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‘जितना त्याग करोगे, उतना कल्याण होगा’
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‘जितना त्याग करोगे, उतना कल्याण होगा’
मेरठ। जीवन में आसक्ति होगी तो सफलता पर विश्राम लग जाएगा, मनुष्य के अंदर आसक्ति आ तो जाती है पर वह जाती नहीं। आसक्ति किसी भी वस्तु से हो सकती है इसमें परिवार, शरीर और व्यापार कुछ भी हो सकता है। यह प्रवचन मंगलवार को आनंदपुरी स्थित अतिथि भवन में आचार्य नमोस्तु सागर जी महाराज ने दिए।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य आसक्ति को तोड़ दे तो वह सब कुछ प्राप्त कर पाता है। मनुष्य भूतकाल का मोह करता है और भविष्य के लोभ में रहता है। जो जीवनभर आसक्ति में डूबे रहते हैं वे नरक में जाते हैं। जितना त्याग करोगे उतना ही कल्याण होगा। जितना छोड़ोगे उतना ही पाओगे, दान हमेशा अच्छे मन और भाव से करना चाहिए। आसक्ति देव शास्त्र एवं गुरु संतों की वाणी से समाप्त होनी चाहिए। आपके भाव शुद्ध होंगे तो परिणाम निर्मल होंगे। अनुभव हमें माता और पिता से मिलता है। बिना अनुभव के जीवन सफल नहीं हो सकता। जीवन में सुख और दुख दोनों समय पर आते हैं। जैन संत के समान आप भी जीवन को सफल बना सकते हैं। बस भाव अच्छे होने चाहिए। सायंकालीन सभा में गुरु भक्ति व सामूहिक आरती हुई। कार्यक्रम में सुनील जैन, अचल जैन, तरस जैन, विजेंद्र जैन, रचित जैन, गुलशन राय, शैलेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
विचाराें में गंदगी से कष्ट : प्रणम्य सागर
मेरठ। असौड़ा हाउस जैन मंदिर में प्रवचन करते हुए प्रणम्य सागर जी महाराज ने बताया कि मनुष्य के विचारों में क्रोध, मान, माया, लोभ की मलिनता उसे मानसिक परेशानी देती है। इस मलिनता को वह नहीं निकालता क्योंकि वह उसका आदि हो चुका है। विचार में गंदगी कष्ट देती है। जब गुरु और भगवान दोनों से साक्षात्कार हो जाए तो मौके का फायदा उठाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सहारनपुर से आए जैन समाज ने मुनि महाराज को सहारनपुर आने के लिए आमंत्रित किया। साथ ही जबलपुर से आए भक्तों ने श्रीफल भेंट किया। इस अवसर पर कपिल जैन, विपिन जैन, सुनील जैन, विरेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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मेरठ। जीवन में आसक्ति होगी तो सफलता पर विश्राम लग जाएगा, मनुष्य के अंदर आसक्ति आ तो जाती है पर वह जाती नहीं। आसक्ति किसी भी वस्तु से हो सकती है इसमें परिवार, शरीर और व्यापार कुछ भी हो सकता है। यह प्रवचन मंगलवार को आनंदपुरी स्थित अतिथि भवन में आचार्य नमोस्तु सागर जी महाराज ने दिए।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य आसक्ति को तोड़ दे तो वह सब कुछ प्राप्त कर पाता है। मनुष्य भूतकाल का मोह करता है और भविष्य के लोभ में रहता है। जो जीवनभर आसक्ति में डूबे रहते हैं वे नरक में जाते हैं। जितना त्याग करोगे उतना ही कल्याण होगा। जितना छोड़ोगे उतना ही पाओगे, दान हमेशा अच्छे मन और भाव से करना चाहिए। आसक्ति देव शास्त्र एवं गुरु संतों की वाणी से समाप्त होनी चाहिए। आपके भाव शुद्ध होंगे तो परिणाम निर्मल होंगे। अनुभव हमें माता और पिता से मिलता है। बिना अनुभव के जीवन सफल नहीं हो सकता। जीवन में सुख और दुख दोनों समय पर आते हैं। जैन संत के समान आप भी जीवन को सफल बना सकते हैं। बस भाव अच्छे होने चाहिए। सायंकालीन सभा में गुरु भक्ति व सामूहिक आरती हुई। कार्यक्रम में सुनील जैन, अचल जैन, तरस जैन, विजेंद्र जैन, रचित जैन, गुलशन राय, शैलेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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विचाराें में गंदगी से कष्ट : प्रणम्य सागर
मेरठ। असौड़ा हाउस जैन मंदिर में प्रवचन करते हुए प्रणम्य सागर जी महाराज ने बताया कि मनुष्य के विचारों में क्रोध, मान, माया, लोभ की मलिनता उसे मानसिक परेशानी देती है। इस मलिनता को वह नहीं निकालता क्योंकि वह उसका आदि हो चुका है। विचार में गंदगी कष्ट देती है। जब गुरु और भगवान दोनों से साक्षात्कार हो जाए तो मौके का फायदा उठाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सहारनपुर से आए जैन समाज ने मुनि महाराज को सहारनपुर आने के लिए आमंत्रित किया। साथ ही जबलपुर से आए भक्तों ने श्रीफल भेंट किया। इस अवसर पर कपिल जैन, विपिन जैन, सुनील जैन, विरेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
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