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देवबंदी उलेमा बोले- मस्जिद इस्लाम धर्म का प्रतीक चिन्ह

Thu, 27 Sep 2018 09:08 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Updated Thu, 27 Sep 2018 09:08 PM IST
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Deobandi Ulema angry on Supreme verdict of praying in the mosque and said Intervention in Islam
फाइल फोटो

मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं, इस मसले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को पुनर्विचार के लिए बड़ी पीठ को भेजने से इंकार कर दिया। इस मामले में देवबंदी उलेमा का कहना है कि मस्जिद इस्लाम धर्म का प्रतीक चिन्ह है। मुसलमान जमात के साथ नमाज मस्जिद में ही पढ़ सकते हैं। बीमारी या सफर में होने के चलते नमाज किसी भी पाक स्थान पर अदा की जा सकती है।   

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-फैसले की कॉपी देखने के बाद कुछ कहना उचित: बनारसी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी का कहना है कि अभी उन्होंने फैसले की कॉपी नहीं देखी है। उसको देखने के बाद ही इस पर कोई प्रतिक्रिया देना उचित होगा।  
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-इस्लाम का तसव्वुर नमाज जमात से पढ़ी जाए: फारुकी
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि इस्लाम का तसव्वुर यही है कि नमाज जमात से पढ़ी जाए और जमात मस्जिद में होती है। लेकिन किसी कारणवश मस्जिद में नहीं जाया जा सकता तो कहीं भी पाक स्थान पर नमाज अदा की जा सकती है।

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-इस्लाम में मस्जिद अल्लाह का घर: मुफ्ती अहमद 
मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि इस्लाम की बुनियाद नमाज, रोजा, हज, जकात और तौहीद रिसालत पर टिकी है। बिना किसी मजबूरी के नमाज का मस्जिद के अलावा कहीं और अदा करना गुनाह है। अगर कोई मुसलमान मस्जिद को नमाज से अलग करार देगा तो वो भी गुनाहगार होगा। उन्होंने कहा कि इस्लाम में मस्जिद को अल्लाह का घर माना गया है।  

-दुनिया में किसी भी स्थान पर नमाज अदा की जा सकती है: मुफ्ती  
असद मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि मुसलमान पूरी दुनिया में कहीं भी नमाज अदा कर सकता है, लेकिन उसके लिए जगह का पाक होना जरूरी है। लेकिन अगर जमात के साथ नमाज अदा होगी तो वह मस्जिद में ही होगी।

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