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चंद्रशेखर से मिले राजेंद्र गौतम, कहा- संविधान की रक्षा के लिए मंत्री पद भी गंवाना मंजूर

Wed, 19 Sep 2018 01:25 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Updated Wed, 19 Sep 2018 01:25 PM IST
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Delhi Government minister Rajendra Gautam reached Saharanpur to meet Chandra Sekhar
चंद्रशेखर - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली की आप सरकार में समाज कल्याण मंत्री राजेन्द्र प्रसाद गौतम बुधवार को छुटमलपुर में भीम आर्मी मुखिया चंद्रशेखर से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि संविधान की रक्षा के लिए उन्हें मंत्री पद भी गंवाना पड़ा तो वे पीछे नहीं हटेंगे।

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समाज कल्याण मंत्री राजेन्द्र प्रसाद गौतम अपने बीस से भी ज्यादा साथियों के साथ चंद्रशेखर से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने करीब आधा घंटे तक चंद्रशेखर से अकेले में मुलाकात की। इसके बाद दोनों ने एकसाथ समर्थकों को संबोधित किया। मंत्री ने कहा कि भाजपा दलित, वंचितों एवं पिछड़ों का उत्पीड़न कर रही है। दलित समाज ने चार हजार सालों तक गुलामी की है। अब भी कुछ लोग संसद के सामने खुलेआम पुलिस की मौजूदगी में बाबा साहेब द्वारा लिखे गए संविधान की प्रति जलाते हैं और सरकार उनका कुछ नहीं करती। भीम आर्मी मुखिया भाई चंद्रशेखर ने दलितों के उत्थान के लिए जो मूवमेंट चलाई है उसके लिए उनका साथ देने के लिए वे हर समय तैयार खड़े हैं। 
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उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ी को संविधान एवं बाबा साहेब को पढ़ना होगा। वर्तमान में यदि दलित समाज का कोई आदमी बडे़ पदों पर बैठा है तो वह बाबा साहेब डा. अंबेडकर की ही देन है। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान को बदला चाहती है किंतु दलित समाज संविधान की रक्षा के लिए किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि मैं समाज के साथ खड़ा हूं चाहे इसके लिए मंत्री पद भी गवाना पडे़। दोपहर को बड़गांव के शब्बीरपुर से प्रधान शिव कुमार भी चंद्रशेखर से मिलने पहुंचे। वे भी चंद्रशेखर के साथ जेल में थे।

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चंद्रशेखर की मौलाना अरशद मदनी से मुलाकात है कई मायनों में खास

भीम आर्मी  के संस्थापक चंद्रशेखर भले ही जेल के बाद ‘रावण’ उपनाम से ‘आजाद’ हो गए, लेकिन वह अभी सियासी दायरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। भाजपा विरोधी नेता उनसे सीधे और गैर राजनीतिक लोगों के जरिए मिल रहे हैं और उनकी 'किंगमेकर' बनने की महत्वाकांक्षा का लोकसभा चुनाव में फायदा उठाना चाहते हैं।   

उनके सामने बड़ी चुनौती यही है कि वे खुद को बुलंदी पर कैसे स्थापित रखें? मंगलवार को उनकी जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी से देवबंद में बीस मिनट की मुलाकात को सियासत से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। क्योंकि यह भावी राजनीति को प्रभावित करने वाली है।सपा के एमएलसी आशु मलिक एक दिन पहले चंद्रशेखर से मिले थे। वे मौलाना अरशद की कृपा से ही अखिलेश मंत्रिमंडल में आए थे। राम मंदिर आंदोलन के नायक कल्याण सिंह की तब सपा में एंट्री के बाद वही मुलायम सिंह यादव और देवबंदी उलेमा के बीच मध्यस्थ बने थे। अब वे सिर्फ एमएलसी हैं और सपा में हाशिए पर लेकिन सहारनपुर से चुनावी दावेदार हैं। इधर जमीयत मौलाना अरशद और मौलाना महमूद मदनी के बीच बंटी है। अरशद सपा तो महमूद कांग्रेस की विचारधारा से प्रेरित हैं।

जेल से छूटकर चंद्रशेखर ने कांग्रेस के पूर्व विधायक इमरान मसूद के लिए हर कुर्बानी देने की बात कही तो आशु की सक्रियता पर कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिए। इनके और इमरान के बीच सियासी प्रतिद्वंद्विता भी है। भले ही कहा जाए कि चंद्रशेखर सिर्फ मौलाना अरशद से आशीर्वाद लेने गए थे लेकिन गैर सियासी भीम आर्मी दलित-मुस्लिम के सहारे भाजपा विरोधी दलों के लिए राजनीति को प्रभावित करने की तैयारी में है। 

एक सशक्त गैर राजनीतिक मंच बनाने की बात भी सामने आ रही है। जमीयत और भीम आर्मी जल्द ही दिल्ली के जंतर मंतर पर अपनी ताकत भी दिखाएंगे। यह मुलाकात इसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है। दो दिन पहले ही चंद्रशेखर से जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद ने मुलाकात की थी और एक-दो दिन में गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी भी मुलाकात कर सकते हैं।

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