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रो रही मां, पिता गुमसुम, सदमे में दोनों भाई
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रो रही मां, पिता गुमसुम, सदमे में दोनों भाई
मेरठ। रेड कारपेट बैंक्वेट हॉल में विवाह समारोह के दौरान बेटी की हत्या के बाद पूरा परिवार सदमे में है। पिता और भाई गुमसुम हैं तो मां अपनी बेटी की फोटो छाती से लगाए हत्यारे को फांसी दिलाने की मांग कर रही है। मां का कहना है कि बेटी की हत्या करने वाले को फांसी दी जाए। वहीं, पिता के दिल में यही कसक है कि अगर वह शादी में होते तो शायद बेटी जिंदा होती।
मेडिकल क्षेत्र में रहने वाले इस परिवार के सपने ज्यादा बड़े नहीं थे। पिता परचून और किराना के सामान के सेल्समैन हैं। परिवार ने घर में ही एक दुकान खोल रखी है, जिससे थोड़ी-बहुत कमाई हो जाती है। दो बेटे पढ़ाई कर रहे हैं और उनकी इकलौती बहन सीए बनकर माता-पिता का सपना पूरा करना चाहती थी। अब जब वह परिवार के बीच नहीं है तो घर के लोगों की आंखें उसे याद कर नम हो रही हैं। मां का बुरा हाल है, जो रोते हुए बार-बार बेहोश हो रही हैं। पिता भी अकेले में जाकर रोते हैं और फिर आकर पूरे परिवार को संभालने की कोशिश करते हैं। भाइयों ने नम आंखों से कहा कि अब उन्हें राखी कौन बांधेगा। उसका बैग, जूते, पढ़ाई के दौरान स्कूल में मिलीं ट्राफियां देखकर सबका दिल रो रहा है।
बृजघाट पर हुआ अस्थि विसर्जन
सूरजकुंड पर अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने बृहस्पतिवार को बृजघाट पर जाकर अस्थि विसर्जन किया। इसके बाद घर पर हवन हुआ और शाम को फिर से पूरा परिवार दीपदान के लिए बृजघाट रवाना हो गया। घर पर रिश्तेदारों का आना-जाना लगा है और वे परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
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मेरठ। रेड कारपेट बैंक्वेट हॉल में विवाह समारोह के दौरान बेटी की हत्या के बाद पूरा परिवार सदमे में है। पिता और भाई गुमसुम हैं तो मां अपनी बेटी की फोटो छाती से लगाए हत्यारे को फांसी दिलाने की मांग कर रही है। मां का कहना है कि बेटी की हत्या करने वाले को फांसी दी जाए। वहीं, पिता के दिल में यही कसक है कि अगर वह शादी में होते तो शायद बेटी जिंदा होती।
मेडिकल क्षेत्र में रहने वाले इस परिवार के सपने ज्यादा बड़े नहीं थे। पिता परचून और किराना के सामान के सेल्समैन हैं। परिवार ने घर में ही एक दुकान खोल रखी है, जिससे थोड़ी-बहुत कमाई हो जाती है। दो बेटे पढ़ाई कर रहे हैं और उनकी इकलौती बहन सीए बनकर माता-पिता का सपना पूरा करना चाहती थी। अब जब वह परिवार के बीच नहीं है तो घर के लोगों की आंखें उसे याद कर नम हो रही हैं। मां का बुरा हाल है, जो रोते हुए बार-बार बेहोश हो रही हैं। पिता भी अकेले में जाकर रोते हैं और फिर आकर पूरे परिवार को संभालने की कोशिश करते हैं। भाइयों ने नम आंखों से कहा कि अब उन्हें राखी कौन बांधेगा। उसका बैग, जूते, पढ़ाई के दौरान स्कूल में मिलीं ट्राफियां देखकर सबका दिल रो रहा है।
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बृजघाट पर हुआ अस्थि विसर्जन
सूरजकुंड पर अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने बृहस्पतिवार को बृजघाट पर जाकर अस्थि विसर्जन किया। इसके बाद घर पर हवन हुआ और शाम को फिर से पूरा परिवार दीपदान के लिए बृजघाट रवाना हो गया। घर पर रिश्तेदारों का आना-जाना लगा है और वे परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
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