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वैज्ञानिक विधि से करें उड़द की उन्नत खेती

Mon, 01 Mar 2021 02:22 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 02:22 AM IST
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Do advanced cultivation of Urad with scientific method
वैज्ञानिक विधि से करें उड़द की उन्नत खेती
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मोदीपुरम। मैदानी भागों में उड़द की खेती मुख्य रूप से खरीफ सीजन में होती है। विगत दो दशक से उड़द की खेती ग्रीष्म ऋतु में भी लोकप्रिय हो रही है। सीसीएस विवि कैंपस के पादप रोग विज्ञान विभाग के विशेषज्ञ प्रशांत अहलावत ने बताया कि वैज्ञानिक विधि से इसकी उन्नत खेती की जा सकती है। यह स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ भूमि को पोषक तत्व प्रदान करती है। हरी खाद के रूप में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
जलवायु
उड़द की खेती के लिए नम और गर्म मौसम आवश्यक है। अधिकतर प्रजातियां प्रकाशकाल के लिए संवेदी होती हैं। वृद्धि के समय 25-35 डिग्री सेल्सियस तक तापमान उपयुक्त होता है। हालांकि यह 43 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान आसानी से सहन कर सकती है। 700-900 मिमी वर्षा वाले क्षेत्रों में उड़द आसानी से उगाई जा सकती है। फूल अवस्था में अधिक वर्षा हानिकारक होती है।
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भूमि
हल्की रेतीली, दोमट या मध्यम प्रकार की भूमि अधिक उपयुक्त होती है। पीएच मान 7-8 के बीच वाली भूमि उपजाऊ होती है। खेत को समलत करके उसमें जल निकास की उचित व्यवस्था करना भी बेहतर है।
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खाद एवं उर्वरक
उड़द को अधिक नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती है। इसकी जड़ में राजोबियम जीवाणु वायुमंडल की स्वतंत्र नाइट्रोजन को ग्रहण कर पौधों को प्रदान करते हैं। ऐसे जीवाणु क्रियाशील हों, तब तक के लिए 15 से 20 किग्रा नाइट्रोजन, 40-50 किग्रा फास्फोरस तथा 40 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के समय खेतों में मिला देते हैं। संपूर्ण खाद की मात्रा बुवाई के समय कतारों में बीज के ठीक नीचे डालना चाहिए। दलहनी फसलों में गंधक युक्त उर्वरक जैसे सिंगल सुपर फास्फेट, अमोनियम सल्फेट, जिप्सम आदि का उपयोग करना चाहिए। गंधक की कमी वाले क्षेत्र में 8 किलोग्राम गंधक प्रति एकड़ उर्वरकों के माध्यम से देना चाहिए।
बीज की मात्रा एवं बीजोपचार
उड़द अकेले बोने पर 15 से 20 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर तथा मिश्रित फसल के रूप में बोने पर 6-8 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से लेना चाहिए। बुवाई से पहले बीज को 3 ग्राम थायराइम या 2.5 ग्राम डायथेन एम-45 प्रति किलो बीज के दर से उपचारित करना चाहिए। जैविक बीजोपचार के लिए ट्राइकोडर्मा फफूंद नाशक 5 से 6 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपयोग किया जाता है।
बुवाई का समय
- ग्रीष्मकालीन उड़द की बुवाई के लिए मार्च का पहला सप्ताह उपयुक्त है।
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सिंचाई
वर्षा के अभाव में फलियों के बनते समय सिंचाई करनी चाहिए। इसके लिए 3 से 4 बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है। पहली सिंचाई पलेवा के रूप में और बाकी की सिंचाई 20 दिन के अंतराल पर होनी चाहिए।
निराई-गुड़ाई
