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शहर में पुलिस की फर्जी जिप्सी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2016 02:19 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में घूम रही पुलिस लिखी इस लालबत्ती जिप्सी से सावधान रहें। इसका मेरठ पुलिस से कोई लेना-देना नहीं है। एसएसपी को इस फर्जी जिप्सी की फोटो उपलब्ध कराने वालों ने अवैध वसूली और रेकी करने के आरोप लगाए हैं। इस पर एसएसपी ने ट्रैफिक पुलिस को इसकी तलाश कर सीज करने के निर्देश दिये। हालांकि, देर शाम तक पुलिस इस फर्जी जिप्सी का पता नहीं लगा सकी थी।
लालकुर्ती इलाके में छीपी टैंक के पास बुधवार को पुलिस की यह फर्जी जिप्सी देखी गई।
लोगों ने इस गाड़ी की फोटो लेने के साथ वीडियो क्लिप भी बना ली। इसकी सूजना पर कई मीडियाकर्मी छीपी टैंक पर पहुंच गए। लेकिन, तब तक जिप्सी वहां से निकल गई। लोगों ने बताया कि जिप्सी में सवार लोग खुद को पुलिस के अफसर बता रहे थे। करीब एक सप्ताह से यह शहर में घूम रही है। इसकी शिकायत एसएसपी जे. रविंदर गौड़ तक पहुंची तो उन्होंने गाड़ी पर लिखी नंबर प्लेट की जांच कराई। इसमें पता चला कि यह गाड़ी पुलिस की नहीं है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब यह जिप्सी पुलिस की नही हैं तो इस पर सवार लोग शहर में किस इरादे से घूम रहे हैं। कहीं समूचे शहर की रेकी के लिये तो इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। एसएसपी ने पुलिस को इन बिंदुओं पर जांच के साथ जिप्सी की तलाश में लगाया है। उन्होंने इस जिप्सी को पकड़कर सीज करने और इसे चलाने वालों के खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेजने के निर्देश दिये हैं।
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सवाल तो लाजिमी हैं
लोगों का आरोप है कि यह फर्जी जिप्सी सप्ताह भर से शहर में घूम रही है। ऐसे में पुलिस से उसका कोई ताल्लुक न होने से सवाल उठना लाजिमी है। इरादों पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि फर्जी तरीके से लालबत्ती लगी पुलिस की गाड़ियों से पहले भी कई वारदातें हो चुकी हैं। दो माह पहले ही बिजली बंबा बाईपास पर बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लूटपाट कर ली थी। आरटीओ या सेल्स टैक्स अधिकारी बताकर लूट की वारदातें अंजाम देने की बातें अक्सर सामने आती रहती हैं।
नंबर भी सर्च नहीं हुआ
पुलिस ने जिप्सी पर लिखे नंबर को सर्च कराया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इस पर पुलिस का शक और गहराया। एसएसपी के निर्देश पर ट्रैफिक पुलिस देर शाम तक हाथ-पांव मारती रही, लेकिन असफलता ही हाथ लगी।
पंजाब में हुई थी चूक
पंजाब के पठानकोट में आतंकी हमले में भी पुलिस से चूक हुई थी। आतंकियों ने पुलिस लिखी लालबत्ती गाड़ी का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी किया था कि पुलिस के स्टिकर लगी गाड़ियों की भी चेकिंग की जाए। कुछ दिनों तक निर्देशों का पालन हुआ, लेकिन उसके बाद यूपी पुलिस फिर उसी रवैये पर है।
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लालकुर्ती इलाके में छीपी टैंक के पास बुधवार को पुलिस की यह फर्जी जिप्सी देखी गई।
लोगों ने इस गाड़ी की फोटो लेने के साथ वीडियो क्लिप भी बना ली। इसकी सूजना पर कई मीडियाकर्मी छीपी टैंक पर पहुंच गए। लेकिन, तब तक जिप्सी वहां से निकल गई। लोगों ने बताया कि जिप्सी में सवार लोग खुद को पुलिस के अफसर बता रहे थे। करीब एक सप्ताह से यह शहर में घूम रही है। इसकी शिकायत एसएसपी जे. रविंदर गौड़ तक पहुंची तो उन्होंने गाड़ी पर लिखी नंबर प्लेट की जांच कराई। इसमें पता चला कि यह गाड़ी पुलिस की नहीं है।
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ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब यह जिप्सी पुलिस की नही हैं तो इस पर सवार लोग शहर में किस इरादे से घूम रहे हैं। कहीं समूचे शहर की रेकी के लिये तो इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। एसएसपी ने पुलिस को इन बिंदुओं पर जांच के साथ जिप्सी की तलाश में लगाया है। उन्होंने इस जिप्सी को पकड़कर सीज करने और इसे चलाने वालों के खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेजने के निर्देश दिये हैं।
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सवाल तो लाजिमी हैं
लोगों का आरोप है कि यह फर्जी जिप्सी सप्ताह भर से शहर में घूम रही है। ऐसे में पुलिस से उसका कोई ताल्लुक न होने से सवाल उठना लाजिमी है। इरादों पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि फर्जी तरीके से लालबत्ती लगी पुलिस की गाड़ियों से पहले भी कई वारदातें हो चुकी हैं। दो माह पहले ही बिजली बंबा बाईपास पर बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लूटपाट कर ली थी। आरटीओ या सेल्स टैक्स अधिकारी बताकर लूट की वारदातें अंजाम देने की बातें अक्सर सामने आती रहती हैं।
नंबर भी सर्च नहीं हुआ
पुलिस ने जिप्सी पर लिखे नंबर को सर्च कराया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इस पर पुलिस का शक और गहराया। एसएसपी के निर्देश पर ट्रैफिक पुलिस देर शाम तक हाथ-पांव मारती रही, लेकिन असफलता ही हाथ लगी।
पंजाब में हुई थी चूक
पंजाब के पठानकोट में आतंकी हमले में भी पुलिस से चूक हुई थी। आतंकियों ने पुलिस लिखी लालबत्ती गाड़ी का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी किया था कि पुलिस के स्टिकर लगी गाड़ियों की भी चेकिंग की जाए। कुछ दिनों तक निर्देशों का पालन हुआ, लेकिन उसके बाद यूपी पुलिस फिर उसी रवैये पर है।