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टाइगर की जांच में आंसू बहाने वालों को लापरवाही की छूट
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 13 Sep 2015 02:41 AM IST
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मेडिकल कैंपस में दंगा नियंत्रण रिहर्सल के दौरान आंसू गैस के गोले छोड़ने में पुलिस की लापरवाही का मामला शासन तक गूंज गया। एसपी सिटी को पांच दिन में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया, लेकिन 24 घंटे में जांच पूरी कर आरोपी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी गयी।
एडीजी (कानून व्यवस्था) चौधरी दलजीत सिंह के निर्देश पर जिला पंचायत चुनाव से पहले सभी थानों में दंगा नियंत्रण रिहर्सल करने के निर्देश दिए थे। थानेदारों को इसमें पुलिस के साथ रिहर्सल करानी थी लेकिन जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों को सौंप दी गयी। अनुभव कम होने के कारण पुलिसकर्मियों ने भी वहीं किया, जिसका अधिकारियों को डर था। आंसू गैस के गोले छात्रावास के पास छोड़े और कई छात्राएं बेहोश हुई। मामला शासन तक गूंजा तो हड़कंप मचा।
एसएसपी ने लापरवाह पुलिसकर्मियों की जांच एसपी सिटी को सौंप दी। एसपी सिटी ने फौरी तौर पर 24 घंटे में जांच पूरी की, जिसमें सभी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे डाली। सवाल है कि क्या इस मामले में किसी की कोई लापरवाही नहीं हुई।
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थानों में कुछ ऐसे हुई रिहर्सल
मेडिकल थाने के अलावा भी कई थानों में रिहर्सल ऐसे हुई। थानेदारों ने गैस के गोले छोड़े, जिसमें उनकी हालत खराब हो गई। मेडिकल का हल्ला मचा तो थानेदारों ने मामला दबा लिया। शनिवार को 5 थानों की शिकायत एसएसपी के पास पहुंची, तब पता चला।
छोड़ना था 65 डिग्री, छोड़ दिया 45 पर
मेरठ। एक सप्ताह में मेडिकल थाने के पुलिसकर्मी प्रशिक्षण को भूल गए। उन्हें आंसू गैस का गोला 65 डिग्री पर छोड़ना था, लेकिन उन्होंने 45 पर ही छोड़ दिया। गोले सीधे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में जा गिरे और 47 छात्राएं बेहोश हो गईं। पुलिस का दंगा रिहर्सल छात्राओं पर भारी पड़ गया।
चार सितंबर को मेरठ पुलिस लाइन के मैदान पर एसएसपी दिनेश चंद दूबे, एसपी सिटी ओमप्रकाश, एसपी देहात कैप्टन एमएम बेग, एसपी क्राइम टीएस सिंह, सभी सीओ और थाना प्रभारियों ने दंगा रिहर्सल किया था। इसमें आंसू गैस और टियर गैस के गोले भी छोड़े गए। टीएनराइट गन से सेल और ग्रेनेड भी फेंके गए। पुलिसकर्मियों को भी इसका प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक सत्यप्रकाश शर्मा का कहना है कि जब आंसू और टियर गैस के गोले नजदीक फेंकने हों तो हाथ का प्रयोग किया जाता है।
अधिक दूरी के लिए सेल और ग्रेनेड या गोलों को टीराइटगन से छोड़ा जाता है। पुलिस को निर्देश दिए जाते हैं कि वह 60 या 65 डिग्री के कोण पर ही गोले छोड़ें। 60 या 65 डिग्री कोण पर छोड़ा गया गोला 70 मीटर तक की दूरी तय करता है। सबसे ज्यादा गोला 45 डिग्री से छोड़ने पर अधिक दूर पहुंचता है। मेडिकल पुलिस द्वारा दंगा रिहर्सल के दौरान जिस तरह से गोले गर्ल्स हॉस्टल में गिरे उसमें पुलिस अफसर यही मान रहें कि मैदान की दूरी और हॉस्टल को देखते हुए यही लगा रहा है कि मॉक ड्रिल के दौरान 45 डिग्री पर गोले छोड़े गए, जो हॉस्टल में जा गिरे।
