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डॉक्टर अपने क्लीनिक में, वार्ड ब्वाय के भरोसे चल रहा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Fri, 27 Jan 2017 10:07 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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सरकार से हर माह मोटी पगार पाने वाले चिकित्सक और फार्मेसिस्ट स्वास्थ्य केंद्रों से गायब हैं। डॉक्टर अपने क्लीनिक और निजी अस्पतालों में मरीज देख रहे हैं, तो फार्मेसिस्ट भी निजी अस्पतालों की नौकरी बजा रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य केंद्र चतुर्थ श्रेणी स्टाफ (वार्ड ब्वाय) के हवाले हैं। बुधवार को सीएमओ ने औचक निरीक्षण कराया तो दर्जन भर से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों से चिकित्सक व फार्मेसिस्ट गायब मिले। उनकी जगह वार्ड ब्वॉय मरीजों को देखते मिले।
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यह हुआ निरीक्षण
सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ स्तर के चिकित्सकों ने जिले के स्वास्थ्य केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया। इसका समय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक का शिफ्टों में रखा गया था।
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फिर खुली पोल
इससे पहले भी शासन के निर्देश पर सीएमओ ने जिले की सीएचसी और एडिशनल पीएचसी का औचक निरीक्षण कराया था। जहां चिकित्सा व्यवस्था पटरी से उतरी मिली थी। इस बार भी यही हाल मिला।
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यह मिली व्यवस्था
छुर, करनावल, मवाना ब्लॉक की शहजादपुर पीएचसी पर चिकित्सक और फार्मेसिस्ट गायब मिले। जबकि यहां उनकी जगह वार्ड ब्वॉय मरीजों का चैकअप करते मिले। माछरा, दौराला और सरूरपुर की अन्य एडिशनल पीएचसी पर भी यही हालात मिले।
क्यों दे दी इजाजत
निरीक्षण के दौरान जब चतुर्थ श्रेणी स्टाफ से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कह दिया कि डॉक्टर साहब ने कुछ दवाएं बता रखी हैं। उन्हें ही मरीजों को लिखकर दे देते हैं। बड़ा सवाल यहां यह है कि पीएचसी प्रभारियों ने वार्ड ब्वॉय को मरीजों को देखने की इजाजत कैसे दे दी। जबकि वार्ड ब्वॉय अनक्वालीफाइड हैं और मरीजों का उपचार नहीं कर सकते।
स्टाफ नर्स, एएनएम भी गायब
निरीक्षण में सामने आया कि जिले में संचालित 320 से अधिक स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर कोई भी स्टाफ नर्स या एएनएम नहीं मिली। स्थानीय लोगों ने बताया कि पल्स पोलियो दिवस या किसी टीकाकरण अभियान पर ही स्वास्थ्य केंद्रों का ताला खुलता है।
ऊपर तक बड़ी सेटिंग
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर कहीं ताला लगा मिला तो कहीं वार्ड ब्वॉय डॉक्टरों की भूमिका निभाते मिले। सूत्रों के अनुसार यह सब ऊपर तक सेटिंग और सुविधा शुल्क की देन है। बीते वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में अव्यवस्था का आलम यह है कि चिकित्सकों को सुविधा शुल्क के बदले मनपसंद जगह पर तैनाती दी गई। यही नहीं, सेटिंग यहां तक है कि वे स्वास्थ्य केंद्र पर एक महीने में कितने दिन आएंगे। सारी सेटिंग बैठाने में सीएचसी से लेकर सीएमओ कार्यालय में तैनात कुछ स्टाफ खासा सक्रिय रहा है, जिनकी सरपरस्ती में सारा काम चलता रहा है।
अभी भी सुधरने की नसीहत
सीएमओ डॉ. वीपी सिंह का इस पूरे मामले पर कहना है कि जो चिकित्सक अब तक दिल्ली, गाजियाबाद या अन्य जगहों से बैठकर नौकरी कर रहे हैं, अब उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर रुकना होगा। इसलिए निरीक्षण करा रहा हूं। सभी निरीक्षण टीमों की रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अगर फिर भी नहीं सुधरे तो उनके खिलाफ शासन को डीओ लिखने में भी देरी नहीं होगी।