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हत्यारोपी बेटे से मां की लाश नहीं बरामद करा सकी पुलिस

Thu, 31 May 2018 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 31 May 2018 01:00 AM IST
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hatya ropi bete se maa ki laash nahi baraamad kar saki police
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
अपहृत कमलेश अग्रवाल की लाश एक साल बाद भी मेरठ पुलिस हत्यारोपी बेटे से बरामद नहीं करा सकी। जबकि खुलासा हो चुका था कि 25 करोड़ की प्रॉपर्टी हथियाने के लिए महिला को मार दिया गया। पुलिस की लापरवाही का सबसे बड़ा नमूना यह है कि कमलेश आज भी सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा हैं और पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर लेने की जहमत तक नहीं उठाई।
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साढे़ चार माह में खुला था केस 
22 मार्च 2017 को दीपक अग्रवाल ने पल्लवपुरम थाने में अपनी मां कमलेश अग्रवाल के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करायी थी। दीपक ने अपने मामा पर शक जताया था। लेकिन जांच में मामा की कोई भूमिका सामने नहीं आई। दीपक ने एसएसपी से लेकर डीजीपी, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक ऑनलाइन शिकायत की। जिसके बाद यह केस पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया था। तत्कालीन सीओ दौराला विजय प्रकाश ने सर्विलांस की मदद से कमलेश का मोबाइल फोन 10 अगस्त 2017 को एक दुकानदार से बरामद किया। दुकानदार की निशानदेही पर विनोद नाम के शख्स को हिरासत में लिया गया तो उसने पूछताछ में दीपक का नाम बताया। पुलिस ने विनोद और दीपक से सख्ती से पूछताछ की तो दोनों ने कमलेश की अपहरण के बाद हत्या करना कबूला। 13 अगस्त 2017 प्रेसवार्ता में इसका खुलासा हुआ। 
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फूलप्रूफ प्लानिंग, ड्राइवर भी लापता
पुलिस के अनुसार दीपक ने वारदात के लिए फूलप्रूफ प्लानिंग की थी। मां की 25 करोड़ की संपत्ति हड़पने की खातिर उसने अपने प्लान में नौकरानी के बेटे विनोद को शामिल किया। वह जानता था कि उसकी मां किसी पर विश्वास नहीं करती। विनोद को वह जानती थी। दीपक और कमलेश में अक्सर विवाद रहता था। विनोद को किसी भी बहाने से कमलेश को सिर्फ गाड़ी में बैठवाना था। प्लान के मुताबिक सलीम नाम का शख्स स्विफ्ट गाड़ी लेकर कमलेश के घर के बाहर पहुंचा। विनोद ने किसी बहाने से कमलेश को स्विफ्ट गाड़ी में बैठा दिया। उसके बाद सलीम उसे ले गया। दीपक और विनोद दूसरी गाड़ी से पीछे-पीछे पहुंचे। हत्या कर कमलेश की लाश नहर में फेंक दी। ड्राइवर सलीम का भी आज तक पता नहीं चला। 
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कमलेश के फोन से मांगते रहे फिरौती
शातिर दीपक ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए यह फिरौती के लिए अपहरण का केस बनाया था। उसने अपनी मां का मोबाइल विनोद को दे दिया था। विनोद दीपक के मोबाइल पर बार-बार इस कमलेश के नंबर से कॉल कर पांच करोड की फिरौती मांगता था। पुलिस फिरौती मांगने वाले की तलाश में जुटी रही और दीपक पर कभी शक नहीं हुआ। लगातार सुर्खियों में रहे इस केस में कमलेश की बरामदगी चुनौती बनी थी। पुलिस ने दो दर्जन संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। लेकिन नाकामी हाथ लगी।

ऐसे खुला था ये केस
इस वारदात पर सर्विलांस पर सबसे ज्यादा काम हुआ। साइबर एक्सपर्ट सिपाही जयवर्धन कमलेश के फोन समेत दर्जनों मोबाइल फोनों पर लगातार चार माह तक काम करता रहा। पुलिस को अंदेशा तो था कि अपहरण में दीपक का हाथ है। लेकिन दीपक वादी के साथ अधिवक्ता भी था। जिसके चलते पुलिस ठोस सुबूत हाथ में आने के बाद ही उसे गिरफ्त में लेने की तैयारी में थी। तत्कालीन सीओ दौराला विजय प्रकाश ने विनोद की निशानदेही पर दीपक को गिरफ्तार किया तो केस खुला।


अधूरा खुलासा, खामोश सिस्टम
पुलिस ने कमलेश अपहरण कांड का अधूरा खुलासा कर चुप्पी साध ली। दावा किया कि कमलेश हत्याकांड में दीपक और विनोद शामिल थे। वजह कमलेश की 25 करोड की प्रॉपर्टी हथियाना थी। लेकिन सच्चाई यह है कि पुलिस ने कमलेश की लाश बरामद करने के लिए कोई खास प्रयास नहीं किया। उधर, आरोपी जमानत के लिए हाईकोर्ट तक पहुंचे। लेकिन अर्जी खारिज हो गई थी।

 
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