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बहसूमा से लूटी कार गाजियाबाद में छोड़ भागे बदमाश
ब्यूरो/ अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 16 Mar 2016 01:57 AM IST
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पीड़ितों से पूछताछ करतीं डीआईजी।
- फोटो : अमर उजाला
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बहसूमा में सोमवार देर रात दंपति से लूटी गई कार गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के अकबरपुर के जंगल से बरामद हो गई। पुलिस का दावा है कि चौतरफा घेराबंदी के चलते बदमाश कार छोड़कर भागने को मजबूर हो गए।
ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के माधवपुरम निवासी डेंटिस्ट कमलेश कुमार और उनके परिवार को बंधक बनाकर लूटी गई इस शेवरले बीट कार की तलाश में मेरठ जोन की पुलिस लगा दी गई थी। एसपी देहात प्रवीण रंजन के अनुसार कार अकबरपुर के जंगल से बरामद होने की सूचना मंगलवार सुबह करीब 11 बजे मिली।
बदमाश कमलेश की पत्नी और बच्चों को मेडिकल कॉलेज के पास उतारने के बाद संभवत: संपर्क मार्गों और गांवों के अंदरूनी रास्तों से भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मेरठ और गाजियाबाद पुलिस की घेराबंदी के चलते बदमाशों को लगा कि वे पकड़े जा सकते हैं।
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बदमाशों का बचाव तो कोई पुलिस से सीखे
मेरठ। बहसूमा में डेंटिस्ट को लाठी-डंडों और तमंचे की बट से पीटा, हाथ पैर बांधकर खेत में फेंक दिया और फिर बदमाश हवाई फायर कर उसके परिवार को कार समेत अपहरण कर ले गए। शहर में पहुंचे तो मेडिकल कॉलेज के गेट के पास पत्नी और बच्चों को फेंककर कार लेकर गढ़ की तरफ फरार हो गए।
सब कुछ स्पष्ट है, लेकिन पुलिस को भी तो बदमाशों का बचाव करना है, इसलिए इसे केवल लूट का मामला मानकर अपहरण की धारा ही हटा दी गई। डेंटिस्ट कमलेश का कहना है कि मेरे और परिवार के साथ सोमवार रात जो हुआ था, उसकी मैंने इन सभी बातों का जिक्र किया, लेकिन बहसूमा थाना पुलिस ने रिपोर्ट में अपहरण की धारा नहीं लगाई।
कमलेश का कहना है कि वारदात से बाद से वह बेहद डरा हुआ था। इसलिए उसने कार के बॉक्स में रखे 10 हजार रुपये का भी जिक्र नहीं किया। पुलिस वालों ने रात को ही मेडिकल थाने में उससे घटना की तहरीर लिखवाई। जिस तरह पुलिस वालों ने समझाया, मैंने तहरीर लिखी।
थाना प्रभारी का बचकाना बयान
इस संबंध में एसओ बहसूमा बचन सिंह सिरोही का कहना है कि दंपति से केवल लूट हुई है। बदमाशों का इरादा भी यही था। उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि कार में डेंटिस्ट की बीवी और बच्चे भी हैं।
कार लूटकर भागने के बाद इसका पता चला। जिसके बाद बदमाशों ने कमलेश की पत्नी और बच्चों को मेडिकल क्षेत्र में सुरक्षित उतार दिया। उनके साथ कोई मारपीट या लूटपाट भी नहीं की गई। इसलिए यह मामला अपहरण का नहीं बनता।
... तो जवाब देते नहीं बनता
मेरठ। दरअसल लूट की वारदात मेरठ पुलिस के लिए आम बात है। बहसूमा में हुई कार लूट की वारदात को शायद पुलिस इतनी गंभीरता से न लेती, लेकिन जब अफसरों को पता चला कि बदमाश कार में डेंटिस्ट की पत्नी और दो बच्चों का अपहरण कर ले गए हैं तो पूरा पुलिस महकमा हिल गया।
आला अफसरों ने मेरठ, गाजियाबाद और बागपत में नाकाबंदी करा दी थी। हालांकि गनीमत रही कि बदमाश परिवार को मेडिकल में छोड़कर भाग गए। वैसे भी मंगलवार को सपा सरकार के चार साल पूरे होने पर वर्षगांठ मनाई जानी थी। असल चिंता अफसरों को यही थी कि यदि महिला और बच्चों के साथ कोई अनहोनी हो गई तो क्या जवाब देंगे और सरकार में भी इसका गलत मेसेज जाएगा।
अपहरण कांड में खुद उलझी पुलिस
महिला और उसके दो मासूम बच्चों के अपहरण कांड की गुत्थी में पुलिस खुद उलझकर रह गई है। पुलिस अधिकारी कभी रोडरेज तो कभी परिचितों द्वारा यह वारदात करने का अंदेशा जताने में लगे हैं। हालांकि पुलिस की दोनों कहानियों की पटकथा को पीड़ित परिवार मानने को तैयार नहीं है।
पीड़ित दंपति का कहना है कि उनके पास नकदी, जेवरात थे, लेकिन बदमाशों ने कुछ नहीं लूटा। यह बात सुनकर पुलिस की समस्या कम नहीं, बल्कि बढ़ गई। सवाल है कि आखिर बदमाशों ने महिला और उसके दोनों बच्चों को अगवा क्यों किया। डीआईजी व एसएसपी ने पीड़ित परिवार से खुद पूछताछ की, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला।
