भाजपा के घोषणापत्र में निकाह-हलाला के जिक्र पर देवबंदी उलमा नाराज, कही ये बड़ी बात
भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में देश की मुस्लिम महिलाओं को साधने के लिए घोषणापत्र में निकाह और हलाला पर रोक लगाने का कानून पारित करने का वादा किया है। इसपर उलमा ने ऐतराज जताया है। उलमा का कहना है कि भाजपा जान बूझकर ऐसे मुद्दे उठाकर मुस्लिम महिलाओं के वोट बटोरना चाहती है, लेकिन इसमें कामयाब नहीं मिलेगी।
नानौता में 5 अप्रैल को हुई भाजपा की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को साधने के लिए तीन तलाक का जिक्र किया था। इससे एक कदम और आगे बढ़ते हुए भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं को लुभाने के लिए तीन तलाक के बाद निकाह और हलाला वाले हथियार का इस्तेमाल किया है।
हालांकि भाजपा द्वारा निकाह और हलाला को घोषणा पत्र में शामिल किए जाने को लेकर उलमा और मुस्लिम महिलाओं ने नाराजगी जताई है। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि भाजपा जान बूझकर मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप कर रही है। जबकि उसे पता है कि पूर्व में तीन तलाक के मुद्दे पर पूरे देश में विरोध किया गया था। बावजूद इसके भाजपा लोकसभा चुनाव में मुस्लिम महिलाओं के वोट बटोरने को जबरन शरीयत में दखलंदाजी कर रही है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा हर वो हथकंडा अपना रही है जिससे उसे लाभ मिल सके। तीन तलाक का मुद्दा जबरन उठाया गया और मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप किया गया। अब घोषणा पत्र में निकाह और हलाला को खत्म करने का वादा करके नए मुद्दे को जन्म दिया है। जिसे मुसलमान स्वीकार करने वाले नहीं है।
जामिया इल्हामिया मदरसातुल बनात की प्रबंधक खुर्शीदा खातून का कहना है कि भाजपा अच्छी तरह से जानती है कि देश की मुस्लिम महिलाएं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ मजबूती से खड़ी हुई हैं। क्योंकि बोर्ड जो भी फैसला लेता है वो हमेशा मुसलमानों के हित के लिए होता है। जान बूझकर भाजपा नए नए मुद्दे उठाकर चुनावी लाभ लेना चाहती है।
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