देवबंदी उलमा बोले, सीएम योगी आदित्यनाथ को इस्लाम की सही जानकारी नहीं
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सूर्य नमस्कार व नमाज की क्रियाएं मिलती जुलती होने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर जहां इस्लामिक शिक्षण संस्था दारूल उलूम ने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। वहीं उलमा ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस्लाम की सही जानकारी नहीं है इसी वजह से वह ऐसा बयान दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूर्य नमस्कार व नमाज एक जैसी क्रिया होने के बयान पर इस्लामिक शिक्षण संस्था दारूल उलूम के अशरफ उस्मानी ने कहा कि राजनेताओं द्वारा की जाने वाली बयानबाजी पर दारूल उलूम ने कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। दारूल उलूम जकरिया के उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन विभाग के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस्लामी जानकारी न होने की वजह से गलतफहमी है और इसी बुनियाद पर उन्होंने इस तरह का बयान दिया है। साथ ही सलाह दी कि योगी आदित्यनाथ मजहब के जानने वालों से नमाज से संबंधित जानकारी हासिल करें, क्योंकि नमाज अल्लाह की इबादत है तथा इस्लाम में सूर्य नमस्कार की पूजा नहीं की जा सकती है। इसलिए मुख्यमंत्री का यह कहना कि नमाज व सूर्य नमस्कार एक जैसी क्रियाएं हैं सरासर गलत है।
सूर्य नमस्कार व नमाज दोनों अलग-अलग हैं
वहीं दारूल उलूम वक्फ के नायब मोहतमिम एवं फतवा विभाग के नायब प्रभारी मुफ्ती अहसान कासमी ने कहा कि सरकार द्वारा किसी पर कोई नियम जबरन थोपा नहीं गया है। जिसका धर्म इजाजत देता है वह करे नहीं इजाजत देता है तो न करे। सूर्य नमस्कार व नमाज दोनों में समानता नहीं है।
अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुल वाजदी ने कहा कि सूर्य नमस्कार व नमाज दोनों अलग-अलग हैं। इसलिए सीएम योगी आदित्यनाथ का यह कहना दोनों में समानता है गलत है। उन्होंने कहा कि नमाज दिन में पांच बार पढ़ी जाती है जो अल्लाह की इबादत है। जबकि सूर्य नमस्कार दिन में केवल एक बार ही किया जाता है। इसलिए सूर्य नमस्कार हिंदुओं के लिए इबादत है और नमाज मुसलमानों के लिए।