मंगलवार को पुलिस अधिकारी अलग-अलग कयास लगाते रहे। पीड़ित परिवार से लूट नहीं हुई, अनहोनी नहीं हुई, दुष्कर्म की बात भी झूठी निकली। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने एक ही तर्क दिया कि महिला समेत कई लोगों के मोबाइल फोन की सीडीआर निकाली जा रही है, जिससे मामले की गुत्थी सुलझ सकती है।
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ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के माधवपुरम निवासी डेंटिस्ट कमलेश कुमार और उनके परिवार को बंधक बनाकर लूटी गई इस शेवरले बीट कार की तलाश में मेरठ जोन की पुलिस लगा दी गई थी। एसपी देहात प्रवीण रंजन के अनुसार कार अकबरपुर के जंगल से बरामद होने की सूचना मंगलवार सुबह करीब 11 बजे मिली।
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बदमाश कमलेश की पत्नी और बच्चों को मेडिकल कॉलेज के पास उतारने के बाद संभवत: संपर्क मार्गों और गांवों के अंदरूनी रास्तों से भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मेरठ और गाजियाबाद पुलिस की घेराबंदी के चलते बदमाशों को लगा कि वे पकड़े जा सकते हैं।
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बदमाशों का बचाव तो कोई पुलिस से सीखे
मेरठ। बहसूमा में डेंटिस्ट को लाठी-डंडों और तमंचे की बट से पीटा, हाथ पैर बांधकर खेत में फेंक दिया और फिर बदमाश हवाई फायर कर उसके परिवार को कार समेत अपहरण कर ले गए। शहर में पहुंचे तो मेडिकल कॉलेज के गेट के पास पत्नी और बच्चों को फेंककर कार लेकर गढ़ की तरफ फरार हो गए।
सब कुछ स्पष्ट है, लेकिन पुलिस को भी तो बदमाशों का बचाव करना है, इसलिए इसे केवल लूट का मामला मानकर अपहरण की धारा ही हटा दी गई। डेंटिस्ट कमलेश का कहना है कि मेरे और परिवार के साथ सोमवार रात जो हुआ था, उसकी मैंने इन सभी बातों का जिक्र किया, लेकिन बहसूमा थाना पुलिस ने रिपोर्ट में अपहरण की धारा नहीं लगाई।
कमलेश का कहना है कि वारदात से बाद से वह बेहद डरा हुआ था। इसलिए उसने कार के बॉक्स में रखे 10 हजार रुपये का भी जिक्र नहीं किया। पुलिस वालों ने रात को ही मेडिकल थाने में उससे घटना की तहरीर लिखवाई। जिस तरह पुलिस वालों ने समझाया, मैंने तहरीर लिखी।
थाना प्रभारी का बचकाना बयान
इस संबंध में एसओ बहसूमा बचन सिंह सिरोही का कहना है कि दंपति से केवल लूट हुई है। बदमाशों का इरादा भी यही था। उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि कार में डेंटिस्ट की बीवी और बच्चे भी हैं।
कार लूटकर भागने के बाद इसका पता चला। जिसके बाद बदमाशों ने कमलेश की पत्नी और बच्चों को मेडिकल क्षेत्र में सुरक्षित उतार दिया। उनके साथ कोई मारपीट या लूटपाट भी नहीं की गई। इसलिए यह मामला अपहरण का नहीं बनता।
... तो जवाब देते नहीं बनता
मेरठ। दरअसल लूट की वारदात मेरठ पुलिस के लिए आम बात है। बहसूमा में हुई कार लूट की वारदात को शायद पुलिस इतनी गंभीरता से न लेती, लेकिन जब अफसरों को पता चला कि बदमाश कार में डेंटिस्ट की पत्नी और दो बच्चों का अपहरण कर ले गए हैं तो पूरा पुलिस महकमा हिल गया।
आला अफसरों ने मेरठ, गाजियाबाद और बागपत में नाकाबंदी करा दी थी। हालांकि गनीमत रही कि बदमाश परिवार को मेडिकल में छोड़कर भाग गए। वैसे भी मंगलवार को सपा सरकार के चार साल पूरे होने पर वर्षगांठ मनाई जानी थी। असल चिंता अफसरों को यही थी कि यदि महिला और बच्चों के साथ कोई अनहोनी हो गई तो क्या जवाब देंगे और सरकार में भी इसका गलत मेसेज जाएगा।
अपहरण कांड में खुद उलझी पुलिस
महिला और उसके दो मासूम बच्चों के अपहरण कांड की गुत्थी में पुलिस खुद उलझकर रह गई है। पुलिस अधिकारी कभी रोडरेज तो कभी परिचितों द्वारा यह वारदात करने का अंदेशा जताने में लगे हैं। हालांकि पुलिस की दोनों कहानियों की पटकथा को पीड़ित परिवार मानने को तैयार नहीं है।
पीड़ित दंपति का कहना है कि उनके पास नकदी, जेवरात थे, लेकिन बदमाशों ने कुछ नहीं लूटा। यह बात सुनकर पुलिस की समस्या कम नहीं, बल्कि बढ़ गई। सवाल है कि आखिर बदमाशों ने महिला और उसके दोनों बच्चों को अगवा क्यों किया। डीआईजी व एसएसपी ने पीड़ित परिवार से खुद पूछताछ की, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला।
मंगलवार को पुलिस अधिकारी अलग-अलग कयास लगाते रहे। पीड़ित परिवार से लूट नहीं हुई, अनहोनी नहीं हुई, दुष्कर्म की बात भी झूठी निकली। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने एक ही तर्क दिया कि महिला समेत कई लोगों के मोबाइल फोन की सीडीआर निकाली जा रही है, जिससे मामले की गुत्थी सुलझ सकती है।