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प्रताड़ना का आरोप लगाकर फांसी से झूला एचसीपी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Mar 2017 02:06 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर के एसडीएम सदर की कोर्ट में तैनात एक एचसीपी का शव बृहस्पतिवार सुबह खरखौदा के काजीपुर गांव के श्मशान घाट में पेड़ से लटका मिला। परिजनों का आरोप है कि एचसीपी ने एसडीएम की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की है। वहीं, पुलिस का कहना है कि मौके से मिले सुसाइड नोट में एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर पर जबरन फंसाने और उत्पीड़न का आरोप है। घटना के बाद मुजफ्फरनगर के अफसरों में हड़कंप मचा रहा। उधर, मुजफ्फरनगर के एसएसपी बबलू कुमार ने एसडीएम को अपने कार्यालय में बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली।
पुलिस के अनुसार हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव मुक्तेश्वरा निवासी बिजेंद्र सिंह (59) पुत्र दाताराम यूपी पुलिस में एचसीपी के पद पर तैनात था। 15 दिन पहले ही उसका तबादला खतौली से मुजफ्फरनगर हुआ था। वह मुजफ्फरनगर में एसडीएम सदर कोर्ट और सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट का काम देख रहा था। एचसपी का परिवार मेडिकल थाना क्षेत्र के अशोक विहार में रहता है। बिजेंद्र रोजाना मेरठ से मुजफ्फरनगर आता-जाता था।
बोला था लौटकर खाऊंगा
परिजनों ने पुलिस को बताया कि बिजेंद्र बुधवार शाम करीब सात बजे घर पहुंचा था। वर्दी बदलकर वह मोबाइल फोन और पेन (कलम) लेकर जाने लगा। परिजनों ने उसे खाना खाने के लिए कहा तो उसने कुछ समय बाद लौटने की बात कही। रात करीब 10 बजे परिजनों ने बिजेंद्र के मोबाइल पर कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। इसके बाद परिजन बिजेंद्र की तलाश करते हुए मेडिकल थाने पहुंचे। वहां पुलिस ने तहरीर और फोटो लेकर अगले दिन आने को कहा। बृहस्पतिवार सुबह खरखौदा थाना क्षेत्र स्थित गांव काजीपुर के एक ग्रामीण ने श्मशान घाट में नीम के पेड़ पर एक शव लटका देखा। सूचना पर एचसीपी के परिजन भी मौके पर पहुंचे और शव की शिनाख्त बिजेंद्र के रूप में की। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद बिजेंद्र का शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बिजेंद्र के परिवार में पत्नी किरण देवी, दो बेटे अरविंद और हिमांशु हैं। अरविंद मेरठ में ही ठेकेदारी करता है, जबकि हिमांशु एनएएस डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। परिवार के सदस्यों को रो-रोकर बुरा हाल था।
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रजिस्टर में लिखा सुसाइड नोट
इंस्पेक्टर खरखौदा मनीष सक्सेना ने बताया कि बिजेंद्र ने मौत से पहले एक रजिस्टर में सुसाइड नोट लिखा था, जो शव के पास बरामद हुआ। इसमें उसने एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर राम अवतार गुप्ता पर जबरन उसे फंसाने का आरोप लगाया है। इसी कारण आत्महत्या करना भी लिखा है। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट, जेब में रखा मोबाइल फोन, पेन और रस्सी कब्जे में ले ली।
सुसाइड नोट का मजमून
इंस्पेक्टर खरखौदा के अनुसार सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘आज एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर राम अवतार गुप्ता ने नौशाद, जो थाना पुरकाजी से बंद था, उसकी फाइल गायब करा दी। 28 फरवरी 2017 को उसकी जमानत आई, तो उन्होंने कहा कि यह बहुत शातिर है, इसको नहीं छोड़ना है। फाइलें दफ्तर में रखी रहती हैं। कल एक जमानती आया था, तो उन्होंने कहा कि दूसरा भी देखूंगा। जब दूसरा आया तो कहा कि फाइल लाओ। फाइल मेरी मेज पर नहीं मिली, क्योंकि उसे जमानत नहीं देनी थी। मुझे फंसाने के लिए मुझ पर आरोप लगाया जा रहा था, इसलिए मैं सुसाइड कर रहा हूं’।
एसडीएम बोले- मैंने नहीं किया शोषण
मुजफ्फरनगर सदर के एसडीएम राम अवतार गुप्ता का कहना है कि पुरकाजी के एक मुल्जिम की रिहाई होनी थी, जिसकी फाइल गुम हो गई थी। इसे लेकर वकीलों ने हंगामा किया था। बाद में डुप्लीकेट कागजों के आधार पर उसे रिहा किया गया। कोर्ट मोहर्रिर को वकीलों के सामने बुलाया भी नहीं गया। एसडीएम का कहना है कि मैंने कोर्ट मोहर्रिर बिजेंद्र को ऐसी कोई बात नहीं कही, जिससे उसे ठेस पहुंचे। फाइल गुम होने पर जब वकीलों ने हंगामा किया तो मामला दबाने के लिए डुप्लीकेट कागजों के आधार पर ही मुल्जिम की रिहाई कर दी गई। इससे पहले वकीलों ने उससे कोई बात कही हो तो इसका मुझे नहीं पता। मैंने सिर्फ यह कहा था कि सिटी मजिस्ट्रेट ने यहां फाइल तलाश करा लो। गुप्ता का यह भी कहना है कि इस मामले के बाद भी बिजेंद्र ने तीन मुल्जिमों की जमानत उनके न्यायालय से कराई। आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि मैंने किसी प्रकार का कोई शोषण नहीं किया है।
