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Meerut News: जनता दरबार में मुख्यमंत्री से की दोबारा चकबंदी कराने की मांग
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ग्रामीणों ने भू-माफियाओं पर अवैध कब्जे और अधिकारियों पर मिलीभगत का लगाया आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। थाना क्षेत्र के गांव जलालपुर जोरा के ग्रामीणों ने रविवार को लखनऊ में आयोजित जनता दरबार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र देकर गांव में बंद पड़ी चकबंदी प्रक्रिया दोबारा शुरू कराने की मांग की है।
जनता दरबार में क्षेत्र के गांव जलालपुर जोरा के नरेंद्र, पॉपीन, शिवराज सीताराम, विनोद कुमार, महकार, महेशपाल ने पहुंच कर मुख्यमंत्री को दिए शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से 2023 तक गांव में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन वर्ष 2023 में कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में अधिकारियों ने धारा-6 लागू कर चकबंदी बंद कर दी। इससे भूमि विवाद और अवैध कब्जों की समस्या और गंभीर हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी अधूरी रहने से किसानों की भूमि कई स्थानों पर बंटी हुई है, जिससे खेती करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी और निजी भूमि पर भू-माफिया ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। शिकायत में कहा कि चकबंदी बंद होने के बाद गांव में मारपीट, गोली और विवाद की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ ग्रामीणों द्वारा मेरठ में आत्मदाह का प्रयास किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस संबंध में थाना हस्तिनापुर और मवाना में कई मुकदमे दर्ज हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गांव के लगभग 90 प्रतिशत लोग चकबंदी के पक्ष में हैं।
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मुख्यमंत्री से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, धारा-6 निरस्त कर युद्धस्तर पर चकबंदी दोबारा शुरू कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, अवैध कब्जे हटवाने तथा चकबंदी पूरी होने तक गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। थाना क्षेत्र के गांव जलालपुर जोरा के ग्रामीणों ने रविवार को लखनऊ में आयोजित जनता दरबार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र देकर गांव में बंद पड़ी चकबंदी प्रक्रिया दोबारा शुरू कराने की मांग की है।
जनता दरबार में क्षेत्र के गांव जलालपुर जोरा के नरेंद्र, पॉपीन, शिवराज सीताराम, विनोद कुमार, महकार, महेशपाल ने पहुंच कर मुख्यमंत्री को दिए शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से 2023 तक गांव में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन वर्ष 2023 में कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में अधिकारियों ने धारा-6 लागू कर चकबंदी बंद कर दी। इससे भूमि विवाद और अवैध कब्जों की समस्या और गंभीर हो गई है।
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ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी अधूरी रहने से किसानों की भूमि कई स्थानों पर बंटी हुई है, जिससे खेती करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी और निजी भूमि पर भू-माफिया ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। शिकायत में कहा कि चकबंदी बंद होने के बाद गांव में मारपीट, गोली और विवाद की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ ग्रामीणों द्वारा मेरठ में आत्मदाह का प्रयास किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस संबंध में थाना हस्तिनापुर और मवाना में कई मुकदमे दर्ज हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गांव के लगभग 90 प्रतिशत लोग चकबंदी के पक्ष में हैं।
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मुख्यमंत्री से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, धारा-6 निरस्त कर युद्धस्तर पर चकबंदी दोबारा शुरू कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, अवैध कब्जे हटवाने तथा चकबंदी पूरी होने तक गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की मांग की है।