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Meerut News: मंडी समिति और ग्राम पंचायत में तकरार, किसान लाचार
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- समिति सचिव बोले ग्राम पंचायत से हैंडओवर ली जाएगी मंडी की जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बहसूमा। मंडी समिति व ग्राम पंचायत की खींचतान में किसानों को मंडी में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मंडी समिति के अधिकारी मंडी से राजस्व तो ले रहे हैं, लेकिन सुविधा के लिए गेंद ग्राम पंचायत के पाले में डाल दी है। मंडी समिति और ग्राम पंचायत के अधिकारियों की लापरवाही के बीच जनता को मिलने वाली सुविधा फंस गई हैं।
बहसूमा में मंडी का निर्माण 2007 में पूर्व प्रधान रमेश मक्कड़ के प्रयासों से हुआ था। मंडी ग्राम पंचायत की जमीन पर विकसित हुई है। उसी समय से मंडी समिति ने मंडी में आने वाले कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क भी वसूलना शुरू कर दिया। इस मंडी से आसपास के सैकड़ों किसान जुड़े हैं। मंडी में न पीने के पानी की उचित व्यवस्था है और न सड़कें व शौचालय। इन सभी सुविधाओं के लिए जनता अनेकों बार मंडी समिति सचिव के सामने गुहार लगा चुकी है। मवाना मंडी समिति के सचिव अर्जुन सिंह का कहना है कि मंडी समिति ने ग्राम पंचायत को मंडी हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन ग्राम पंचायत ने रामराज मंडी समिति के हैंडओवर करने से इन्कार कर दिया था। पत्राचार के बाद ग्राम पंचायत मंडी समिति के विरोध में हाईकोर्ट चली गई। हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत के पक्ष में निर्णय दिया।
मंडी समिति सचिव का कहना है कि सरकार ने मंडी के विकास करने के निर्देश दिए हैं। इसको लेकर डेढ़ महीने पहले ही कार्यवाहक प्रधान शुभम अरोड़ा से मिले थे। ग्राम पंचायत व मंडी समिति का आपस में अनुबंध तैयार होगा। ग्राम पंचायत को मंडी की भूमि मंडी समिति के हैंडओवर करनी होगी। वहीं सैफपुर फिरोजपुर (रामराज) के कार्यवाहक ग्राम प्रधान शुभम अरोड़ा का कहना है कि मंडी समिति सचिव अनुबंध रखने वाली बात हवाहवाई कर रहे हैं। वह हमसे मिले ही नहीं हैं। ग्राम पंचायत सचिव विनीत राणा का कहना है कि अनुबंध के प्रस्ताव की उन्हें जानकारी नहीं है।
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बहसूमा। मंडी समिति व ग्राम पंचायत की खींचतान में किसानों को मंडी में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। मंडी समिति के अधिकारी मंडी से राजस्व तो ले रहे हैं, लेकिन सुविधा के लिए गेंद ग्राम पंचायत के पाले में डाल दी है। मंडी समिति और ग्राम पंचायत के अधिकारियों की लापरवाही के बीच जनता को मिलने वाली सुविधा फंस गई हैं।
बहसूमा में मंडी का निर्माण 2007 में पूर्व प्रधान रमेश मक्कड़ के प्रयासों से हुआ था। मंडी ग्राम पंचायत की जमीन पर विकसित हुई है। उसी समय से मंडी समिति ने मंडी में आने वाले कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क भी वसूलना शुरू कर दिया। इस मंडी से आसपास के सैकड़ों किसान जुड़े हैं। मंडी में न पीने के पानी की उचित व्यवस्था है और न सड़कें व शौचालय। इन सभी सुविधाओं के लिए जनता अनेकों बार मंडी समिति सचिव के सामने गुहार लगा चुकी है। मवाना मंडी समिति के सचिव अर्जुन सिंह का कहना है कि मंडी समिति ने ग्राम पंचायत को मंडी हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन ग्राम पंचायत ने रामराज मंडी समिति के हैंडओवर करने से इन्कार कर दिया था। पत्राचार के बाद ग्राम पंचायत मंडी समिति के विरोध में हाईकोर्ट चली गई। हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत के पक्ष में निर्णय दिया।
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मंडी समिति सचिव का कहना है कि सरकार ने मंडी के विकास करने के निर्देश दिए हैं। इसको लेकर डेढ़ महीने पहले ही कार्यवाहक प्रधान शुभम अरोड़ा से मिले थे। ग्राम पंचायत व मंडी समिति का आपस में अनुबंध तैयार होगा। ग्राम पंचायत को मंडी की भूमि मंडी समिति के हैंडओवर करनी होगी। वहीं सैफपुर फिरोजपुर (रामराज) के कार्यवाहक ग्राम प्रधान शुभम अरोड़ा का कहना है कि मंडी समिति सचिव अनुबंध रखने वाली बात हवाहवाई कर रहे हैं। वह हमसे मिले ही नहीं हैं। ग्राम पंचायत सचिव विनीत राणा का कहना है कि अनुबंध के प्रस्ताव की उन्हें जानकारी नहीं है।
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