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फरारी से पहले जेल में बना तीन कुख्यातों का गैंग
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 04 Nov 2016 02:32 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस कस्टडी से इकराम को छुड़ाकर ले जाने की सूचना जब सेशन हवालात पहुंची तो बंदियों ने चिल्लाकर कहा कि इकराम खूनखराबा करने के लिए भागा है। कुछ बंदियों ने पुलिस अफसरों को जेल में बनी प्लानिंग के बारे में बताया। बंदियों की बातों पर यकीन करें तो जेल में बंद कुख्यात भरतू नाई, देवेश त्यागी और इकराम का गैंग बन गया था। भरतू और देवेश ने ही इकराम को कस्टडी से भगाने की पटकथा तैयार की है। कुख्यातों ने अपने-अपने दुश्मनों का खात्मा करने का टारगेट भी इकराम को दिया है।
हत्या के मुल्जिम इकराम के फरार होने की जानकारी लगते ही पुलिस अफसर कचहरी में पहुंच गए। पुलिस अफसरों ने इकराम के साथ दोनों बंदियों राहुल और योगेश से घटनाक्रम के बारे में पूछा। दोनों बंदियों का कहना था कि बदमाश पूरी प्लानिंग के साथ आए थे। अगर इकराम नहीं छूटता तो कचहरी में बड़ा खूनखराबा हो सकता था। उसके बाद अफसरों को सेशन हवालात में बंद बंदियों ने बताया कि इकराम की प्लानिंग तो जेल से बनी थी।
बंदियों के अनुसार कुख्यात भरतू नाई और देवेश त्यागी का जेल में गिरोह बना हुआ है। दोनों शातिर बदमाश हैं और इनके साथ ही इकराम जुड़ा था। भरतू नाई 50 हजार के इनामी रह चुके मोनू जाट का साथी है, जबकि देवेश त्यागी जागृति विहार में रजत वशिष्ठ की हत्या समेत कई आपराधिक मामलों में बंद है। कुछ दिन पहले देवेश ने जागृति विहार में शिवानी ज्वैलर्स के मालिक दीपक वर्मा पर रंगदारी न देने पर गोलियां चलवा दी थीं। इसके अलावा भरतू नाई अपने गवाहों की हत्या कराना चाहता है।
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सामान्य बैरक में हुआ था शिफ्ट
बंदियों ने बताया कि इकराम हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद था। उसकी बैरक के पास ही भरतू नाई और देवेश त्यागी की बैरक है। तीनों की अक्सर घंटो बातचीत होती थी। तीन दिन पहले ही इकराम को सामान्य बैरक में शिफ्ट किया गया था। बंदियोें की मानें तो जेल प्रशासन से साठगांठ कर इकराम को सामान्य बैरक में शिफ्ट किया गया। हालांकि इस आरोप का किसी बंदी पर कोई प्रमाण नहीं है।
बंदी चिल्लाए, बचा लो लोगों को
इकराम की फरारी का पता लगते ही सेशन हवालात में बंदी चिल्लाने लगे। उनका कहना था कि इकराम कई लोगों की हत्या करने के लिए फरार हुआ है। भरतू नाई, मोनू जाट व देवेश त्यागी के गवाहों की हत्या कभी भी हो सकती है। उनको बचा लो...। इतना सुनते ही पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस ने रोहटा और मेडिकल पुलिस से दोनों कुख्यातों के बारे में जानकारी ली। जिन लोगों को देवेश, भरतू नाई और मोनू जाट को खतरा है, उनको तुरंत इकराम के भागने की जानकारी देने को कहा गया।
सरधना के बाद लिसाड़ीगेट में करने लगा था क्राइम
4 दिसंबर 2010 को लखीपुरा लिसाड़ी गेट निवासी नदीम की हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस ने खिर्वा के रहने वाले इकराम, दिलशाद, फरमान, आजाद, भावनपुर निवासी मोमीन समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमा एडीजे-7 की कोर्ट में विचाराधीन है। सभी आरोपियों की पेशी न हो पाने के कारण कोई भी अग्रिम कार्यवाही नहीं हो पा रही थी। पत्रावली सभी आरोपियों की हाजिरी के लिए चल रही है। सरधना में इकराम के खिलाफ 12 मुकदमे पंजीकृत हैं। पुलिस ने बताया कि सरधना के बाद वह लिसाड़ी गेट में क्राइम करने लगा था। वहां पर उसके खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हैं।
