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यूपी: शस्त्र लाइसेंस के लिए रंगदारी मांगने के अधिकांश आरोप निकल रहे फर्जी

Sun, 23 Dec 2018 01:21 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 23 Dec 2018 01:21 PM IST
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UP: Most of the allegations of getting extortion for arms license are fake
हथियार
पश्चिमी यूपी में शस्त्र लाइसेंस के लिए रंगदारी मांगने के फर्जी केसों का रोग लगातार बढ़ता जा रहा है। जान का खतरा बताकर गनर मांगा जाता है तो ऐसे अधिकांश मामलों में साक्ष्य न मिलने पर या तो फाइनल रिपोर्ट लग रही है या जिनमें चार्जशीट गई उनमें आपसी विवाद सामने आए हैं।
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पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार एक जनवरी 2018 से 22 दिसंबर तक जिले में रंगदारी मांगने के 40 मामले दर्ज हुए। ऐसे मामलों की विवेचना के साथ एलआईयू जांच अलग से हुई। इनमें 11 मुकदमों में कोई साक्ष्य न मिलने पर फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी गई। 19 मामलों में चार्जशीट लगी। 10 मामलों की विवेचना में भी विवेचक को रंगदारी के साक्ष्य नहीं मिले हैं। जिनमें भी जल्द ही एफआर लगा दी जाएगी। 
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रंगदारी मांगने के ज्यादातर आरोप फर्जी, कई में रंजिशन मामले

गुदड़ी के सुल्तान ने दुकान पर हमला बोलने, 50 हजार की रंगदारी मांगने, तमंचे से फायर करने का केस दर्ज कराया। एक आरोपी नामजद किया।
ब्रह्मपुरी निवासी संजीव वर्मा ने खैरनगर में दुकान में पत्र डालकर 50 लाख की रंगदारी मांगना बताया।
लिसाड़ीगेट निवासी अब्दुल हकीम ने केस कराया कि कॉल कर उससे 30 हजार की रंगदारी मांगी, घर में घुसकर हमला कर हत्या की धमकी दी।
लिसाड़ीगेट की मुस्कान ने घर में घुसकर फायरिंग, तोड़फोड़ करने, डेढ़ लाख की रंगदारी मांगने का केस दर्ज कराया।
शकूर नगर निवासी नदीम ने दो लाख रुपये की रंगदारी मांगने का केस दर्ज कराया था।
दौराला निवासी मुकुट सिंह ने 50 हजार की रंगदारी मांगने का केस दो आरोपियों पर दर्ज कराया। 
काजमाबाद गून परतापुर निवासी राजीव कुमार ने 70 हजार रुपये की रंगदारी मांगने, व्हाट्स एप पर धमकी भेजने का केस कराया।
छुर्र निवासी रविंद्र कुमार ने पांच लाख की रंगदारी मांगने का केस दर्ज कराया था।
खुसावली निवासी भानू प्रताप ने दस लाख की रंगदारी का केस दर्ज कराया।
खरखौदा निवासी रोहित ने 12 लाख की रंगदारी का नामजद  केस दर्ज कराया।
शाहजहांपुर किठौर के मतलूब खान ने 30 हजार की लूट, 
धमकी देने और एक लाख की रंगदारी मांगने का केस दर्ज कराया था।

सब शस्त्र लाइसेंस का खेल
पुलिस और एलआईयू की जांच में सामने आया कि रंगदारी के अधिकांश मामले ऐसे दर्ज कराए गए, जिनमें शस्त्र लाइसेंस की जरूरत है। इन केसों में एलआईयू की जांच में ऐसे लोग भी सामने आए, जिन्हें बताया गया कि यदि वह रंगदारी मांगने या जान का खतरा जताकर केस दर्ज कराएंगे तो उन्हें शस्त्र लाइसेंस आसानी से मिल सकता है। लेकिन जांच इन्हीं लोगों पर उल्टी पड़ने लगी। जांच में साफ हुआ कि शस्त्र लाइसेंस के लिए ही यह साजिश की गई। 

हो रही निष्पक्ष जांच
रंगदारी के मुकदमों में साक्ष्य के आधार पर ही जांच होती हैं। जिन मामलों में साक्ष्य नहीं मिले, फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। कुछ मामलों में मामला आपसी विवाद सामने आया। निष्पक्ष जांच की जा रही है। -अखिलेश कुमार, एसएसपी
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