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इलेक्ट्रिसिटी एक्ट का संशोधन वापस लेने की मांग
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इलेक्ट्रिसिटी एक्ट का संशोधन वापस लेने की मांग
मेरठ। ट्रेड यूनियनों के भारत बंद को पीवीवीएनएल के कर्मचारियों का भी समर्थन मिला। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारी एक दिन के कार्य बहिष्कार पर रहे। देरशाम उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन पीवीवीएनएल एमडी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को सौंपा।
ऊर्जा भवन पर धरने पर बैठे कर्मचारियों का नेतृत्व इं. राजीव माहेश्वरी ने किया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिीसिटी एक्ट में जो संशोधन करने का प्रयास किया जा रहा है, वह न्याय संगत नहीं है। यदि यह बिल पारित हो जाता है तो सब्सिडी और क्रास सब्सिडी तीन साल में खत्म हो जाएगी। इसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ता और किसानों पर पड़ेगा। उन्हें बिजली महंगी मिलेगी, जबकि वाणिज्यिक संस्थानों की बिजली सस्ती होगी। दिलमणि थपलियाल ने कहा कि सरकार की नीति चौकाने वाली है। एक्ट संशोधन के अनुसार, हर उपभोक्ता को बिजली लागत का पूरा मूल्य देना होगा। ऐसे में बिजली की दरें 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट हो जाएंगी। निजी बिजली कंपनियां मुनाफे वाले उपभोक्ताओं को बिजली देकर भारी मुनाफा कमाएंगी। एक्ट संशोधन वापस लिए जाने समेत विभिन्न मांगों का ज्ञापन एमडी को सौंपा गया।
इसके अलावा बिजलीकर्मियों को मिलने वाली रियायती बिजली की व्यवस्था बरकरार रखने, विद्युत परिषद के विघटन के बाद भर्ती कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, बिजली कर्मचारी सुरक्षा अधिनियम जल्द बनाने, वेतन विसंगतियों को दूर करने, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती किए जाने की मांग रखी। ज्ञापन सौंपने वालों में जेई संगठन के आरएस गुप्ता, अरविंद कुमार, आशुतोष, सौरभ श्रीवास्तव, विद्युत कार्यालय संघ से विवेक सक्सेना, प्रदीप डोगरा, अभियंता संघ से इं. एके सिंह, इं. रोहित कुमार, आशुलिपिक संघ से पीसी जोशी, राम मूरत वर्मा और विद्युत मजदूर पंचायत से दीपचंद चौहान, नरेश चंद शर्मा, हरिराज सिंह, जतन पहलवान और पीवीवीएनएल की क्रीड़ा अधिकारी अलका तोमर भी मौजूद रहीं।
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ठेकेदारों ने लगाया शोषण का आरोप
मेरठ। पीवीवीएनएल के तहत आईपीडीएस और डीडीजीजेयूआई न्यू योजना में काम कर रहे ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों पर आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारी ठेकेदारों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने जब ऊर्जा मंत्री से शिकायत करने की बात कही तो वह बदले की भावना से काम करने लगे। यही नहीं उन्होंने यहां तक कह दिया कि 11वीं और 12वीं योजना के ठेकेदारों ने भी उनके सामने मनमानी का प्रयास किया था। उन्होंने भी ऊर्जा मंत्री से शिकायत की, लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका।
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मेरठ। ट्रेड यूनियनों के भारत बंद को पीवीवीएनएल के कर्मचारियों का भी समर्थन मिला। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारी एक दिन के कार्य बहिष्कार पर रहे। देरशाम उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन पीवीवीएनएल एमडी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को सौंपा।
ऊर्जा भवन पर धरने पर बैठे कर्मचारियों का नेतृत्व इं. राजीव माहेश्वरी ने किया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिीसिटी एक्ट में जो संशोधन करने का प्रयास किया जा रहा है, वह न्याय संगत नहीं है। यदि यह बिल पारित हो जाता है तो सब्सिडी और क्रास सब्सिडी तीन साल में खत्म हो जाएगी। इसका सीधा प्रभाव आम उपभोक्ता और किसानों पर पड़ेगा। उन्हें बिजली महंगी मिलेगी, जबकि वाणिज्यिक संस्थानों की बिजली सस्ती होगी। दिलमणि थपलियाल ने कहा कि सरकार की नीति चौकाने वाली है। एक्ट संशोधन के अनुसार, हर उपभोक्ता को बिजली लागत का पूरा मूल्य देना होगा। ऐसे में बिजली की दरें 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट हो जाएंगी। निजी बिजली कंपनियां मुनाफे वाले उपभोक्ताओं को बिजली देकर भारी मुनाफा कमाएंगी। एक्ट संशोधन वापस लिए जाने समेत विभिन्न मांगों का ज्ञापन एमडी को सौंपा गया।
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इसके अलावा बिजलीकर्मियों को मिलने वाली रियायती बिजली की व्यवस्था बरकरार रखने, विद्युत परिषद के विघटन के बाद भर्ती कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, बिजली कर्मचारी सुरक्षा अधिनियम जल्द बनाने, वेतन विसंगतियों को दूर करने, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती किए जाने की मांग रखी। ज्ञापन सौंपने वालों में जेई संगठन के आरएस गुप्ता, अरविंद कुमार, आशुतोष, सौरभ श्रीवास्तव, विद्युत कार्यालय संघ से विवेक सक्सेना, प्रदीप डोगरा, अभियंता संघ से इं. एके सिंह, इं. रोहित कुमार, आशुलिपिक संघ से पीसी जोशी, राम मूरत वर्मा और विद्युत मजदूर पंचायत से दीपचंद चौहान, नरेश चंद शर्मा, हरिराज सिंह, जतन पहलवान और पीवीवीएनएल की क्रीड़ा अधिकारी अलका तोमर भी मौजूद रहीं।
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ठेकेदारों ने लगाया शोषण का आरोप
मेरठ। पीवीवीएनएल के तहत आईपीडीएस और डीडीजीजेयूआई न्यू योजना में काम कर रहे ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों पर आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारी ठेकेदारों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने जब ऊर्जा मंत्री से शिकायत करने की बात कही तो वह बदले की भावना से काम करने लगे। यही नहीं उन्होंने यहां तक कह दिया कि 11वीं और 12वीं योजना के ठेकेदारों ने भी उनके सामने मनमानी का प्रयास किया था। उन्होंने भी ऊर्जा मंत्री से शिकायत की, लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका।