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Meerut News: शिव विवाह के प्रसंग में भजनों पर झूमे श्रद्धालु
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- सदर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीराम कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सदर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्रीराम कथा हुई। कथा में पंडित उमेश भारद्वाज ने संकीर्तन किया। कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास डॉ. रामप्रकाश शास्त्री ने शिव विवाह का प्रसंग सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। शिव विवाह के प्रसंग में बराती बने श्रद्धालु भोले बाबा के भजनों पर झूम उठे।
डॉ. रामप्रकाश शास्त्री ने कहा कि अगर विश्वास और श्रद्धा है, तभी आप सनातनी हो सकते हैं। मनुष्य को सदा वैदिक रीति रिवाज के साथ आचरण करना चाहिए। दान सदैव सात्विक आचार विचार वाले से ही लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि देवी सती के हवन कुंड की अग्नि में समाने के बाद शिव वैरागी का जीवन जी रहे थे। पार्वती के साथ विवाह के बाद उनका वैराग्य दूर हुआ। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ। इस अवसर पर भगवान शिव की अनोखी बरात निकाली गई। बरात में सभी देवता, भूत, प्रेत शामिल रहे। विवाह में श्री हरि विष्णु और ब्रह्मा जी भी शामिल हुए। मुनियों ने स्वस्ति वाचन किया।
कथा में शिव पार्वती विवाह के आध्यात्मिक रहस्यों पर भी प्रकाश डाला गया। कथा व्यास ने बताया कि महादेव को विश्वास रूप और पार्वती को श्रद्धा रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। आत्म विश्वास ही मनुष्य की सफलता की कुंजी है। इस अवसर पर महिलाओं ने मंगल गीत गए। विवाह की रस्म का बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया गया। इस अवसर पर विनीत गोयल, नितिन गोयल, मुकेश, मोहन गोयल, शालू गोयल, उमेश भट्ट, हिमांशु शास्त्री रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सदर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्रीराम कथा हुई। कथा में पंडित उमेश भारद्वाज ने संकीर्तन किया। कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास डॉ. रामप्रकाश शास्त्री ने शिव विवाह का प्रसंग सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। शिव विवाह के प्रसंग में बराती बने श्रद्धालु भोले बाबा के भजनों पर झूम उठे।
डॉ. रामप्रकाश शास्त्री ने कहा कि अगर विश्वास और श्रद्धा है, तभी आप सनातनी हो सकते हैं। मनुष्य को सदा वैदिक रीति रिवाज के साथ आचरण करना चाहिए। दान सदैव सात्विक आचार विचार वाले से ही लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि देवी सती के हवन कुंड की अग्नि में समाने के बाद शिव वैरागी का जीवन जी रहे थे। पार्वती के साथ विवाह के बाद उनका वैराग्य दूर हुआ। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ। इस अवसर पर भगवान शिव की अनोखी बरात निकाली गई। बरात में सभी देवता, भूत, प्रेत शामिल रहे। विवाह में श्री हरि विष्णु और ब्रह्मा जी भी शामिल हुए। मुनियों ने स्वस्ति वाचन किया।
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कथा में शिव पार्वती विवाह के आध्यात्मिक रहस्यों पर भी प्रकाश डाला गया। कथा व्यास ने बताया कि महादेव को विश्वास रूप और पार्वती को श्रद्धा रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। आत्म विश्वास ही मनुष्य की सफलता की कुंजी है। इस अवसर पर महिलाओं ने मंगल गीत गए। विवाह की रस्म का बहुत ही सुंदर ढंग से वर्णन किया गया। इस अवसर पर विनीत गोयल, नितिन गोयल, मुकेश, मोहन गोयल, शालू गोयल, उमेश भट्ट, हिमांशु शास्त्री रहे।
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