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किसानों की नाराजगी से बढ़ेगा प्रोजेक्टों पर संकट
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किसानों की नाराजगी से बढ़ेगा प्रोजेक्टों पर संकट
मेरठ। किसानों की बढ़ती नाराजगी से शहर के कई प्रोजेक्ट भी आने वाले समय में प्रभावित हो सकते हैं। जाग्रति विहार एक्सटेंशन को लेकर पहले ही मामला उलझा है। आवास विकास परिषद की करोड़ों रुपये की योजना को झटका लग सकता है। यहां पिछले दो महीने से किसान धरनारत हैं। अब लखीमपुर जैसे कांड के बाद ओर भी मुश्किलें बढ़ेंगी।
जाग्रति विहार एक्सटेंशन में प्रधानमंत्री आवास योजना, इनर रिंग रोड, फ्लैट, प्लाट आदि विकसित किए जा रहे हैं। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवंटन प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है। इस स्थान पर अब अन्य कार्य किए जाने हैं। वहीं, गढ़ रोड से हापुड रोड को जोड़ने वाले इनर रिंग रोड का कार्य भी किया जाना है। लेकिन किसान छह प्रतिशत विकसित भूखंड और बढ़ा हुआ प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अब किसानों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण भी यह संभव हो पाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, अर्जित भूमि किसान संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार बिना मांग पूरी न होने पर कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, किसान लगातार दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर के आश्वासन पर रुके हैं।
आंदोलन के लिए किसान तैयार, आदेश का इंतजार
लखीमपुर खीरी कांड ने किसान आंदोलन में नई जान फूंकने का काम किया है। बॉर्डर पर डटे किसानों के अलावा गांव में बैठे किसानों की नजर भी लखीमपुर खीरी पर लगी हुई है। किसानों का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा के आदेश का इंतजार है।
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लखीमपुर कांड के विरोध में सोमवार को कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन में ऐसे कई किसान पहुंचे जो अब से पहले आंदोलन में नहीं आए थे। रोहटा निवासी हरेंद्र, चिंदौड़ी निवासी मनोज ने बताया कि वह तीन कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन में भाग लेने के लिए न तो गाजीपुर बॉर्डर गए और न ही सिवाया टोल प्लाजा। लेकिन लखीमपुर खीरी की घटना ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया है। इसलिए आज वह धरने में आए हैं और आगे भी आंदोलन में भाग लेंगे। दूसरी तरफ किसानों ने आंदोलन को मजबूत करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा का आदेश मिलते ही कूच कर दिया जाएगा।
कलक्ट्रेट में सुबह से शाम तक दौड़ते रहे अफसर
कलक्ट्रेट में सोमवार सुबह 11 बजे से रात सात बजे तक अफरातफरी का माहौल का रहा। पुलिस-प्रशासनिक इधर से उधर अफसर दौड़ते रहे। लखनऊ से आला अधिकारी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से लगातार अपडेट लेते रहे। हंगामे और प्रदर्शन के चलते पुलिस और प्रशासन के अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने में लगे रहे। कई बार नोक-झोंक भी हुई। एक दल के लोग शांत होते तो दूसरी राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारी हंगामा करने लग जाते। जिलाधिकारी के. बालाजी के अवमानना के एक मामले में हाईकोर्ट में जाने के कारण एडीएम सिटी अजय तिवारी दूसरे अधिकारियों के कलक्ट्रेट में ही डटे रहे। दोपहर तीन बजे मामला कुछ शांत हुआ तो कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंच गए प्रदर्शन कर दिया। रात सात कलक्ट्रेट में उन्होंने गिरफ्तारी दी। प्रदर्शन को लेकर सुबह से लेकर रात तक कमिश्नर सुरेंद्र सिंह मेरठ समेत मंडल के दूसरे जिलों से अपडेट लेते रहे।
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मेरठ। किसानों की बढ़ती नाराजगी से शहर के कई प्रोजेक्ट भी आने वाले समय में प्रभावित हो सकते हैं। जाग्रति विहार एक्सटेंशन को लेकर पहले ही मामला उलझा है। आवास विकास परिषद की करोड़ों रुपये की योजना को झटका लग सकता है। यहां पिछले दो महीने से किसान धरनारत हैं। अब लखीमपुर जैसे कांड के बाद ओर भी मुश्किलें बढ़ेंगी।
जाग्रति विहार एक्सटेंशन में प्रधानमंत्री आवास योजना, इनर रिंग रोड, फ्लैट, प्लाट आदि विकसित किए जा रहे हैं। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवंटन प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है। इस स्थान पर अब अन्य कार्य किए जाने हैं। वहीं, गढ़ रोड से हापुड रोड को जोड़ने वाले इनर रिंग रोड का कार्य भी किया जाना है। लेकिन किसान छह प्रतिशत विकसित भूखंड और बढ़ा हुआ प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अब किसानों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण भी यह संभव हो पाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, अर्जित भूमि किसान संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस बार बिना मांग पूरी न होने पर कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, किसान लगातार दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर के आश्वासन पर रुके हैं।
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आंदोलन के लिए किसान तैयार, आदेश का इंतजार
लखीमपुर खीरी कांड ने किसान आंदोलन में नई जान फूंकने का काम किया है। बॉर्डर पर डटे किसानों के अलावा गांव में बैठे किसानों की नजर भी लखीमपुर खीरी पर लगी हुई है। किसानों का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा के आदेश का इंतजार है।
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लखीमपुर कांड के विरोध में सोमवार को कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन में ऐसे कई किसान पहुंचे जो अब से पहले आंदोलन में नहीं आए थे। रोहटा निवासी हरेंद्र, चिंदौड़ी निवासी मनोज ने बताया कि वह तीन कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन में भाग लेने के लिए न तो गाजीपुर बॉर्डर गए और न ही सिवाया टोल प्लाजा। लेकिन लखीमपुर खीरी की घटना ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया है। इसलिए आज वह धरने में आए हैं और आगे भी आंदोलन में भाग लेंगे। दूसरी तरफ किसानों ने आंदोलन को मजबूत करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा का आदेश मिलते ही कूच कर दिया जाएगा।
कलक्ट्रेट में सुबह से शाम तक दौड़ते रहे अफसर
कलक्ट्रेट में सोमवार सुबह 11 बजे से रात सात बजे तक अफरातफरी का माहौल का रहा। पुलिस-प्रशासनिक इधर से उधर अफसर दौड़ते रहे। लखनऊ से आला अधिकारी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से लगातार अपडेट लेते रहे। हंगामे और प्रदर्शन के चलते पुलिस और प्रशासन के अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने में लगे रहे। कई बार नोक-झोंक भी हुई। एक दल के लोग शांत होते तो दूसरी राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारी हंगामा करने लग जाते। जिलाधिकारी के. बालाजी के अवमानना के एक मामले में हाईकोर्ट में जाने के कारण एडीएम सिटी अजय तिवारी दूसरे अधिकारियों के कलक्ट्रेट में ही डटे रहे। दोपहर तीन बजे मामला कुछ शांत हुआ तो कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंच गए प्रदर्शन कर दिया। रात सात कलक्ट्रेट में उन्होंने गिरफ्तारी दी। प्रदर्शन को लेकर सुबह से लेकर रात तक कमिश्नर सुरेंद्र सिंह मेरठ समेत मंडल के दूसरे जिलों से अपडेट लेते रहे।