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हत्या के मुल्जिम इकराम के फरार होने की जानकारी लगते ही पुलिस अफसर कचहरी में पहुंच गए। पुलिस अफसरों ने इकराम के साथ दोनों बंदियों राहुल और योगेश से घटनाक्रम के बारे में पूछा। दोनों बंदियों का कहना था कि बदमाश पूरी प्लानिंग के साथ आए थे। अगर इकराम नहीं छूटता तो कचहरी में बड़ा खूनखराबा हो सकता था। उसके बाद अफसरों को सेशन हवालात में बंद बंदियों ने बताया कि इकराम की प्लानिंग तो जेल से बनी थी।
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बंदियों के अनुसार कुख्यात भरतू नाई और देवेश त्यागी का जेल में गिरोह बना हुआ है। दोनों शातिर बदमाश हैं और इनके साथ ही इकराम जुड़ा था। भरतू नाई 50 हजार के इनामी रह चुके मोनू जाट का साथी है, जबकि देवेश त्यागी जागृति विहार में रजत वशिष्ठ की हत्या समेत कई आपराधिक मामलों में बंद है। कुछ दिन पहले देवेश ने जागृति विहार में शिवानी ज्वैलर्स के मालिक दीपक वर्मा पर रंगदारी न देने पर गोलियां चलवा दी थीं। इसके अलावा भरतू नाई अपने गवाहों की हत्या कराना चाहता है।
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सामान्य बैरक में हुआ था शिफ्ट
बंदियों ने बताया कि इकराम हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद था। उसकी बैरक के पास ही भरतू नाई और देवेश त्यागी की बैरक है। तीनों की अक्सर घंटो बातचीत होती थी। तीन दिन पहले ही इकराम को सामान्य बैरक में शिफ्ट किया गया था। बंदियोें की मानें तो जेल प्रशासन से साठगांठ कर इकराम को सामान्य बैरक में शिफ्ट किया गया। हालांकि इस आरोप का किसी बंदी पर कोई प्रमाण नहीं है।
बंदी चिल्लाए, बचा लो लोगों को
इकराम की फरारी का पता लगते ही सेशन हवालात में बंदी चिल्लाने लगे। उनका कहना था कि इकराम कई लोगों की हत्या करने के लिए फरार हुआ है। भरतू नाई, मोनू जाट व देवेश त्यागी के गवाहों की हत्या कभी भी हो सकती है। उनको बचा लो...। इतना सुनते ही पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस ने रोहटा और मेडिकल पुलिस से दोनों कुख्यातों के बारे में जानकारी ली। जिन लोगों को देवेश, भरतू नाई और मोनू जाट को खतरा है, उनको तुरंत इकराम के भागने की जानकारी देने को कहा गया।
सरधना के बाद लिसाड़ीगेट में करने लगा था क्राइम
4 दिसंबर 2010 को लखीपुरा लिसाड़ी गेट निवासी नदीम की हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस ने खिर्वा के रहने वाले इकराम, दिलशाद, फरमान, आजाद, भावनपुर निवासी मोमीन समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमा एडीजे-7 की कोर्ट में विचाराधीन है। सभी आरोपियों की पेशी न हो पाने के कारण कोई भी अग्रिम कार्यवाही नहीं हो पा रही थी। पत्रावली सभी आरोपियों की हाजिरी के लिए चल रही है। सरधना में इकराम के खिलाफ 12 मुकदमे पंजीकृत हैं। पुलिस ने बताया कि सरधना के बाद वह लिसाड़ी गेट में क्राइम करने लगा था। वहां पर उसके खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हैं।