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रैपिड रेल परियोजना: मुआवजे की मांग को लेकर मोहिद्दीनपुर में धरना शुरू, किसानों ने किया ये एलान

Fri, 21 Aug 2020 01:01 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 21 Aug 2020 01:01 PM IST
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Delhi-Meerut Rapid Rail Project: Demand for compensation has protest started in Mohiuddinpur
मोहिउद्दीनपुर में मकानों-दुकानों को तोड़ने के विरोध में धरने पर बैठे स्थानीय लोग।  - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रैक के लिए हाईवे को साफ करने पहुंची एनसीआरटीसी की टीम का बुधवार को मोहिउद्दीनपुर में लोगों ने विरोध कर दिया था। कहा था कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, मकान या दुकान नहीं तोड़ने देंगे। टीम लोगों को एक सप्ताह का समय देकर लौट गई थी। वहीं बृहस्पतिवार को मोहिउद्दीनपुर में भाकियू के बैनर तले धरना शुरू कर दिया गया।      

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दिल्ली रोड पर रैपिड रेल का एलीवेटिड ट्रैक बनाने में 60 से ज्यादा मकान और दुकान इसकी जद में आएंगे। इसके लिए एनसीआरटीसी, पीडब्ल्यूडी और तहसील की संयुक्त टीम ने प्लान तैयार किया है। तहसील प्रशासन की तरफ से लेखपाल ने नपाई में डिवाइडर से 18 मीटर तक पीडब्ल्यूडी की जमीन बताई है। इसके विरोध में मोहिउद्दीनपुर के स्थानीय निवासी उठ खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, धरने से नहीं उठेंगे। 
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34 परिवार होंगे प्रभावित
तहसील की रिपोर्ट के आधार पर दुकानों के अलावा कई घर भी इसकी जद में आ रहे हैं। यहां टिन शेड, चबूतरे आदि का निर्माण भी किया गया है। ऐसे में बिना मुआवजा दिए लोगों को हटाने का प्रयास किया गया तो विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
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बिना मुआवजा कैसे हटाया जा सकता है
एक तरफ केंद्र सरकार गरीबों के लिए घर बना रही है। वहीं, एनसीआरटीसी बिना मुआवजा दिए जनता पर जुल्म ढहाने की तैयारी में है। - दीपक राणा स्थानीय निवासी
हम काम का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जो लोग सालों से यहां रह रहे हैं, उन्हें बिना मुआवजा कैसे हटाया जा सकता है। - राहुल मित्तल स्थानीय निवासी
हम चार पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। इसकी सूचना हमें नहीं दी गई है। बिना मुआवजा और नोटिस के यह संभव नहीं है। - अजय कुमार स्थानीय निवासी

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प्रशासन देखेगा मामला
ये मामला प्रशासन को देखना है। अतिक्रमण हटने के बाद ही हम यहां काम शुरू कर पाएंगे। - सुधीर शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआरटीसी

जमीन हमारी है
जमीन हमारी है, लेकिन तहसील के अभिलेखों में इसकी चौड़ाई क्या दर्ज है। ये देखने के बाद ही पता चलेगा। सभी निर्णय प्रशासन को लेने हैं। - अरविंद कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी

किसानों की मांग नहीं मानी तो हाईवे पर बांधेंगे पशु
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में अब किसानों का मुआवजे को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है। 20 अगस्त तक का समय खत्म होने के बाद मेरठ के इलाके के किसानों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। बृहस्पतिवार को किसान नेताओं ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा गाजियाबाद जिलाधिकारी के अवकाश से लौटने के बाद अब कोई आश्वासन नहीं चलेगा। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त तक जमीन के मुआवजा का प्रकरण को निपटाने का वादा किया गया था।

सपा नेता पवन गुर्जर का कहना है कि जिलाधिकारी गाजियाबाद ने किसानों की मांगों को लेकर जो आश्वासन दिया था, यदि उन मांगों को अवकाश से लौटने पर पूरा नहीं किया गया तो अब और समय शासन-प्रशासन को नहीं दिया जाएगा। जिस पर किसान तत्काल ही रणनीति बनाकर एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य को पूरी तरह रुकवा कर हाईवे पर अपने पशुओं को बांधकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह सरकार पूरी तरह किसान विरोधी है। इस मौके पर किसान नेता महबूब अली, निशांत भड़ाना, जॉनी अच्छरौंडा, जयचंद भूड़बराल, हाजी जुनैद काशी मौजूद रहे।

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