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हत्यारे चाचा पर दोष सिद्ध, छुरे से भतीजी पर किए थे 18 वार, मंजर देख कांप गई थी लोगों की रूह

Fri, 06 Dec 2019 01:39 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 06 Dec 2019 01:39 AM IST
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The court has convicted the accused uncle in girl murder case at Baghpat district
आरोपी पर दोष सिद्ध - फोटो : अमर उजाला

बुरी नीयत रखने का विरोध करने पर भतीजी की गर्दन काटकर निर्मम हत्या करने के आरोपी चाचा पर अदालत ने दोष सिद्ध किया। यह चर्चित मामला बागपत के खेकड़ा नगर का है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट के न्यायाधीश आबिद शमीम सजा के प्रश्न पर नौ दिसंबर को सुनवाई करेंगे।

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एडीजीसी फौजदारी अनुज ढाका ने बताया कि खेकड़ा निवासी फारुख ने तीन मार्च 2018 को थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। वादी का कहना था कि पड़ोसी पप्पू के घर से बचाओ बचाओ की आवाज सुनकर घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। कुछ देर बाद पप्पू का भाई हारूण दरवाजा खोलकर बाहर निकला तो उसके हाथ में छुरी थी और कपड़ों पर खून लगा था। घर के अंदर पप्पू की बेटी सोनी (17)  की गर्दन कटी लाश पड़ी थी।
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पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। तीन मार्च 2019 को आरोप तय हुए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाह पेश किए। गुरुवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट के न्यायाधीश आबिद शमीम ने आरोपी हारूण पर दोष सिद्ध किया। एडीजीसी ने बताया कि सजा के प्रश्न पर नौ दिसंबर को सुनवाई होगी।
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चाचा ने दिए थे छुरी के 18 घाव

मुकदमे के वादी का कहना है कि अभियुक्त अपनी भतीजी सोनी पर बुरी नीयत रखता था। वारदात के दिन सोनी के अब्बू और अम्मी घर के बाहर गए हुए थे। वह घर पर अकेली थी। चाचा घर पर पहुंचा और बुरी नीयत डाली। सोनी ने विरोध किया तो अभियुक्त ने छुरा दिखाया। लेकिन विरोध करने पर किशोरी की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। भीड़ की रूह कांप गई थी।

पसीजा पड़ोसी का दिल, बेटी मानकर की पैरवी
सोनी की सनसनीखेज हत्या में अपनों के धोखे के साथ पड़ोसी की इंसानियत भी दिखती है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र सिंह धामा ने बताया कि जब सोनी की उम्र दो साल थी, तब उसकी मां का इंतकाल हो गया था। पिता मानसिक तौर पर परेशान रहने लगा। आरोपी चाचा और परिवार के अन्य लोगों ने सोनी का पालन पोषण किया। लेकिन जब सोनी 17 साल की हुई तो चाचा की नीयत बिगड़ गई। विरोध करने पर उसकी हत्या हुई। निर्मम हत्या की पैरवी करने के लिए परिवार से कोई सामने नहीं आया। ऐसे में पड़ोसी फारुख ने इंसानियत दिखाई। अदालत की चौखट तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी।

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