देवशयनी एकादशी आज, चतुर्मास शुरू, अगले 148 दिन तक योग निद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु
- चतुर्मास में करें मीठे व अन्न का दान, बंद रहेंगे मांगलिक कार्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आज बुधवार को देवशयनी एकादशी है। मान्यता है कि यह भगवान विष्णु के आध्यात्मिक जगत में अपने कर्म कर्तव्य निभाने के लिए प्रस्थान करने की तिथि कहलाती है। अब चार माह तक भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर योग निद्रा में रहेंगे।
उनके साथ में अन्य दिव्य शक्तियां भी आध्यात्मिक जगत से प्रस्थान कर जाती हैं। चतुर्मास में पृथ्वी पर भगवान शंकर की तमोगुणी संहारक शक्ति ही रह जाती है। ऐसे में इन चार माह में सतोगुणी जप, पूजन, ध्यान, साधना, दान, पुण्य, हवन अवश्य करना चाहिए।
भगवान शिव का शीतल जल से अभिषेक, रुद्र रूप को कल्याणकारी शिव में परिवर्तित करने के लिए स्वयं का स्वभाव भी शीतल बनाना चाहिए। साथ ही भगवान विष्णु का चतुर्भुजी रूप शेषनाग की शैय्या पर विराजे, उनकी नाभि कमल में विराजे ब्रह्माजी और भगवान विष्णु के चरणों पर सेवारत लक्ष्मीजी के चित्र का ध्यान करते हुए चतुर्मास को व्यतीत करना चाहिए।
चतुर्मास असल में संन्यासियों द्वारा समाज को मार्गदर्शन करने का समय है। आम आदमी इन चार महीनों में सिर्फ सत्य बोले तो उसे अपने अंदर आध्यात्मिक प्रकाश नजर आएगा। अब 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी को श्रीहरि योग निद्रा से उठेंगे।
चतुर्मास में सभी मांगलिक कार्यक्रम वर्जित रहेंगे। इस बार संयोग से देवशयनी और देवोत्थानी एकादशी बुधवार के दिन ही पड़ रही हैं। वहीं अधिमास होने के कारण इस बार चतुर्मास पांच माह के होंगे।
ईश्वर की भक्ति ही उपयुक्त
चतुर्मास में पूरी तरह ईश्वर की भक्ति में डूबे रहें। बदलते मौसम में जब शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बेहद कम होती है, तब आध्यात्मिक शक्ति प्राप्ति के लिए व्रत करना, उपवास रखना और ईश्वर की आराधना करना बेहद लाभदायक माना जाता है। सूर्य चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व भी इन दिनों कम हो जाता है। नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ने लगता है। ऐसे में देव पूजन द्वारा सकारात्मक शक्तियों को जाग्रत रखा जाए।