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Meerut News: मेडिकल को उच्चीकृत कर पीजीआई का दर्जा दिलाने की मांग
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मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को उच्चीकृत कर स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआईएमएस) का दर्जा दिलाने की मांग की गई है। इस संबंध में राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा है और उनसे इसे भारत सरकार को भेजने का आग्रह किया है।
राज्यसभा सदस्य ने बताया कि उनकी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और उनके सहयोगियों से विस्तार से चर्चा हुई थी। इस पर प्रस्ताव मांगा गया था। इस आधार पर प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें बताया गया है कि मेरठ मेडिकल कॉलेज में नौ सुपर स्पेशियलिटी विभाग पहले से हैं। 52 एकड़ भूमि मेडिकल में रिक्त है। सहारनपुर से लेकर नोएडा और बरेली तक जिलों में उच्च स्तर की सुविधा प्राप्त नहीं है। इसलिए लोगों को दिल्ली के एम्स, पंत अस्पताल, एलएनजेपी अस्पताल और निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। इन अस्पतालों में पहले ही मरीजों का भार है, जबकि निजी अस्पतालों में आर्थिक संकट के कारण व्यक्ति मजबूर होता है। डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने यह विषय राज्यसभा में भी उठाया था। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों की जनता लाभांवित होगी। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों का बोझ कम होगा। आठ सुपर स्पेशयिलटी विभाग और बनने हैं, जिसके लिए भवन और उपकरण के लिए 120 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसके अलावा 40 करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष संचालन व्यय है। इसे स्थापित करने में 267 करोड़ रुपये तीन वर्ष में व्यय होगा। इसके व्यय में 70 प्रतिशत केंद्र और 30 प्रतिशत राज्य द्वारा व्यय प्रस्तावित किया जा सकता है।
यह है मेडिकल की वर्तमान स्थिति
कुल भूमि 151 एकड़ है, जिसमें से 52 एकड़ भूमि रिक्त पड़ी है। गोरखपुर में एम्स 112 एकड़ में बन रहा है, लिहाजा मेरठ में भूमि पर्याप्त है।
- उत्तर प्रदेश का एकमात्र नर्सिंग कॉलेज है, 282 सीट हैं।
- फार्मेसी कॉलेज है।
- छह पैरा मेडिकल कोर्स हैं। 430 सीटे हैं। नया पैरामेडिकल कॉलेज भी प्रारंभ करने की प्रक्रिया चल रही है।
- 1186 बेड का अस्पताल है।
- कुल फैकल्टी- स्वीकृत पद 237, भरी-155, रिक्त-82
- कुल नर्सिंग पोस्ट- स्वीकृत 903, भरी-131, रिक्त-772
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राज्यसभा सदस्य ने बताया कि उनकी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और उनके सहयोगियों से विस्तार से चर्चा हुई थी। इस पर प्रस्ताव मांगा गया था। इस आधार पर प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें बताया गया है कि मेरठ मेडिकल कॉलेज में नौ सुपर स्पेशियलिटी विभाग पहले से हैं। 52 एकड़ भूमि मेडिकल में रिक्त है। सहारनपुर से लेकर नोएडा और बरेली तक जिलों में उच्च स्तर की सुविधा प्राप्त नहीं है। इसलिए लोगों को दिल्ली के एम्स, पंत अस्पताल, एलएनजेपी अस्पताल और निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। इन अस्पतालों में पहले ही मरीजों का भार है, जबकि निजी अस्पतालों में आर्थिक संकट के कारण व्यक्ति मजबूर होता है। डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि उन्होंने यह विषय राज्यसभा में भी उठाया था। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों की जनता लाभांवित होगी। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों का बोझ कम होगा। आठ सुपर स्पेशयिलटी विभाग और बनने हैं, जिसके लिए भवन और उपकरण के लिए 120 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसके अलावा 40 करोड़ रुपये का प्रतिवर्ष संचालन व्यय है। इसे स्थापित करने में 267 करोड़ रुपये तीन वर्ष में व्यय होगा। इसके व्यय में 70 प्रतिशत केंद्र और 30 प्रतिशत राज्य द्वारा व्यय प्रस्तावित किया जा सकता है।
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यह है मेडिकल की वर्तमान स्थिति
कुल भूमि 151 एकड़ है, जिसमें से 52 एकड़ भूमि रिक्त पड़ी है। गोरखपुर में एम्स 112 एकड़ में बन रहा है, लिहाजा मेरठ में भूमि पर्याप्त है।
- उत्तर प्रदेश का एकमात्र नर्सिंग कॉलेज है, 282 सीट हैं।
- फार्मेसी कॉलेज है।
- छह पैरा मेडिकल कोर्स हैं। 430 सीटे हैं। नया पैरामेडिकल कॉलेज भी प्रारंभ करने की प्रक्रिया चल रही है।
- 1186 बेड का अस्पताल है।
- कुल फैकल्टी- स्वीकृत पद 237, भरी-155, रिक्त-82
- कुल नर्सिंग पोस्ट- स्वीकृत 903, भरी-131, रिक्त-772