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डेवलपमेंट का सुपर इलेक्शन प्लान
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sun, 11 Sep 2016 02:46 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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चुनावी रथ पर सवार प्रदेश सरकार ने सुपर इलेक्शन डेवलेपमेंट प्लान तैयार किया है। इसके तहत महत्वाकांक्षी योजनाओं को जल्द से जल्द पूरा कराने की योजना है। डेढ़ से तीन माह के बीच ऐसे निर्माण कार्य पूरे कराए जाएंगे, जो विकास के लिए जरूरी होने के साथ ही चुनाव में वोट भी दिलाएंगे। ऐसे में मेरठ में सबसे पहले कमेले की जमीन पर प्रस्तावित राजकीय अस्पताल का काम गैल्वेनाइज्ड स्टील तकनीक से करने की तैयारी है। यह काम तीन माह में पूरा हो जाएगा। अन्य प्रस्तावों को भी आनन-फानन में पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
स्टील तकनीक पर बनेगा अस्पताल
हापुड़ रोड पर पुराने कमेले को ध्वस्त कर आधे हिस्से में राजकीय बालिका विद्यालय बनाया गया है। बाकी 3600 मीटर जगह में सरकार ने 50 बेड का राजकीय अस्पताल स्वीकृत किया है। पहले राजकीय निर्माण निगम ने इसका नौ करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाया था। चुनावी बयार शुरू हुई तो जल्द से जल्द इसका निर्माण करने के आदेश जारी कर दिए गए। ऐसे में तकनीक बदली और रिवाइज इस्टीमेट 18 करोड़ रुपये हो गया। अब इसे स्टेयिंग फ्लेम फेस तकनीक से बनाने की तैयारी है, जिससे तीन माह में डबल स्टोरी अस्पताल तैयार हो जाए। इसी सप्ताह इसका शासनादेश जारी होने की उम्मीद है।
यह होता है इस तकनीक में
- स्टेयिंग फ्लेम फेस तकनीक से होता है काम
- आगे लगती हैं कंक्रीट की दीवार, 12 घंटे में होता है फिनिशिंग का काम
- गैल्वेनाइज्ड स्टील और प्री फैब्रिकेटेड स्टील फ्रेम का होगा इस्तेमाल
- पूरा स्ट्रक्चर स्टील पार्ट पर नट-बोल्ट से तैयार किया जाता है
- छत बनती है स्टील फ्रेम और शीट से
- नींव और बेस में होगा कंक्रीट का इस्तेमाल
- छत भी स्टील फ्रेमिंग होगी। सिर्फ फ्लोरिंग के लिए तीन इंच की कंक्रीट लेयर बिछाई जा सकती है।
- आरसीसी बिल्डिंग स्ट्रक्चर का वजन 1200 से 1500 किग्रा प्रति वर्ग मीटर, जबकि स्टील स्ट्रक्चर का 350 होता है।
- दीवारों में रेफ्रीजरेटर की तरह पॉलीयूरेथिन फोम लगाई जाती है
- इलेक्ट्रोस्टेटिक रेस्पिरेटर का इस्तेमाल
- कंक्रीट बिल्डिंग की उम्र सौ साल और इसकी पांच सौ साल होती है
- मोहाली में बनी है ऐसी बड़ी बिल्डिंग, देश के अन्य स्थानों पर भी हुआ काम
- मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी इसी तकनीक पर रानी लक्ष्मीबाई आशा ज्योति पुनर्वास केंद्र बना है
मल्टीलेवल पार्किंग भी ऑटोमेशन
एमडीए ने मल्टीलेवल पार्किंग के लिए 20 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं, लेकिन निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल रही है। अब एमडीए अधिकारी भी ऑटोमेशन मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि सरकार ने कहा है कि इस काम को तत्काल पूरा करो। अब इसे भी रोलर बीयरिंग पर बनाया जाएगा। एक पार्किंग पर खर्च आएगा पांच से सात करोड़। ऐसे में इसी बजट में 50-50 गाड़ियों की क्षमता वाली कई पार्किंग बन सकेंगी। इसमें गाड़ी ऊपर नीचे कतार में खड़ी की जा सकेंगी। यह पूरा एडवांस तकनीक से बना होगा।
