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जमानत मिली, सलाखों से आजाद हुए मुखिया गुर्जर
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Mon, 07 Dec 2015 01:36 AM IST
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मुखिया गुर्जर मामले में पुलिस प्रशासन की कार्रवाई ने उसकी पूरी तरह किरकिरी करा दी। पूरी कार्रवाई को लेकर आम जनता के मस्तिष्क में उठे सवालों के बीच जिस तरह मुखिया गुर्जर की रिहाई हुई है, उससे भाजपा जहां फ्रंट फुट पर आकर खेलती नजर आ रही है, वहीं प्रशासन पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रहा है।
ग्राम पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम कैलीरामपुर में भाजपा नेता मुखिया गुर्जर को प्रधान प्रत्याशी और कैबिनेट मंत्री के करीबी वेदपाल उर्फ बेदी की शिकायत पर शांति भंग में गिरफ्तार किया गया था। तभी से भाजपा ने पुलिस प्रशासन की पूरी कार्रवाई पर सवाल उठना शुरू कर दिया था। डीएम और एसएसपी भले ही किसी दबाव में कार्रवाई न करने की बात करते रहे हों, लेकिन मुखिया को सीधे जेल भेजना, जमानतियों का सत्यापन कराने के नाम पर जमानत को टाला जाना और उसके बाद मुखिया गुर्जर पर अगले दिन पीठासीन अधिकारी और वेदपाल उर्फ बेदी की तरफ से दर्ज मुकदमे कहीं न कहीं सवाल खड़े करते हैं।
इस तमाम कार्रवाई के बीच दो दिसंबर को जब भाजपाइयों ने धरना देते हुए कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया तो डीएम और एसएसपी ने पूरे तेवर में उनसे बात की और मुखिया गुर्जर को माफिया करार दिया। इसके पलटवार में प्रांतीय नेतृत्व से मिली हरी झंडी के बाद भाजपा ने पांच दिसंबर को मोर्चा खोला तो पहले ही दिन पुलिस प्रशासन बैकफुट पर आ गया।
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एक तरफ जहां 151 की जमानत का परवाना तैयार हो गया, तो दूसरी तरफ मुखिया गुर्जर के खिलाफ दर्ज धारा 144 के उल्लंघन और सरकारी काम में बाधा, वेदपाल उर्फ बेदी की तरफ से दर्ज जानलेवा हमले के मुकदमे वारंट तामील कराने आए दरोगा को वापस करा दिया। शाम तक तीसरे चरण के मतदान में उलझे अधिकारियों ने मतदान के बाद ताजा हालात पर मंथन किया और मुखिया गुर्जर को रिहा करने का निर्णय लिया। इसके बाद देर रात जेल में जमानत का परवाना पहुंचा और रविवार सुबह साढे़ छह बजे ही मुखिया गुर्जर रिहा हो गए। यह बात अलग है कि एसडीएम मवाना ने जमानत में 13 दिसंबर तक मेरठ में न आने की शर्त लगाई है।
सुबह जब मुखिया गुर्जर जेल से बाहर आये तो हस्तिनापुर के पूर्व विधायक गोपाल काली, जिला पंचायत सदस्य रोहताश पहलवान के साथ सैकड़ों समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए उनका स्वागत किया और जुलूस के रूप में उन्हें ले गए।
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ग्राम पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम कैलीरामपुर में भाजपा नेता मुखिया गुर्जर को प्रधान प्रत्याशी और कैबिनेट मंत्री के करीबी वेदपाल उर्फ बेदी की शिकायत पर शांति भंग में गिरफ्तार किया गया था। तभी से भाजपा ने पुलिस प्रशासन की पूरी कार्रवाई पर सवाल उठना शुरू कर दिया था। डीएम और एसएसपी भले ही किसी दबाव में कार्रवाई न करने की बात करते रहे हों, लेकिन मुखिया को सीधे जेल भेजना, जमानतियों का सत्यापन कराने के नाम पर जमानत को टाला जाना और उसके बाद मुखिया गुर्जर पर अगले दिन पीठासीन अधिकारी और वेदपाल उर्फ बेदी की तरफ से दर्ज मुकदमे कहीं न कहीं सवाल खड़े करते हैं।
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इस तमाम कार्रवाई के बीच दो दिसंबर को जब भाजपाइयों ने धरना देते हुए कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया तो डीएम और एसएसपी ने पूरे तेवर में उनसे बात की और मुखिया गुर्जर को माफिया करार दिया। इसके पलटवार में प्रांतीय नेतृत्व से मिली हरी झंडी के बाद भाजपा ने पांच दिसंबर को मोर्चा खोला तो पहले ही दिन पुलिस प्रशासन बैकफुट पर आ गया।
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एक तरफ जहां 151 की जमानत का परवाना तैयार हो गया, तो दूसरी तरफ मुखिया गुर्जर के खिलाफ दर्ज धारा 144 के उल्लंघन और सरकारी काम में बाधा, वेदपाल उर्फ बेदी की तरफ से दर्ज जानलेवा हमले के मुकदमे वारंट तामील कराने आए दरोगा को वापस करा दिया। शाम तक तीसरे चरण के मतदान में उलझे अधिकारियों ने मतदान के बाद ताजा हालात पर मंथन किया और मुखिया गुर्जर को रिहा करने का निर्णय लिया। इसके बाद देर रात जेल में जमानत का परवाना पहुंचा और रविवार सुबह साढे़ छह बजे ही मुखिया गुर्जर रिहा हो गए। यह बात अलग है कि एसडीएम मवाना ने जमानत में 13 दिसंबर तक मेरठ में न आने की शर्त लगाई है।
सुबह जब मुखिया गुर्जर जेल से बाहर आये तो हस्तिनापुर के पूर्व विधायक गोपाल काली, जिला पंचायत सदस्य रोहताश पहलवान के साथ सैकड़ों समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए उनका स्वागत किया और जुलूस के रूप में उन्हें ले गए।