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प्रेमिका के लिए पिता का कातिल बना सीआरपीएफ का फर्जी एएसआई
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Thu, 08 Feb 2018 11:12 PM IST
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हत्या के आरोप में पकड़ा गया आरोपी पुत्र
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेरठ के परतापुर में पोस्टमैन चंद्रपाल की हत्या का बृहस्पतिवार को सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसपी सिटी मान सिंह चौहान के अनुसार कातिल कोई बदमाश नहीं, बल्कि पोस्टमैन का सगा बेटा सामने आया है, जो सीआरपीएफ का फर्जी एएसआई बनकर परिवार की आंखों में डेढ़ साल से धूल झोक रहा था। हत्यारोपी बेटे का एक रिश्तेदार की बेटी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। प्रेमिका की शर्त थी कि सरकारी नौकरी लगेगी तो वह उससे शादी करेगी। पिता की हत्या कर उसकी जगह सरकारी नौकरी पाने और प्रेमिका से शादी करने के लिए बेटे ने अपने दोस्त के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने हत्यारोपी बेटे और उसके दोस्त को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, लोहे की रॉड, सीआरपीएफ की वर्दी बरामद की है।
यह हुई थी घटना
एक फरवरी को परतापुर के गांव काजमाबाद गून निवासी पोस्टमैन चंद्रपाल की उनके खेत पर ही हत्या कर दी गई थी। चंद्रपाल के बेटों ने हत्या के खुलासे की मांग करते हुए दो घंटे तक शव नहीं उठने दिया था। पुलिस के अनुसार परिजनों ने किसी रंजिश से इंकार किया था। जांच पड़ताल के बाद हत्यारोपी चंद्रपाल का बेटा तरुण उर्फ हनी और उसका दोस्त सनी निकला।
सीआरपीएफ का फर्जी एएसआई बना
एसपी सिटी के अनुसार हत्यारोपी तरुण सन 2016 में रामपुर में सीआरपीएफ की भर्ती में फेल हो गया था। लेकिन तरुण ने यह बात अपने परिवार से छुपा ली थी। करीब डेढ़ साल से तरुण सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर घर से जाता व शाम को लौट आता था। उसने खुद की पोस्टिंग 89 बटालियन साकेत दिल्ली में बताई हुई थी। पिता पोस्टमैन थे। वह हर माह तरुण से वेतन के बारे में पूछते थे। लेकिन तरुण उनको बहला देता था कि मामला कोर्ट में चला गया है। एक साथ वेतन मिल जाएगा।
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एक तीर से दो निशाने
पोस्टमैन चंद्रपाल को शक होने लगा था कि तरुण झूठ बोल रहा है। तरुण अपने एक रिश्तेदार की बेटी से प्रेम करता था। उधर, प्रेमिका को भी शक था कि तरुण सीआरपीएफ में दरोगा नहीं है। प्रेमिका ने भी शर्त रखी कि तरुण की पक्की सरकारी नौकरी होनी चाहिए। इसके बाद तरुण ने सोचा कि पिता की हत्या कर उनकी जगह पोस्टमैन की सरकारी नौकरी मिल जाएगी और प्रेमिका से शादी भी हो जाएगी। पिता को मारने के लिए तरुण ने अपने दोस्त सनी को प्लानिंग में शामिल कर लिया।
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यह हुई थी घटना
एक फरवरी को परतापुर के गांव काजमाबाद गून निवासी पोस्टमैन चंद्रपाल की उनके खेत पर ही हत्या कर दी गई थी। चंद्रपाल के बेटों ने हत्या के खुलासे की मांग करते हुए दो घंटे तक शव नहीं उठने दिया था। पुलिस के अनुसार परिजनों ने किसी रंजिश से इंकार किया था। जांच पड़ताल के बाद हत्यारोपी चंद्रपाल का बेटा तरुण उर्फ हनी और उसका दोस्त सनी निकला।
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सीआरपीएफ का फर्जी एएसआई बना
एसपी सिटी के अनुसार हत्यारोपी तरुण सन 2016 में रामपुर में सीआरपीएफ की भर्ती में फेल हो गया था। लेकिन तरुण ने यह बात अपने परिवार से छुपा ली थी। करीब डेढ़ साल से तरुण सीआरपीएफ की वर्दी पहनकर घर से जाता व शाम को लौट आता था। उसने खुद की पोस्टिंग 89 बटालियन साकेत दिल्ली में बताई हुई थी। पिता पोस्टमैन थे। वह हर माह तरुण से वेतन के बारे में पूछते थे। लेकिन तरुण उनको बहला देता था कि मामला कोर्ट में चला गया है। एक साथ वेतन मिल जाएगा।
