Dedicated freight corridor: कंटेनर हब 40 हजार इकाइयों को देगा बड़ा बाजार, दुनिया में छाएंगे खेल उत्पाद
मेरठ से प्रतिवर्ष 70 करोड़ से ज्यादा के उत्पाद विभिन्न राज्यों और विदेश तक भेजे जाते हैं। ब्रास बैंड, आभूषण, कैंची का निर्यात होता है। हर साल मेरठ से 700 करोड़ उत्पाद बाहर भेजे जाते हैं।
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मालवाहक ट्रेनों के लिए तैयार हो रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से मेरठ की 40 हजार औद्योगिक इकाइयों के कारोबार में उछाल आने की संभावनाएं बन गई हैं। अब रेलवे ने नेशनल हाईवे-58 के करीब सकौती रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच को माल ढुलाई के लिए कंटेनर साइडिंग में बदलने का फैसला लिया है। यहां से खेल उत्पाद, आभूषण, ब्रास बैंड, कैंची दुनिया भर में जाती है। फल, सब्जियां, चीनी और कीटनाशक भी देश के विभिन्न राज्यों में जाएंगे।
हर साल मेरठ से 700 करोड़ उत्पाद बाहर भेजे जाते हैं। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए रेलवे ने मेरठ को कंटेनर हब बनाने की तैयारी तेज कर दी है। परतापुर और मोदीनगर में दुबई पोर्ट वर्ल्ड की प्राइवेट कंटेनर साइडिंग चल रही है। यहां सीमेंट, यूरिया, खेल उत्पाद सहित अन्य सामान मालगाड़ियों में चढ़ाया और उतारा जाता है। सकौती में कंटेनर साइडिंग मिलने से चीनी का निर्यात आसानी से हो सकेगा।
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दस दिन में होगा 45 दुकानों का ध्वस्तीकरण
सकौती रेलवे स्टेशन के पास से ही डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का ट्रैक निकल रहा है। यहां इसके लिए 35 मीटर चौड़ी साइडिंग बनाई जाएगी। इसके लिए दस दिन के अंदर 45 दुकानों का ध्वस्तीकरण किया जाएगा।
उद्योगों को मिलेगी रफ्तार
मेरठ अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र को आगे बढ़ाने के दिशा में रेलवे का यह कदम अहम होगा। यहां के उत्पादों की मांग दुनिया भर में है। -सुमनेश अग्रवाल, आईआईए, चेयरमैन
बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
ट्रांसपोर्ट जितना सुविधाजनक होगा विकास की रफ्तार उतनी ही तेज होगी। फ्रेट कॉरिडोर से यहां का बना माल देश भर में जा सकेगा। इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। -राजेंद्र सिंह, उद्यमी