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महानगर में कुत्ते खूंखार, सिस्टम लाचार

Mon, 08 Apr 2019 04:00 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 08 Apr 2019 04:00 AM IST
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Dog dread in the metropolis, system helpless
Dog - फोटो : social media
 जिले में कुत्ते कितने खूंखार हो चुके हैं, इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की सालाना रिपोर्ट में हुआ है। 52 सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार साल में 69061 लोग कुत्तों का निशाना बनने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल और सीएचसी पर पहुंचे। वहीं, जहां नगर निगम कुत्तों को पकड़ने में हाथ खडे़ कर चुका है तो सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए रोजाना मारामारी मचना स्वास्थ्य विभाग और सिस्टम की लाचारी को दर्शा रहा है।
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जिला अस्पताल और सीएचसी पर रोजाना अधिकांश लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए बिना लौटा दिए जाते हैं। देहात से आए मरीजों को तो मना ही कर दिया जाता है। निगम एनिमल केयर सोसायटी के विरोध की बात कहकर अभियान न चलाने की बात कहता है। यह हालात तब हैं, जबकि रेबीज का कोई सटीक इलाज नहीं है और स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं हैं। ऐसे में इंजेक्शन लगवाने आने वाले मरीजों को डॉक्टर काउंसिलिंग के दौरान कुत्तों का पीछा करने की सलाह तक देते हैं। मरीज से कहते हैं कि पता करें कि कुत्ता मरा या नहीं।
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माह                 कुत्तों द्वारा काटे गए लोगों की संख्या
जनवरी                            5141
फरवरी                            7649
मार्च                               8332
अप्रैल                              5935
मई                                 7353
जून                                 4484
जुलाई                               4099
अगस्त                               4347
सितंबर                              4271
अक्तूबर                             3781
नवंबर                               4244
दिसंबर                              4552
जनवरी                              4873
(यह आंकड़े जनवरी 2018 से जनवरी 2019 तक के हैं)

रेबीज: कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रेबीज की बीमारी होने का खतरा रहता है। रेबीज रोग सीधे रोगी के मानसिक संतुुलन को खराब करता है, जिससे रोगी का दिमाग पर कोई संतुलन नहीं रहता है। यह रोग 19 वर्ष तक मरीज को गिरफ्त में ले सकता है।
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लक्षण: रेबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। रोशनी से डर लगता है। यहां तक कि वह भौंकना भी शुरू कर देता है। वह किसी भी बात को लेकर भड़क सकता है।
उपचार: रेबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है।

पिसी मिर्च न लगाएं

कुत्ते के काटने पर खासकर गांवों में मरीज को पिसी मिर्च लगा देते हैं, जो गलत है। इससे घाव में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर 72 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ

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