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तकनीकी शिक्षा पर संकट: मेरठ में कंप्यूटर साइंस व सिविल समेत आठ इंजीनियरिंग ब्रांच बंद

Sun, 12 Jul 2026 02:56 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2026 02:56 AM IST
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Crisis in technical education: Eight engineering branches, including Computer Science and Civil, shut down in Meerut.
मेरठ। जिले में तकनीकी शिक्षा का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इंजीनियरिंग कॉलेजों में कंप्यूटर साइंस, सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कुल आठ इंजीनियरिंग ब्रांच बंद कर दी गई हैं। प्रवेश में लगातार गिरावट और छात्रों की घटती रुचि के चलते कॉलेजों को यह कदम उठाना पड़ा है।
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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अनुमोदन के अनुसार मेरठ में तीन सिविल इंजीनियरिंग, दो कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, दो मैकेनिकल इंजीनियरिंग और एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग शाखा इस सत्र से संचालित नहीं होंगी। वहीं गाजियाबाद में छह और सहारनपुर में एक इंजीनियरिंग शाखा बंद की गई है।
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कॉलेजों की संख्या भी घटी
एआईसीटीई के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में मेरठ में 62 तकनीकी कॉलेज अनुमोदित थे, जो 2026-27 में घटकर 52 रह गए हैं। मैनेजमेंट पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कॉलेजों की संख्या 38 से घटकर 33 और इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 38 से 35 हो गई है। इनमें कई संस्थान ऐसे भी हैं, जहां इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट दोनों पाठ्यक्रम संचालित होते हैं।
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नई तकनीक से तालमेल नहीं बैठा सके संस्थान
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रवेश में कमी ही इसकी वजह नहीं है। उद्योगों की मांग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी नई तकनीकों की ओर बढ़ रही है। जिन संस्थानों ने समय के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम, प्रयोगशालाओं और उद्योगों से जुड़ाव को मजबूत नहीं किया, वहां छात्रों का रुझान लगातार घटा है।
सर छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज के आईटी शिक्षक प्रवीण पंवार का कहना है कि आने वाले समय में वही संस्थान टिक पाएंगे, जो आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ कौशल आधारित शिक्षा और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर देंगे।

आने वाले वर्षों में बढ़ सकती हैं चुनौतियां
शहर के कई इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज पहले से ही सीटें भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। फिलहाल कुछ संस्थानों ने न तो अपनी शाखाएं सरेंडर की हैं न ही कॉलेज बंद करने का फैसला लिया है।
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