनित कंपनियों से हमने जिले के 221 स्कूलों में निर्धारित समय के भीतर प्रोजेक्टर लगवा दिए हैं। संचालन की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है। -मो. तारिक, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी। 

लापरवाही पर होगी कार्रवाई
सभी स्कूलों में प्रोजेक्टर चल रहे हैं। सभी शिक्षकों को कंपनी ने ट्रेनिंग भी दी थी। अगर नहीं चल रहे हैं तो जांच कराई जाएगी। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। -सतेंद्र ढाका, बीएसए

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