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एक तीर से दो निशाने
पोस्टमैन चंद्रपाल को शक होने लगा था कि तरुण झूठ बोल रहा है। तरुण अपने एक रिश्तेदार की बेटी से प्रेम करता था। उधर, प्रेमिका को भी शक था कि तरुण सीआरपीएफ में दरोगा नहीं है। प्रेमिका ने भी शर्त रखी कि तरुण की पक्की सरकारी नौकरी होनी चाहिए। इसके बाद तरुण ने सोचा कि पिता की हत्या कर उनकी जगह पोस्टमैन की सरकारी नौकरी मिल जाएगी और प्रेमिका से शादी भी हो जाएगी। पिता को मारने के लिए तरुण ने अपने दोस्त सनी को प्लानिंग में शामिल कर लिया।
मैंने पिता के पैर पकड़े, दोस्त ने रेता था गला
बरामद सीआरपीएफ की वर्दी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
हत्यारोपी तरुण बोला कि रोजाना की तरह एक फरवरी की शाम उसके पिता चंद्रपाल खेत में घूमने गए थे। जहां वह अपने दोस्त सनी के साथ मौजूद था। हम तीनों की करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। अंधेरा होने पर तीनों घर की तरफ चल पड़े। आगे पिता बीच में सनी और पीछे मैं था। इसी दौरान सनी ने चंद्रपाल के सिर में लोहे की रॉड मारी। जिस पर चंद्रपाल जमीन पर गिर गए। खतरा भांपकर चंद्रपाल उठकर भागने लगे, तभी बेटे तरुण ने उनके सिर पर दूसरा प्रहार लोहे की रॉड से किया। जिस पर चंद्रपाल बेहोश हो गए। मामला यही नहीं थमा। क्योंकि दोनों पहले से ही चंद्रपाल की हत्या का प्लान बना चुके थे। तरुण ने अपने पिता के पैर पकड़ लिए थे और सनी ने चाकू से उनका गला रेत दिया था। प्रेसवार्ता में तरुण ने बताया कि पीछे से लोहे की रॉड लगने के बाद पापा चंद्रपाल की आंख एक बार खुली थी। लेकिन चंद्रपाल को दोनों ने दबोचा हुआ था। चंद्रपाल को यकीन नहीं था कि जिस बेटे को उसने पढ़ा लिखाकर इतना बड़ा कर दिया। एक दिन वही उसकी जान ले लेगा। तरुण के एक बार भी पिता को मारने में हाथ नहीं कांपे।
बेटा भाग, बदमाश आ गए
पहला वार चंद्रपाल के सिर पर सनी ने किया था। चंद्रपाल को लगा कि शायद बदमाश आ गए। चंद्रपाल ने शोर भी मचाया कि बेटा तरुण भाग जा। तभी दूसरा वार चंद्रपाल के सिर पर तरुण ने किया। चंद्रपाल को क्या पता था कि जिस बेटे को वह बचाने के लिए चिल्ला रहा, वही उसकी हत्या कर रहा है। वारदात करने के बाद तरुण अपने दोस्त के साथ गांव आ गया था। एसपी सिटी ने प्रेसवार्ता में दोनों हत्यारोपियों को मीडिया के सामने पेश किया। एसपी सिटी के पूछने पर तरुण बोला कि उसने अपने दोस्त सनी को तीन लाख रुपये देने का वायदा किया था। तीन लाख रुपये वह पिता की हत्या के बाद सरकारी फंड मिलने के बाद देगा। उसके बाद प्लानिंग कर पिता चंद्रपाल की हत्या की वारदात को तरुण व सन्नी ने अंजाम दिया था।
बेटा भाग, बदमाश आ गए
पहला वार चंद्रपाल के सिर पर सनी ने किया था। चंद्रपाल को लगा कि शायद बदमाश आ गए। चंद्रपाल ने शोर भी मचाया कि बेटा तरुण भाग जा। तभी दूसरा वार चंद्रपाल के सिर पर तरुण ने किया। चंद्रपाल को क्या पता था कि जिस बेटे को वह बचाने के लिए चिल्ला रहा, वही उसकी हत्या कर रहा है। वारदात करने के बाद तरुण अपने दोस्त के साथ गांव आ गया था। एसपी सिटी ने प्रेसवार्ता में दोनों हत्यारोपियों को मीडिया के सामने पेश किया। एसपी सिटी के पूछने पर तरुण बोला कि उसने अपने दोस्त सनी को तीन लाख रुपये देने का वायदा किया था। तीन लाख रुपये वह पिता की हत्या के बाद सरकारी फंड मिलने के बाद देगा। उसके बाद प्लानिंग कर पिता चंद्रपाल की हत्या की वारदात को तरुण व सन्नी ने अंजाम दिया था।