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दुर्व्यवहार के आरोपी एमडीए कर्मी विभागीय कार्रवाई के साथ बहाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jun 2018 12:34 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पूर्व वीसी योगेन्द्र यादव के साथ उनके कार्यालय में अभद्रता करने के मामले में निलंबित हुए एमडीए कर्मचारियों को बहाल किया गया है। हालांकि उन्हें परिनिंदा प्रविष्टि के साथ इस शर्त पर बहाल किया गया है कि महत्वपूर्ण पटल पर उन्हें नहीं रखा जाएगा।
पिछले साल 17 जून को तत्कालीन वीसी योगेन्द्र यादव के कक्ष में पहुंचे कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अमर्यादित अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। बाद में वीडियो फुटेज के जरिए कर्मचारियों की पहचान के साथ उन पर वीसी ने मुकदमा दर्ज करा दिया। इस प्रकरण में 15 कर्मियों पर मुकदमा हुआ जिनमें से लिपिक सुशील त्यागी, बलराम सिंह मेट आदि को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके अलावा महाराज सिंह, घनश्याम सिंह, कुलदीप, पंकज गुप्ता, आशाराम, ओमवीर सिंह चौहान, कपिल कुमार शर्मा, संजीव कपिल, प्रदीप कुमार राजा, महेश चंद शर्मा, नरेन्द्र पाल सिंह, ताराचंद व ईश्वर सिंह पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था। सभी को निलंबित कर दिया गया था। मामले की विभागीय जांच तहसीलदार करन वीर सिंह को सौंपी गई थी। उन्होंने रिपोर्ट दी कि कर्मचारियों ने जानबूझकर यह कृत्य किया। इस पर इनकी बहाली पर तो मुहर लगा दी गई अन्य कार्रवाई के साथ यह तय किया गया है। वीसी साहब सिंह ने निर्देश दिए हैं कि इन कर्मचारियों को निलंबन अवधि का वेतन या भत्ता देय नहीं होगा। परिनिंदा प्रविष्टि सर्विस बुक में दर्ज की जाएगी और यदि भविष्य में फिर से इसी तरह की पुनरावृत्ति इन कर्मियों ने की तो एक तरफा निर्णय लेकर सेवा समाप्त कर दी जाएगी। साथ ही महत्वपूर्ण पटल से इन्हें वंचित रखा जाएगा।
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पिछले साल 17 जून को तत्कालीन वीसी योगेन्द्र यादव के कक्ष में पहुंचे कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अमर्यादित अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। बाद में वीडियो फुटेज के जरिए कर्मचारियों की पहचान के साथ उन पर वीसी ने मुकदमा दर्ज करा दिया। इस प्रकरण में 15 कर्मियों पर मुकदमा हुआ जिनमें से लिपिक सुशील त्यागी, बलराम सिंह मेट आदि को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके अलावा महाराज सिंह, घनश्याम सिंह, कुलदीप, पंकज गुप्ता, आशाराम, ओमवीर सिंह चौहान, कपिल कुमार शर्मा, संजीव कपिल, प्रदीप कुमार राजा, महेश चंद शर्मा, नरेन्द्र पाल सिंह, ताराचंद व ईश्वर सिंह पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था। सभी को निलंबित कर दिया गया था। मामले की विभागीय जांच तहसीलदार करन वीर सिंह को सौंपी गई थी। उन्होंने रिपोर्ट दी कि कर्मचारियों ने जानबूझकर यह कृत्य किया। इस पर इनकी बहाली पर तो मुहर लगा दी गई अन्य कार्रवाई के साथ यह तय किया गया है। वीसी साहब सिंह ने निर्देश दिए हैं कि इन कर्मचारियों को निलंबन अवधि का वेतन या भत्ता देय नहीं होगा। परिनिंदा प्रविष्टि सर्विस बुक में दर्ज की जाएगी और यदि भविष्य में फिर से इसी तरह की पुनरावृत्ति इन कर्मियों ने की तो एक तरफा निर्णय लेकर सेवा समाप्त कर दी जाएगी। साथ ही महत्वपूर्ण पटल से इन्हें वंचित रखा जाएगा।
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