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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Dabthuwa Farmers Protest Against Consolidation, Use Ragini to Raise Concerns; Set November 28 Deadline

मेरठ: दबथुवा में चकबंदी के खिलाफ किसानों का धरना, रागिनी के जरिए उठाई आवाज; 28 नवंबर तक का अल्टीमेटम

Wed, 28 Oct 2026 03:24 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 28 Oct 2026 03:24 PM IST
सार

मेरठ के सरधना क्षेत्र के दबथुवा गांव में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसानों ने तहसील में धरना दिया। ग्रामीणों ने चकबंदी रिपोर्ट पर सवाल उठाए और रागिनी के जरिए विरोध जताते हुए 28 नवंबर तक चकबंदी निरस्त करने का निर्णय लेने की मांग की।

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विस्तार

मेरठ में सरधना थानाक्षेत्र के दबथुवा गांव में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी, मेरठ ने 12 अक्तूबर 2026 को चकबंदी आयुक्त, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को एक आख्या रिपोर्ट भेजी थी। इसमें गांव के कुल 562 खातों के सापेक्ष 437 व्यक्तियों के हस्ताक्षर और छायाप्रतियां चकबंदी कराने की सहमति के रूप में संलग्न किए जाने का उल्लेख है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि रिपोर्ट में वास्तविक सहखातेदारों की संख्या को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। उनका दावा है कि आधार वर्ष की खतौनी के अनुसार गांव में 562 खातों के सापेक्ष सहखातेदारों और कृषकों की संख्या करीब 3,800 है। ऐसे में 437 व्यक्तियों के हस्ताक्षर को पूरे गांव की सहमति के तौर पर पेश करना भ्रामक है। किसानों ने इस मामले में अधिकारियों से रिपोर्ट की जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की है।
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एसडीएम के नहीं पहुंचने पर जताया रोष
बुधवार को ग्रामीणों ने सरधना तहसील परिसर में धरना दिया। किसानों ने उपजिलाधिकारी के मौके पर नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया और रिपोर्ट से जुड़े सवालों पर प्रशासन को किसानों का पक्ष सुनना चाहिए और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
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धरने में किसानों ने मांग की कि 12 अक्तूबर को भेजी गई आख्या रिपोर्ट का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि कृषकों के हितों की रक्षा हो सके।

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रागिनी के जरिए जताया विरोध
धरने के दौरान किसानों ने अपनी मांगों और नाराजगी को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक लोक शैली रागिनी का सहारा लिया। रागिनी के माध्यम से दबथुवा गांव के किसानों की समस्याओं और चकबंदी प्रक्रिया को लेकर उनके विरोध को सामने रखा गया।

किसानों ने लोकगीतों के जरिए आरोप लगाया कि हजारों सहखातेदारों की राय की अनदेखी कर सीमित लोगों के हस्ताक्षरों के आधार पर पूरे गांव की सहमति दर्शाई जा रही है। इस अनूठे विरोध के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रयास किया।

28 नवंबर तक का अल्टीमेटम, लखनऊ कूच की चेतावनी
भाजपा नेता अनिल दबथुवा के नेतृत्व में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 28 नवंबर 2026 तक चकबंदी निरस्त करने के पक्ष में निर्णय नहीं लिया गया, तो गांव के 90 प्रतिशत खातेदार और सहखातेदार पंचायत के निर्णय के अनुसार अपने परिवारों के साथ ट्रैक्टरों से लखनऊ पहुंचेंगे। वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी समस्याएं और मांगें रखेंगे।

फिलहाल किसानों की मुख्य मांग आख्या रिपोर्ट की जांच, सहमति के आंकड़ों की पड़ताल और चकबंदी प्रक्रिया पर उचित निर्णय लेने की है। मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है।

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