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पुलिस के अनुसार हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव मुक्तेश्वरा निवासी बिजेंद्र सिंह (59) पुत्र दाताराम यूपी पुलिस में एचसीपी के पद पर तैनात था। 15 दिन पहले ही उसका तबादला खतौली से मुजफ्फरनगर हुआ था। वह मुजफ्फरनगर में एसडीएम सदर कोर्ट और सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट का काम देख रहा था। एचसपी का परिवार मेडिकल थाना क्षेत्र के अशोक विहार में रहता है। बिजेंद्र रोजाना मेरठ से मुजफ्फरनगर आता-जाता था।
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बोला था लौटकर खाऊंगा
परिजनों ने पुलिस को बताया कि बिजेंद्र बुधवार शाम करीब सात बजे घर पहुंचा था। वर्दी बदलकर वह मोबाइल फोन और पेन (कलम) लेकर जाने लगा। परिजनों ने उसे खाना खाने के लिए कहा तो उसने कुछ समय बाद लौटने की बात कही। रात करीब 10 बजे परिजनों ने बिजेंद्र के मोबाइल पर कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। इसके बाद परिजन बिजेंद्र की तलाश करते हुए मेडिकल थाने पहुंचे। वहां पुलिस ने तहरीर और फोटो लेकर अगले दिन आने को कहा। बृहस्पतिवार सुबह खरखौदा थाना क्षेत्र स्थित गांव काजीपुर के एक ग्रामीण ने श्मशान घाट में नीम के पेड़ पर एक शव लटका देखा। सूचना पर एचसीपी के परिजन भी मौके पर पहुंचे और शव की शिनाख्त बिजेंद्र के रूप में की। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद बिजेंद्र का शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बिजेंद्र के परिवार में पत्नी किरण देवी, दो बेटे अरविंद और हिमांशु हैं। अरविंद मेरठ में ही ठेकेदारी करता है, जबकि हिमांशु एनएएस डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। परिवार के सदस्यों को रो-रोकर बुरा हाल था।
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रजिस्टर में लिखा सुसाइड नोट
इंस्पेक्टर खरखौदा मनीष सक्सेना ने बताया कि बिजेंद्र ने मौत से पहले एक रजिस्टर में सुसाइड नोट लिखा था, जो शव के पास बरामद हुआ। इसमें उसने एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर राम अवतार गुप्ता पर जबरन उसे फंसाने का आरोप लगाया है। इसी कारण आत्महत्या करना भी लिखा है। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट, जेब में रखा मोबाइल फोन, पेन और रस्सी कब्जे में ले ली।
सुसाइड नोट का मजमून
इंस्पेक्टर खरखौदा के अनुसार सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘आज एसडीएम सदर मुजफ्फरनगर राम अवतार गुप्ता ने नौशाद, जो थाना पुरकाजी से बंद था, उसकी फाइल गायब करा दी। 28 फरवरी 2017 को उसकी जमानत आई, तो उन्होंने कहा कि यह बहुत शातिर है, इसको नहीं छोड़ना है। फाइलें दफ्तर में रखी रहती हैं। कल एक जमानती आया था, तो उन्होंने कहा कि दूसरा भी देखूंगा। जब दूसरा आया तो कहा कि फाइल लाओ। फाइल मेरी मेज पर नहीं मिली, क्योंकि उसे जमानत नहीं देनी थी। मुझे फंसाने के लिए मुझ पर आरोप लगाया जा रहा था, इसलिए मैं सुसाइड कर रहा हूं’।
एसडीएम बोले- मैंने नहीं किया शोषण
मुजफ्फरनगर सदर के एसडीएम राम अवतार गुप्ता का कहना है कि पुरकाजी के एक मुल्जिम की रिहाई होनी थी, जिसकी फाइल गुम हो गई थी। इसे लेकर वकीलों ने हंगामा किया था। बाद में डुप्लीकेट कागजों के आधार पर उसे रिहा किया गया। कोर्ट मोहर्रिर को वकीलों के सामने बुलाया भी नहीं गया। एसडीएम का कहना है कि मैंने कोर्ट मोहर्रिर बिजेंद्र को ऐसी कोई बात नहीं कही, जिससे उसे ठेस पहुंचे। फाइल गुम होने पर जब वकीलों ने हंगामा किया तो मामला दबाने के लिए डुप्लीकेट कागजों के आधार पर ही मुल्जिम की रिहाई कर दी गई। इससे पहले वकीलों ने उससे कोई बात कही हो तो इसका मुझे नहीं पता। मैंने सिर्फ यह कहा था कि सिटी मजिस्ट्रेट ने यहां फाइल तलाश करा लो। गुप्ता का यह भी कहना है कि इस मामले के बाद भी बिजेंद्र ने तीन मुल्जिमों की जमानत उनके न्यायालय से कराई। आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि मैंने किसी प्रकार का कोई शोषण नहीं किया है।