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यूपी: किस्त न मिलने से अटका ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का काम, अब ऐसे बनाए जा रहे डीएल

Sat, 01 Jun 2019 12:25 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 01 Jun 2019 12:25 PM IST
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Driving Training Center's work has stop worked due money reason in Meerut
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

मेरठ में साकेत स्थित आईटीआई में बन रहे ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर एंड टेस्टिंग ट्रैक का काम दूसरी किस्त नहीं मिलने पर पिछले चार महीने से अटका पड़ा है। यह ट्रैक दिसंबर 2018 तक बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन 2019 मई खत्म होने को हैं इसके बावजूद यह अधूरा ही है। सेंटर की देरी के चलते आरटीओ में प्रोपर टेस्ट लिए बगैर ही डीएल बनाए जा रहे हैं।

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आरटीओ में हर महीने पांच से छह हजार ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाए जाते हैं। लेकिन ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक नहीं होने के चलते डीएल बनने पर सवाल खड़े होते है। लंबी मांग के बाद शासन ने मेरठ को ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर एंड टेस्टिंग ट्रैक का तोहफा दिया था। उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी निर्माण संघ लिमिटेड (पैकफेड) करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस संस्थान का निर्माण साकेत स्थित आईटीआई में किया जा रहा है। यहां स्थित बड़े मैदान में न केवल संस्थान की बिल्डिंग बननी है बल्कि ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक भी बनाया जाना है। इसके लिए स्वीकृत 4 करोड़ 45 लाख रुपये की धनराशि में से 1.99 करोड़ रुपये की पहली किस्त तो शासन ने पिछले साल ही जारी कर दी थ, लेकिन बाकी धनराशि आज तक जारी नहीं हो सकी है। अभी तक सिर्फ बिल्डिंग का ढांचा ही तैयार हो सका है, टेस्टिंग ट्रैक और बिल्डिंग का बाकी कार्य अटका पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि बाकी रकम के लिए जनवरी में शासन को डिमांड भेज दी थी, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी इस पर अमल नहीं हो सका है।
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बढ़ती जा रही वाहनों की संख्या और डीएल
जिले में वाहनों की संख्या और डीएल लगातार बढ़ते जा रहे हैं। आरटीओ में पंजीकृत छोटे-बड़े वाहनों की संख्या करीब सात लाख पार कर चुकी है और करीब इतने ही डीएल बनाए जा चुके हैं। बिना सेंटर के ही रोजाना करीब 175 से 200 डीएल बन रहे हैं और 60 से 70 वाहनों की फिटनेस की जाती है।

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भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
ऑटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगा। इसमें अभ्यर्थी को मशीनों के जरिये लिए जाने वाले टेस्ट के अलावा तकनीकी तौर पर पूरी तरह समृद्ध ट्रैक पर वाहन को चलाकर दिखाना होगा। इसमें वही अभ्यर्थी पास होगा जिसने लर्निंग लाइसेंस लेकर गाड़ी चलानी सीखी है। वहीं वाहन फिटनेस सेंटर में भी पूरी तरह स्वस्थ वाहन को ही प्रमाणपत्र जारी होगा।

औपचारिकता निभाकर बना रहे डीएल
आरटीओ में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक नहीं होने के चलते लोगों को गाड़ी चलाए जाने की औपचारिकता कराके ही डीएल जारी किए जा रहे हैं। डीएल अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने और इसके लिए एक ही आरआई के होने के चलते डीएल की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग रहे हैं। इस लापरवाही के तहत नौसिखियें लोगों को भी डीएल मिल रहा है। कई बार दलालों की सेटिंग से अभ्यर्थी बिना टेस्ट के ही डीएल हासिल कर लेते हैं।

दूसरी किस्त नहीं मिली
ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की दूसरी किस्त की डिमांड लखनऊ भेजी गई है। पहली किस्त से बिल्डिंग का ढांचा तैयार हो चुका है। दूसरी किस्त मिलते ही तेजी से कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - एसके सिंह, अधिशासी अभियंता पैकफेड

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