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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Devotees were moved to emotion upon hearing the episodes of the journey to the forest and the boatman Kevat.

Meerut News: वन गमन और केवट के प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु

Thu, 18 Jun 2026 06:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 06:55 PM IST
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Devotees were moved to emotion upon hearing the episodes of the journey to the forest and the boatman Kevat.
- दशमेश नगर में चल रही श्रीराम कथा में अन्य प्रसंग भी सुनाए गए
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दशमेश नगर में चल रही श्रीराम कथा में बृहस्पतिवार को कथा व्यास जनार्दन तिवारी महाराज ने राम वन गमन और केवट प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायक वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। पूरा वातावरण भगवान श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान हो गया।
कथा व्यास ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं। वहीं, मंथरा ने कुटिल बुद्धि से माता कैकेयी को अपनी बातों में ले लिया। श्रीराम से अत्यधिक स्नेह रखने वाली कैकेयी ने उसके बहकावे में आकर राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। इनमें श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का वनवास और भरत के लिए राज गद्दी की मांग की गई।
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उन्होंने कहा कि जब मनुष्य की बुद्धि कुसंगति के प्रभाव में आ जाती है तब वह धर्म और न्याय के विपरीत निर्णय लेने लगता है। इसलिए जीवन में सज्जनों की संगति का आश्रय लेना चाहिए। इसके बाद बताया गया कि वन गमन के समय भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण सुमंत के साथ रथ पर बैठकर तमसा नदी के तट पर पहुंचे। यहां उन्होंने प्रथम विश्राम किया। अगले दिन वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे जहां निषादराज और मल्लाह समाज ने प्रभु के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। अयोध्या राज्य की सीमा समाप्त होने पर श्रीराम ने सुमंत को समझाकर वापस भेज दिया।
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कथा के दौरान गंगा तट पर घटित केवट प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि केवट ने प्रभु श्रीराम के चरण पखारकर उन्हें अपनी नाव में बैठाया और गंगा पार कराई। उसकी निष्काम भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे अपनी कृपा प्रदान की। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने हृदय को गंगा के समान निर्मल, पवित्र और निष्कपट बना लेता है तब प्रभु स्वयं उसके हृदय रूपी नाव में विराजमान होकर जीवन का कल्याण करते हैं।
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