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मेट्रो ट्रैक
मेट्रो चले न चले, पर सरकार इस प्रस्ताव को अपनी कैबिनेट में मंजूर करने की तैयारी का चुकी है। इसी पखवाड़े में इसी डीपीआर कैबिनेट में पास कर भारत सरकार को भेज दी जाएगी। कवायद यह है कि किसी तरह से एक बार इसका भी शिलान्यास कर दिया जाए। हालांकि इसके लिए मेरठ मेट्रो रेल कारपोरेशन का गठन होना बाकी है।
साइकिल ट्रैक
सरकार ने कहा है कि साइकिल ट्रैक पर काम पूरा क्यों नहीं हो रहा है। यहां बोलार्ड विद हैच लगाकर सड़क से इसे सेपरेट किया गया है, पर सरकार का कहना है कि काम पूरा करें। इस माह के अंत तक शत प्रतिशत काम पूरा कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। मेरठ में पांच किमी से ज्यादा बनाए गए ट्रैक पर छह करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
कनेक्टिंग रोड
सभी कनेक्टिंड रोड पूरा करने के लिए सरकार ने साफ तौर पर निर्देश दिए हैं। शहर की भीतरी सड़कों पर तो काम भी शुरू हो गया है। हापुड़ रोड से आरटीओ ऑफिस होते हुए गढ़ रोड को मिलाने वाली रोड पर काम शुरू हो गया है। रंगोली मंडप के पास पुल का दोहरीकरण तेज कर दिया गया है। बाकी बाहरी सड़कों का फाइनल स्टेटस मांगा गया है।
बिजलीघर
गंगानगर और वेदव्यासपुरी में 2132-132 केवीए के बिजलीघर बन रहे हैं, लेकिन यहां पर किसानों ने काम रोक रखे हैं। बिजली मुद्दा सरकर के मुख्य एजेंडे में है। देहात क्षेत्र में इस पर काफी काम हुआ है। अब शहर में बिजलीघर बनाने पर भी सरकार सख्त हो गई है। यही कारण है कि किसानों के साथ विवाद को निपटाने की कोशिश तेज हो गई है।
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स्टील तकनीक पर बनेगा अस्पताल
हापुड़ रोड पर पुराने कमेले को ध्वस्त कर आधे हिस्से में राजकीय बालिका विद्यालय बनाया गया है। बाकी 3600 मीटर जगह में सरकार ने 50 बेड का राजकीय अस्पताल स्वीकृत किया है। पहले राजकीय निर्माण निगम ने इसका नौ करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाया था। चुनावी बयार शुरू हुई तो जल्द से जल्द इसका निर्माण करने के आदेश जारी कर दिए गए। ऐसे में तकनीक बदली और रिवाइज इस्टीमेट 18 करोड़ रुपये हो गया। अब इसे स्टेयिंग फ्लेम फेस तकनीक से बनाने की तैयारी है, जिससे तीन माह में डबल स्टोरी अस्पताल तैयार हो जाए। इसी सप्ताह इसका शासनादेश जारी होने की उम्मीद है।
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यह होता है इस तकनीक में
- स्टेयिंग फ्लेम फेस तकनीक से होता है काम
- आगे लगती हैं कंक्रीट की दीवार, 12 घंटे में होता है फिनिशिंग का काम
- गैल्वेनाइज्ड स्टील और प्री फैब्रिकेटेड स्टील फ्रेम का होगा इस्तेमाल
- पूरा स्ट्रक्चर स्टील पार्ट पर नट-बोल्ट से तैयार किया जाता है
