बेटियों का जलवा: मन भायी राजनीति की पढ़ाई, हर विषय में बेटों से आगे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेटियों को अब तबला-सितार नहीं, राजनीति की पढ़ाई पसंद आ रही है। फिजिकल एजुकेशन और समाजशास्त्र में भी छात्राओं का जलवा है। एमए के करीब-करीब सभी विषयों में ही बेटियां बेटों से आगे हैं।
सीसीएसयू के कॉलेजों में एमए, एसएससी और एमकॉम तीनों ही कोर्सों में अधिकांश एडमिशन हो चुके हैं। एमए म्यूजिक की बात करें तो इसमें सबसे कम एडमिशन हुए हैं। दो एडमिशन इस्माईल और आरजी में एमए सितार विषय में हुए हैं। एमए तबला विषय में भी दो छात्राओं ने ही रुचि दिखाई है। वोकल म्यूजिक में सभी कॉलेजों को मिलाकर मात्र 29 एडमिशन हुए हैं।
वहीं, दूसरे विषयों की बात करें तो बेटियों ने बेटों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। सबसे ज्यादा एडमिशन एमए राजनीति शास्त्र में 912 हुए हैं। इनमें लड़कियों की संख्या 650 है। हिंदी में 719 एडमिशन हुए हैं, इनमें 630 छात्राएं हैं। अंग्रेजी में 862 एडमिशन में से 783 छात्राएं हैं। समाजशास्त्र में 756 एडमिशन में से 617 छात्राएं हैं। इकोनोमिक्स में 554 एडमिशन हुए हैं, इनमें 358 छात्राएं हैं। साइकोलॉजी में 64 एडमिशन में से 58 छात्राएं हैं। एमए फिजिकल एजुकेशन में 10 एडमिशन हुए हैं। ये सभी छात्राएं हैं। संस्कृत में भी छात्राओं का जलवा है। 237 एडमिशन में से 206 लड़कियां हैं। उर्दू में 42 एडमिशन हुए हैं। इनमें 39 छात्राएं हैं। भूगोल में 228 एडमिशन में से 138 छात्राओं के हैं। इसके अलावा एमकॉम की बात करें तो कॉलेजों में 1624 एडमिशन हुए हैं। इनमें 1088 छात्राओं के हैं। एमएससी में बॉटनी में 295 में से 259 छात्राएं हैं। केमिस्ट्री में 652 एडमिशन हुए। इनमें 416 लड़कियों के हैं। एमएससी जूलॉजी में 272 में से 226 छात्राओं के एडमिशन हैं।
ऐसे तो कॉलेजों में नहीं मिलेंगे शिक्षक
इस्माईल कॉलेज में संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा सेठ बताती हैं कि सात-आठ साल पहले तक मेरिट से प्रवेश देने पड़ते थे। लेकिन अब लड़कियां पीजी में सितार और तबला की पढ़ाई में रुचि नहीं ले रही हैं। एमए में इस बार सितार व तबला में एक-एक ही प्रवेश है। इंटर तक स्कूलों में संगीत के शिक्षकों की कमी है। इसके कारण संगीत विषय पर ध्यान नहीं है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो आगे संगीत विषय कॉलेजों में खत्म हो जाएगा। जब एमए में एडमिशन नहीं होंगे तो नेट और पीएचडी तो होगी ही नहीं। ऐसे में डिग्री कॉलेजों में शिक्षक कहां से आएंगे। आरजी कॉलेज में संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. अलका शर्मा बताती हैं कि 10-12 साल पहले तक सीटें फुल रहती थीं। लेकिन अब तो ग्राफ गिरता ही जा रहा है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/