अच्छे उत्पादन के लिए निराई-गुड़ाई करें। खरपतवारनाशक वासालिन 800 मिली से 1000 मिली प्रति एकड़ 250 लीटर पानी में घोल बनाकर जमीन बखरने से पूर्व नमी युक्त खेत में छिडक़ने से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।
कीट की रोकथाम
- फली छेदक कीट
- यह कीट फलियों में छेदकर दानों को खाती है। रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफास का एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
सफेद मक्खी
- यह पीला मोजैक वायरस के वाहक के रूप में कार्य करती है। इसकी रोकथाम के लिए ट्रायसजोफॉस 40 ई.सी. का एक लीटर का 500 लीटर पानी में छिडक़ाव करें। इमिडाक्लोप्रिड की 100 मिलीलीटर या 51 इमेथोएट की 25 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडक़ाव करें।
अर्द्ध कुंडलक (सेमी लुपर)
- यह कोमल पत्तियों को छलनी कर देता है। इसके लिए प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी. एक लीटर का 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें।
एफिड
- यह मुलांकूर का रस चूसता है। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है। इसके लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ई.सी. 500 मिली लीटर 1000 लीटर पानी के घोल में मिलाकर छिडक़ाव करें।
उड़द की कटाई
- उड़द लगभग 85-90 दिनों में पककर तैयार होती है। कटाई के लिए हंसिया का उपयोग करें। 70 से 80 प्रतिशत फलियों के पकने पर कटाई करें। दानों में नमी दूर करने के लिए धूप में सुखाना जरूरी है। इसके बाद भंडारित किया जा सकता है।
उपज
- शुद्ध फसल में 10-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और मिश्रित फसल में 6-8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है।
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सवाल-जवाब
डा. सतेंद्र कुमार खारी
प्रोफेसर उद्यान-नोडल ऑफिसर कृषि तकनीकी सूचना केंद्र कूषि विवि
प्रश्न- आम के पेड़ पर बोर आ गया है। किस चीज का छिड़काव करें। - मोहम्मद नजीर बिजनौर
उत्तर- आम के पौधे पर फूल आ जाए तो 25 मार्च से लेकर 5 अप्रैल के बीच में नेप्थलीन एसिटिक एसिड का 40 पीपीएम का स्प्रे करें। पहला स्प्रे 25 मार्च को और दूसरा स्प्रे 10 अप्रैल को कर दें।
प्रश्न- आम का पेड़ आधा सूख रहा है, क्या करें। -हरीश चौहान, सिखेड़ा मेरठ
उत्तर- अक्तूबर में आम के पेड़ के पास 300 से 400 ग्राम जिंक सल्फेट व 400 ग्राम कॉपर सल्फेट एवं चार सौ ग्राम बोरान के साथ फैला दें। यदि आम का पेड़ 10 वर्ष अधिक का है तो एक क्विंटल सड़ी गली खाद पौधे के आसपास फैला दें और मिट्टी में मिला दें।
प्रश्न- अमरूद के फल आते ही कीड़े पड़ने लगते हैं। अमित कुमार, लिसाड़ शामली
उत्तर- यह समस्या बरसात में अधिक होती है। रोकथाम के लिए नीम के पत्तों को उबालकर ठंडा करके अमरूद के पौधों पर स्प्रे कर दें।
प्रश्न- रजनीगंधा की खेती करनी है। बीज कहां से मिलेगा। विरेंद्र कुमार, गांधी नगर सहारनपुर
उत्तर- इसकी खेती फरवरी-मार्च में कर सकते हैं। बीज लेने के लिए कंपनी बाग सहारनपुर से संपर्क कर सकते हैं या लोकल नर्सरी से ले सकते हैं। यह दो तरह का होता है सिंगल एवं डबल। सिंगल में खुशबू आती है, डबल में फूल का आकार बड़ा होता है, खुशबू नहीं आती।

प्रश्न- नींबू के पेड़ पर फल नहीं बनता फूल झड़ जाते हैं। सुरेंद्र पाल सिंह, फुगाना
उत्तर- इसे रोकने के लिए फल फूल बनते समय सिंचाई न करें। संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का प्रयोग करें। समस्या के समाधान के लिए आरियोपिफन्जिन 2, 4-डी + जिंक सल्पेफट के तीन 2 ग्राम प्रति लीटर का छिड़काव करे जोकि फल बनने के बाद, मई व इसके एक महीने के बाद दूसरा छिड़काव करे।
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