कॉलेज में लड़कियों के बुर्के पर पाबंदी से देवबंदी उलमा सख्त नाराज, कही ये बड़ी बात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केरल के मल्लापुरम में स्थित मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी द्वारा एमईएस कॉलेज परिसर में लड़कियों के बुर्का पहनने और मुंह ढकने पर लगाई गई पाबंदी पर देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। उलमा का कहना है कि इस तरह की सोच रखने वाला घटिया और छोटी सोच का होना दर्शाता है।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि इस तरह बुर्के पर पाबंदी लगाना शरीयत के खिलाफ है उनको यह फैसला वापस लेना चाहिए। क्योंकि पर्दा इस्लाम की बुनियादी तालीम में है और हर मुस्लिम औरत के लिए जरूरी है कि वह पर्दा करे।
उन्होंने कहा कि पर्दा औरत की हिफाजत करता है। प्रबंधतंत्र को बुर्के से क्या आपत्ति है जो उन्होंने उस पर पाबंदी लगाई है। यह सरासर बुनियादी हकों पर हमला है। मुफ्ती अरशद ने कहा कि सभी मुस्लिम संगठनों और मुसलमानों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और मांग करनी चाहिए कि मुस्लिम लड़कियों को कुरआन व हदीस के हुक्म के विपरीत चलने वाला कार्य न कराएं।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि एमईएस कॉलेज में मुस्लिम बच्चियों के बुर्के पर पाबंदी लगाने का क्या मतलब है। प्रबंधतंत्र से पूछना चाहता हूं कि आखिर उन्हें बुर्के से क्या आपत्ति है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम बच्चियां तहजीब के दायरे में घर से आती हैं तो उनको क्या दिक्कत है। उन्होंने बुर्के पर पाबंदी लगाकर मुसलमान और इस्लाम पर पाबंदी लगाने का काम किया है। अल्लाह इनको कभी माफ नहीं करेगा। शरीयत पर अंगुली उठाने वाले अल्लाह से तौबा करें और पाबंदी को वापस लें।
नोट- इन खबरों के बारे अपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/