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एडीजी (कानून व्यवस्था) चौधरी दलजीत सिंह के निर्देश पर जिला पंचायत चुनाव से पहले सभी थानों में दंगा नियंत्रण रिहर्सल करने के निर्देश दिए थे। थानेदारों को इसमें पुलिस के साथ रिहर्सल करानी थी लेकिन जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों को सौंप दी गयी। अनुभव कम होने के कारण पुलिसकर्मियों ने भी वहीं किया, जिसका अधिकारियों को डर था। आंसू गैस के गोले छात्रावास के पास छोड़े और कई छात्राएं बेहोश हुई। मामला शासन तक गूंजा तो हड़कंप मचा।
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एसएसपी ने लापरवाह पुलिसकर्मियों की जांच एसपी सिटी को सौंप दी। एसपी सिटी ने फौरी तौर पर 24 घंटे में जांच पूरी की, जिसमें सभी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे डाली। सवाल है कि क्या इस मामले में किसी की कोई लापरवाही नहीं हुई।
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थानों में कुछ ऐसे हुई रिहर्सल
मेडिकल थाने के अलावा भी कई थानों में रिहर्सल ऐसे हुई। थानेदारों ने गैस के गोले छोड़े, जिसमें उनकी हालत खराब हो गई। मेडिकल का हल्ला मचा तो थानेदारों ने मामला दबा लिया। शनिवार को 5 थानों की शिकायत एसएसपी के पास पहुंची, तब पता चला।
छोड़ना था 65 डिग्री, छोड़ दिया 45 पर
मेरठ। एक सप्ताह में मेडिकल थाने के पुलिसकर्मी प्रशिक्षण को भूल गए। उन्हें आंसू गैस का गोला 65 डिग्री पर छोड़ना था, लेकिन उन्होंने 45 पर ही छोड़ दिया। गोले सीधे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में जा गिरे और 47 छात्राएं बेहोश हो गईं। पुलिस का दंगा रिहर्सल छात्राओं पर भारी पड़ गया।
चार सितंबर को मेरठ पुलिस लाइन के मैदान पर एसएसपी दिनेश चंद दूबे, एसपी सिटी ओमप्रकाश, एसपी देहात कैप्टन एमएम बेग, एसपी क्राइम टीएस सिंह, सभी सीओ और थाना प्रभारियों ने दंगा रिहर्सल किया था। इसमें आंसू गैस और टियर गैस के गोले भी छोड़े गए। टीएनराइट गन से सेल और ग्रेनेड भी फेंके गए। पुलिसकर्मियों को भी इसका प्रशिक्षण दिया गया। पुलिस लाइन के प्रतिसार निरीक्षक सत्यप्रकाश शर्मा का कहना है कि जब आंसू और टियर गैस के गोले नजदीक फेंकने हों तो हाथ का प्रयोग किया जाता है।
अधिक दूरी के लिए सेल और ग्रेनेड या गोलों को टीराइटगन से छोड़ा जाता है। पुलिस को निर्देश दिए जाते हैं कि वह 60 या 65 डिग्री के कोण पर ही गोले छोड़ें। 60 या 65 डिग्री कोण पर छोड़ा गया गोला 70 मीटर तक की दूरी तय करता है। सबसे ज्यादा गोला 45 डिग्री से छोड़ने पर अधिक दूर पहुंचता है। मेडिकल पुलिस द्वारा दंगा रिहर्सल के दौरान जिस तरह से गोले गर्ल्स हॉस्टल में गिरे उसमें पुलिस अफसर यही मान रहें कि मैदान की दूरी और हॉस्टल को देखते हुए यही लगा रहा है कि मॉक ड्रिल के दौरान 45 डिग्री पर गोले छोड़े गए, जो हॉस्टल में जा गिरे।