फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   dashlakshan parv : meditation of the soul lead to unintelligible religion in the mind

दशलक्षण पर्व : आत्मा का ध्यान करने से मन में अकिंचन धर्म प्रवृत्त होता है

Tue, 01 Sep 2020 01:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 01:51 AM IST
विज्ञापन
dashlakshan parv : meditation of the soul lead to unintelligible religion  in the mind
हस्तिनापुर। जंबूद्वीप में दशलक्षण पर्व के अवसर पर नौवें दिन अकिंचन उत्तम धर्म को सर्वपरिग्रहों से दूर रहने के प्रयास बताया है। मूलरूप से जिसका कुछ नहीं, वह अकिंचन एवं अकिंचन का भाव या कर्म आकिंचन्य कहलाता है।
विज्ञापन

उक्त विचार पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ने जंबूद्वीप में चल रहे दशलक्षण महापर्व के नवें दिन अकिंचन धर्म की विवेचना करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आत्मा का ध्यान करने से मन में अकिंचन धर्म प्रवृत्त होता है। जीव परिग्रहों से मुक्त होने की स्थिति में आ जाता है। ममत्व से रहित होकर रत्नत्रय में प्रवृत्ति करना अकिंचन धर्म का लक्षण है। जिसे प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अवश्य उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अकिंचन धर्म का पालन कर भगवान आदिनाथ से लेकर उनके पुत्र भरत व भरत के पुत्र अर्ककीर्ति आदि 14 लाख इक्ष्वाकुवंशीय राजा लगातार राजपाट को अपने उत्तराधिकारी को सौंपकर दीक्षा धारण करके मोक्ष गए।
विज्ञापन

दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत चल रहे इंद्रध्वज महामंडल विधान अंतर्गत आज नंदीश्वर द्वीप के 52 जिनालयों की पूजा संपन्न की गई। इसी के साथ कुंडलगिरि पर्वत के चारों दिशाओं के चैत्यालय की पूजा संपन्न की गई। इन चैत्यालयों के अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी द्वारा तत्त्वार्थसूत्र की नवम अध्याय का अर्थ सहित वाचन किया गया एवं सरस्वती माता एवं लक्ष्मी माता की महाआराधना सम्पन्न की गई। अकिंचन धर्म के ऊपर जूम एप के माध्यम से डॉ. अनुपम जैन, इंदौर का वक्तव्य हुआ और महाशांतिधारा संपन्न की गईं। शांतिमंत्र का उच्चारण संस्थान के पीठाधीश स्वस्ति रवीन्द्रकीर्ति स्वामी द्वारा संपन्न किया गया। यहां विजय जैन, रश्मि जैन, सुभाषचंद जैन, मंगला जैन साहू, राकेश-सुषमा, कैलाशचंद लखनऊ प्रमुख इन्द्र के रूप में बैठे।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्षमा वीर पुरुष का आभूषण
हस्तिनापुर। दशलक्षण धर्म का प्रारंभ क्षमा से प्रारंभ होकर क्षमा पर ही समापन होता है। यदि आपस में वैर-भाव हो जाए तो उसे 6 माह के अंदर ही हाथ जोड़कर समाप्त कर लीजिए। मनुष्य वैर को स्थान न देकर हमेशा क्षमा को अपनाएं। क्षमा वीर पुरुष के पास होती है। कायर व्यक्ति क्षमा जैसे आभूषण को न ग्रहण कर सकता है न दे सकता है। क्षमा आत्मा का गुण है यह आत्मा का स्वभाव होता है आज वर्तमान में सामाजिक जो भी समस्याएं हैं, एक देश का दूसरे देश से वैर विरोध है, वह सभी हल अहिंसा और क्षमा के द्वारा ढूंढे जा सकते हैं। यह क्षमावाणी पर्व हमें यही संदेश देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed