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नशामुक्त युवा विकसित भारत की ताकत : डॉ. मनिश
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सुभारती विश्वविद्यालय में नशे के खिलाफ स्वास्थ्य रन से जागरूकता का संदेश दिया गया। स्रोत : संस्
सुभारती में स्वास्थ्य वॉक से दिया नशे से दूर रहने का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत के अंतर्गत स्वास्थ्य रन का आयोजन किया गया।
शारीरिक शिक्षा विभाग एवं महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अधिकारियों ने भाग लिया। विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो. डॉ. मुनिश सी. रेड्डी ने कहा कि शारीरिक सक्रियता न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को भी बढ़ाती है। नशा मुक्त युवा ही विकसित भारत की ताकत है। उन्होंने विद्यार्थियों से नशीले एवं व्यसनी पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की।
फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज के डीन प्रो. डॉ. सुधीर त्यागी ने कहा कि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति है। नशे की आदत व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करने के साथ उसके परिवार और सामाजिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। शिक्षा विभागाध्यक्ष प्राे. (डॉ.) अनोज राज ने कहा कि कि नशे की शुरुआत अक्सर छोटी आदत के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति के स्वास्थ्य और सामाजिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। प्रो. लुभान सिंह, डॉ. मंजू ने भी अहम जानकारियां दी।
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मेरठ। युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत के अंतर्गत स्वास्थ्य रन का आयोजन किया गया।
शारीरिक शिक्षा विभाग एवं महिला सशक्तिकरण प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अधिकारियों ने भाग लिया। विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो. डॉ. मुनिश सी. रेड्डी ने कहा कि शारीरिक सक्रियता न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को भी बढ़ाती है। नशा मुक्त युवा ही विकसित भारत की ताकत है। उन्होंने विद्यार्थियों से नशीले एवं व्यसनी पदार्थों से पूरी तरह दूर रहने की अपील की।
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फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज के डीन प्रो. डॉ. सुधीर त्यागी ने कहा कि स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति है। नशे की आदत व्यक्ति की कार्यक्षमता को प्रभावित करने के साथ उसके परिवार और सामाजिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। शिक्षा विभागाध्यक्ष प्राे. (डॉ.) अनोज राज ने कहा कि कि नशे की शुरुआत अक्सर छोटी आदत के रूप में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति के स्वास्थ्य और सामाजिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। प्रो. लुभान सिंह, डॉ. मंजू ने भी अहम जानकारियां दी।
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