डबल मर्डर केस: मां-बेटे की सरेआम हत्या करने वाला कातिल आखिर क्यों नहीं हुआ बेनकाब
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मेरठ में हत्या के मामले में गवाही से एक दिन पहले परतापुर के सोहरका गांव में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड की तफ्तीश में पुलिस भटक गई। भले ही विवेचना में हत्यारोपियों और साजिशकर्ताओं समेत नौ आरोपी जेल भेजे। लेकिन आज भी वो कातिल बेनकाब नहीं हुआ, जो सरेआम गोलियां बरसाते हुए सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में कैद हुआ था। वो कौन है, कहां से आया था, इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं, जबकि इस केस की तफ्तीश में पुलिस के आला अधिकारी जुटे थे।
यह हुई थी वारदात
24 जनवरी 2018, दिन बुधवार था। परतापुर थाना क्षेत्र के सोहरका गांव के बीचोबीच स्विफ्ट कार में सवार बलविंद्र उर्फ भोलू की बदमाशों ने घेरकर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। उसके बाद पैदल ही तीनों बदमाश भोलू के घर पर पहुंच गए और घर के बाहर चारपाई पर बैठी भोलू की मां निछत्तर कौर को गोलियां से भून डाला था। बकौल पुलिस, आरोपियों ने मां-बेटे की हत्या जेल में बंद हत्यारोपी मालू को छुड़ाने के लिए की थी। भोलू के पिता नरेंद्र सांगवान की 19 अक्तूबर 2016 को हत्या हुई थी। जिसमें मालू के खिलाफ चश्मदीद गवाह मां-बेटे को 25 जनवरी को कोर्ट में गवाही देने जाना था।
इनको भेजा गया जेल
पुलिस ने दोहरे हत्याकांड की साजिश रचने में सुशील मूंछ के बेटे मंजीत उर्फ टोनी, हरिओम, धर्मवीर, अमित, तरुण हरीओम, मनजीत और रश्मि को जेल भेजा। मुख्य आरोपी मांगे उर्फ विनय दिल्ली में सरेंडर हो गया था। जिसको बाद में पुलिस ने डबल मर्डर का मुल्जिम बनाया। साजिश का मुल्जिम बने 50 हजार के इनामी सुशील मूंछ को पुलिस नहीं पकड़ सकी।
कौन है वो हत्यारा
चश्मदीद गवाह निछत्तर कौर पर सरेआम गोलियां बरसाते तीन हत्यारोपी सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे। आरोपी मांगे उर्फ विनय और विकास जाट की पहचान हो गई थी, जबकि तीसरा हत्यारा कौन है, उसका 90 दिनों बाद भी पुलिस नाम पता मालूम नहीं कर सकी। जबकि तीसरे हत्यारोपी का चेहरा भी फुटेज में साफ नजर आ रहा है। तीसरे हत्यारोपी को बेनकाब करने में पुलिस का सारा सिस्टम ध्वस्त हो गया। यह आलम तब है जब हत्यारोपी के साथ और साजिश करने वाले आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है।
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कहां तक पहुंची जांच
इस सनसनीखेज डबल मर्डर में परतापुर पुलिस ने आधी अधूरी विवेचना कर जेल भेजे आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट 21 अप्रैल 2018 को सीजेएम कोर्ट में दाखिल की। इस केस के अहम साक्ष्य सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की सीडी भी चार्जशीट के साथ लगाई गई। लेकिन सरेआम गोलियां बरसाने वाले तीसरे हत्यारे का पुलिस ने चार्जशीट में जिक्र तक नहीं किया। इस पर मामला कमजोर हो सकता है।
केस में क्यों पिछड़ रही पुलिस
इस वारदात में मेरठ पुलिस शुरूआत से पिछड़ती रही। पुलिस एक भी हत्यारोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। तीन आरोपियों ने मां-बेटे की सरेआम हत्या की। इसके पुख्ता सुबूत भी पुलिस के पास हैं। हत्यारोपी मांगे उर्फ विनय दिल्ली में जाकर सेटिंग कर आर्म्स एक्ट में बंद हो गया। दूसरे हत्यारोपी विकास जाट को मुजफ्फरनगर पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। तीसरे का अभी पता नहीं। मांगे को रिमांड पर लेकर पुलिस ने मुकदमा चलाने की भरपाई ही की है।
बेटे वीर को कैसे भेजूं स्कूल
इस घर में अब भोलू की पत्नी कंचन पांच साल के बेटे वीर और छह साल की बेटी परी के साथ रहती है। उनका मकान भी गांव के बाहर जंगल से सटा है। सुरक्षा में घर के बाहर पीएसी का कैंप लगा है। लेकिन कंचन बेटे को स्कूल भेजने की हिम्मत नहीं जुटा रही। वह कहती है कि तीसरा हत्यारोपी अभी फरार है। ससुर, सास और पति को खो चुकी हूं। डर लगता है कि कही और अनहोनी न हो जाए। कई बार एसएसपी ऑफिस जा चुकी हूं कि वीर को स्कूल तक भी सुरक्षा मिल जाए। लेकिन वह नहीं मिलती। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। सारा परिवार खत्म हो गया, घर में कोई कमाने वाला भी नहीं बचा।
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