- छत बनती है स्टील फ्रेम और शीट से
- नींव और बेस में होगा कंक्रीट का इस्तेमाल
- छत भी स्टील फ्रेमिंग होगी। सिर्फ फ्लोरिंग के लिए तीन इंच की कंक्रीट लेयर बिछाई जा सकती है।
- आरसीसी बिल्डिंग स्ट्रक्चर का वजन 1200 से 1500 किग्रा प्रति वर्ग मीटर, जबकि स्टील स्ट्रक्चर का 350 होता है।
- दीवारों में रेफ्रीजरेटर की तरह पॉलीयूरेथिन फोम लगाई जाती है
- इलेक्ट्रोस्टेटिक रेस्पिरेटर का इस्तेमाल
- कंक्रीट बिल्डिंग की उम्र सौ साल और इसकी पांच सौ साल होती है
- मोहाली में बनी है ऐसी बड़ी बिल्डिंग, देश के अन्य स्थानों पर भी हुआ काम
- मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी इसी तकनीक पर रानी लक्ष्मीबाई आशा ज्योति पुनर्वास केंद्र बना है
मल्टीलेवल पार्किंग भी ऑटोमेशन
एमडीए ने मल्टीलेवल पार्किंग के लिए 20 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं, लेकिन निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल रही है। अब एमडीए अधिकारी भी ऑटोमेशन मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि सरकार ने कहा है कि इस काम को तत्काल पूरा करो। अब इसे भी रोलर बीयरिंग पर बनाया जाएगा। एक पार्किंग पर खर्च आएगा पांच से सात करोड़। ऐसे में इसी बजट में 50-50 गाड़ियों की क्षमता वाली कई पार्किंग बन सकेंगी। इसमें गाड़ी ऊपर नीचे कतार में खड़ी की जा सकेंगी। यह पूरा एडवांस तकनीक से बना होगा।
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मेट्रो ट्रैक
मेट्रो चले न चले, पर सरकार इस प्रस्ताव को अपनी कैबिनेट में मंजूर करने की तैयारी का चुकी है। इसी पखवाड़े में इसी डीपीआर कैबिनेट में पास कर भारत सरकार को भेज दी जाएगी। कवायद यह है कि किसी तरह से एक बार इसका भी शिलान्यास कर दिया जाए। हालांकि इसके लिए मेरठ मेट्रो रेल कारपोरेशन का गठन होना बाकी है।
साइकिल ट्रैक
सरकार ने कहा है कि साइकिल ट्रैक पर काम पूरा क्यों नहीं हो रहा है। यहां बोलार्ड विद हैच लगाकर सड़क से इसे सेपरेट किया गया है, पर सरकार का कहना है कि काम पूरा करें। इस माह के अंत तक शत प्रतिशत काम पूरा कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। मेरठ में पांच किमी से ज्यादा बनाए गए ट्रैक पर छह करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
कनेक्टिंग रोड
सभी कनेक्टिंड रोड पूरा करने के लिए सरकार ने साफ तौर पर निर्देश दिए हैं। शहर की भीतरी सड़कों पर तो काम भी शुरू हो गया है। हापुड़ रोड से आरटीओ ऑफिस होते हुए गढ़ रोड को मिलाने वाली रोड पर काम शुरू हो गया है। रंगोली मंडप के पास पुल का दोहरीकरण तेज कर दिया गया है। बाकी बाहरी सड़कों का फाइनल स्टेटस मांगा गया है।
बिजलीघर
गंगानगर और वेदव्यासपुरी में 2132-132 केवीए के बिजलीघर बन रहे हैं, लेकिन यहां पर किसानों ने काम रोक रखे हैं। बिजली मुद्दा सरकर के मुख्य एजेंडे में है। देहात क्षेत्र में इस पर काफी काम हुआ है। अब शहर में बिजलीघर बनाने पर भी सरकार सख्त हो गई है। यही कारण है कि किसानों के साथ विवाद को निपटाने की कोशिश तेज हो गई है।