खुलासा : मुंगेरी पार्ट्स, मेरठी औजार और खतरनाक पिस्टल तैयार
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जरायम की दुनिया में पिस्टल बदमाशों का पसंदीदा हथियार बन चुका है। अब इस खतरनाक हथियार को मेरठ में बनाया जाने लगा है। अवैध हथियार बनाने वाले सौदागर पिस्टल के मेन पार्ट्स मुंगेर से खरीद कर लाते हैं और मेरठ में इसे अंतिम रूप दिया जाता है। पिस्टल बनाने के इस मैकेनिज्म पर पुलिस अफसर भी हैरान हैं। चूंकि मेरठ समेत पूरे वेस्ट यूपी में अभी तक एक से बढ़कर एक मारक क्षमता के तमंचे तो बनाए ही जा रहे थे पर अब पिस्टल का यह कारोबार यहां नए रंग रूप में फलने फूलने से पुलिस अधिकारी भी परेशान हैं।
लिसाड़ीगेट के मजीदनगर में पिस्टल बनाने की फैक्ट्री पकड़ने का मामला आला पुलिस अफसरों तक पहुंच गया है। तमंचे के बाद अब मेरठ मेें पिस्टल बनने लगी है, इसको लेकर अधिकारी गंभीर है। जेल भेजे जा चुके आरोपी यूसुफ ने बताया कि वह मुंगेर से पार्ट्स खरीदकर लाते थे। उन्हेें जोड़कर शमशाद के घर पर पिस्टल तैयार करते थे। मुंगेर से पिस्टल लाने में परेशानी होती थी, लेकिन पुर्जे आसानी से आ जाते। अवैध हथियार बनाने सौदागरों की मुंगेर में अच्छी सेटिंग है। सौदागरों का नेटवर्क कहां तक फैला है, इसकी जांच पड़ताल करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने अलग से टीम बनाई है।
ये पुर्जे आते हैं मुंगेर से
पुलिस के मुताबिक यूसुफ ने बताया कि मुंगेर से फायरिंग पिन, मैगजीन, ट्रिगर, होलनुमा पत्ती व छोटे छोटे पार्ट्स लाते हैं। जबकि अन्य पार्ट्स बैरल, पाइप बोल्ट, ठोस चकोर लोहा, रेगमार, छोटे गोल टुकड़े व अन्य सामान मेरठ से उपलब्ध होने की बात बताई। पुलिस ने पिस्टल की फैक्ट्री से सामान की लिस्ट भी बरामद की थी।
कारीगर भाडे़ पर मंगवाए जाते?
पार्ट्स को जोड़कर पिस्टल तैयार करने की ट्रेनिंग भी मुंगेर के कारीगर देते हैं। अवैध हथियारों के सौदागर भाड़े पर मुंगेर से कारीगरों को मंगवाते थे। शुरूआत में एक्सपर्ट कारीगर ही पार्ट्स जोड़कर पिस्टल बनाते थे। लेकिन बाद में उन्होंने कई लोगों को इसके बारे में सिखाया।
कई जगहों पर बनती पिस्टल?
मजीदनगर, लिसाड़ीगेट में शमशाद के मकान में पिस्टल बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ होने पर पुलिस ने इस मामले की गंभीरता से जांच पड़ताल की। जेल जाने से पहले आरोपी यूसुफ ने बताया कि लिसाड़ीगेट समेत कई जगहों पर मुंगेर से पार्ट्स लाकर पिस्टल बनाई जाती है।
वेस्ट यूपी के जिलों में डिमांड बढ़ी?
पहले अक्सर लोग तमंचा खरीदते थे। लेकिन अब पिस्टल का क्रेज बढ़ा है। पिस्टल खरीदने वालों की डिमांड ज्यादा हो गई है। 18 से 22 हजार रुपये में आसानी से पिस्टल मिलती है। देहात के अधिकांश गांवों में इन लोगों का बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है, जोकि पिस्टल बिकवाते हैं।
विदेशी हथियार बताकर बेचते?
मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, नोएडा समेत वेस्ट के अधिकांश जिलों में लोकल पिस्टल को विदेशी बताकर बेचा जाता है। इटली, मुंगेर समेत कई ब्रांडों के नाम की इन पिस्टलों पर मुहर लगती है। विदेशी के नाम पर पिस्टल के अच्छे दाम मिल जाते थे।
ऐसे बना लेते थे पिस्टल?
पुलिस के मुताबिक तमंचे बनाने वाले अधिकांश कारीगर ही पिस्टल बनाते है। जो लोग तमंचे बनाकर सप्लाई करते है, पुलिस भी उन्हीं को तलाश रही है। पुलिस का दावा कि पिस्टल बनाने वाले कारीगरों से ट्रेनिंग लेकर ही यह कारीगर एक्सपर्ट हुए है। ऐसे एक दर्जन से अधिक लोगों को पुलिस जेल भेज चुकी है।